क्या आप जानते हैं कि महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षण अलग महसूस होते हैं? आमतौर लोगों का ध्यान इस ओर नहीं जाता है। जबकि, हकीकत बात यह है कि पुरुषों और महिलाओं में इसके लक्षणों में सामान्य फर्क देखने को मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में इसका अनुभव हमेशा इतना स्पष्ट नहीं होता।
World Heart Day 2026 के मौके पर Dr. Ujjawal Kumar, Senior Consultant - Cardiology, Sarvodaya Hospital, Faridabad बताते हैं, "सीने में दर्द या दबाव महिलाओं में भी हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण है, लेकिन उनके साथ सांस फूलना, असामान्य थकान, मतली, अपच, चक्कर, पीठ, कंधे, गर्दन या जबड़े में दर्द जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। यही वजह है कि कई बार महिलाएं इन संकेतों को गैस, एसिडिटी, थकान, तनाव या किसी सामान्य समस्या से जोड़कर देखती हैं और इन सामान्य नजर आ रहे गंभीर लक्षणों को अनदेखा कर देती हैं। ऐसे में इलाज में देरी हो सकती है।"
महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग क्यों हैं?
women experience symptoms of heart attack differently than men
यह जरूरी नहीं है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण हमेशा पुरुषों की तुलना में अलग ही होंगे। हालांकि, इसे समझने के लिए सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि पुरुषों और महिलाओं में हृदय रोग का स्वरूप हमेशा एक जैसा नहीं होता। पुरुषों में हार्ट अटैक अक्सर बड़ी कोरोनरी धमनियों में प्लाक के कारण होने वाली रुकावट से जुड़ा होता है। वहीं महिलाओं में कोरोनरी माइक्रोवैस्कुलर डिजीज यानी हृदय की छोटी रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्या और अन्य प्रकार की कोरोनरी समस्याएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
National Heart, Lung, and Blood Institute (NHLBI) के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। पुरुषों में, शारीरिक गतिविधि (एक्सरसाइज या मेहनत) करने पर एंजाइना (छाती के दर्द) का दर्द अक्सर बढ़ जाता है और आराम करने पर ठीक हो जाता है। वहीं, महिलाओं में वर्कआउट के बजाय दैनिक दिनचर्या के सामान्य कामकाज करने के दौरान एंजाइना होने की जोखिम अधिक होता है।
Journal of Clinical Medicine-MDPI में प्रकाशित एक शोध पत्र से भी स्पष्ट होता है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना हार्ट अटैक के लक्षण अलग हो सकते हैं। महिलाओं को अक्सर सीने में दर्द के बजाय असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे अचानक अत्यधिक थकान, सांस फूलना, पीठ या जबड़े में दर्द और मतली।
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महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण
महिलाओं में हार्ट अटैक के दौरान कई तरह के लक्षण नजर आते हैं, जैसे-
- सीने में दबाव
- जकड़न या भारीपन
- पीठ, कंधे, गर्दन, जबड़े या बांह में दर्द
- सांस फूलना
- अचानक कमजोरी और असामान्य थकान
- ठंडा पसीना आना
- चक्कर या मतली की शिकायत होना
कुछ मामलों में महिलाओं को पेट के ऊपरी हिस्से में असहजता या अपच जैसा महसूस हो सकता है। ध्यान रखें कि यह कभी-कभी हृदय से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। ये लक्षण सीने में दर्द के साथ भी हो सकते हैं और बिना किसी स्पष्ट सीने के दर्द के भी दिखाई दे सकते हैं।
महिलाओं के लिए इमरजेंसी कब है?
सीने में किसी भी तरह की तकलीफ या परेशानी महसूस हो, तो डॉक्टर के पास जाकर इसके सटीक कारणों को स्पष्ट करना चाहिए। इसके अलावा, अगर महिलाएं अचानक या सामान्य से बहुत अधिक थकान महसूस कर रही हैं, रोजमर्रा के काम करने में कमजोरी हो रही है या थोड़ी-सी गतिविधि पर ही सांस फूलने लगे, तो इसे केवल अपनी जीवनशैली से जोड़कर देखना सही नहीं है। वैसे तो ऐसे लक्षण कई अन्य स्थितियों में भी हो सकते हैं, लेकिन यदि वे अचानक शुरू हुए हैं, तो इस पर गौर करें और डॉक्टर से अपना ट्रीटमेंट करवाएं।
महिलाएं मेनोपॉज के बाद अधिक सतर्क रहें
हार्मोनल बदलाव भी महिलाओं के स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करता है। डाॅ. उज्जवल कुमार बताते हैं, "उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में हृदय रोग का जोखिम बदलता है और मेनोपॉज के बाद यह जोखिम और ज्यादा बढ़ सकता है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि युवा या प्री-मेनोपॉजल महिलाओं को हार्ट अटैक नहीं हो सकता। कम उम्र की महिलाओं में भी हृदय संबंधी मेडिकल इमरजेंसी देखी जा सकती है इसलिए बहुत जरूरी है कि हर महिला इसके लक्षणों पर नजर रखें।"
महिलाओं में हार्ट अटैक के जोखिम कारक
कई ऐसे कारक हैं, जो महिलाओं में हार्ट अटैक की वजह बन सकते हैं, जैसे-
- हाई ब्लड प्रेशर
- हाई कोलेस्ट्रॉल
- डायबिटीज
- धूम्रपान
- मोटापा
- तनाव
डाॅ. उज्जवल कुमार बताते हैं कि कई ऐसे जोखिम कारक होते हैं, जो महिलाओं में हार्ट अटैक के जोखिम पर पुरुषों की तुलना में अलग प्रभाव डाल सकते हैं। गर्भावस्था से संबंधित कुछ स्थितियां, जैसे प्रीक्लेम्पसिया और गर्भावस्था के दौरान होने वाली अन्य जटिलताएं भी भविष्य में हार्ट अटैक के रिस्क को बढ़ा सकती है।
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डॉक्टर की सलाह
हर महिला में हार्ट अटैक के लक्षणों का एक कोई फिक्स पैटर्न नहीं होता है। किसी महिला को तेज सीने में दर्द हो सकता है, जबकि किसी दूसरी महिला में मुख्य शिकायत सांस फूलना, चक्कर या असामान्य थकान हो सकती है। यही नहीं, महिलाओं और पुरुषों दोनों में लक्षण व्यक्ति-दर-व्यक्ति बदल सकते हैं।
यदि किसी महिला को अचानक सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, बेहोशी या तेज चक्कर, मतली के साथ कमजोरी, अथवा जबड़े, पीठ, कंधे या बांह में असामान्य दर्द हो, तो इसे आपात स्थिति मानना चाहिए। इस तरह की स्थिति में खुद से कोई दवा न लें। तुरंत मेडिकल हेल्प लें। सामय पर मिला उपचार हृदय को होने वाले नुकसान को सीमित करने में मदद कर सकता है।
निष्कर्ष
हार्ट से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज करना सही नहीं है। अगर किसी महिला को अचानक मतली, पीठ में दर्द, अत्यधिक कमजोरी और सांस फूलने की शिकायत हो, तो वह इसे सिर्फ फूड पॉइजनिंग, गैस, तनाव या सामान्य थकान से जोड़कर न देखें। ये सभी लक्षण हार्ट अटैक का कारण हो सकते हैं। इसलिए, बेहतर है कि आप एक बार एक्सपर्ट की मिलें और डॉक्टर की सलाह को मानें।
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FAQ
गर्भावस्था के दौरान होने वाला प्री-एक्लेम्पसिया बाद में हार्ट अटैक के खतरे को कैसे बढ़ा देता है?
प्री-एक्लेम्पसिया गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर और किडनी पर दबाव का कारण बनता है। यह स्थिति डिलीवरी के सालों बाद भी ब्लड वेसेल्स को स्थायी रूप से कमजोर कर देती है और क्रॉनिक सूजन पैदा करती है। ऐसे में भविष्य में हार्ट डिजीज का जोखिम बना रहता है।मेनोपॉज के दौरान दिए जाने वाली हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) का हृदय पर क्या असर पड़ता है?
वैसे तो एस्ट्रोजन प्राकृतिक रूप से दिल की सुरक्षा करता है, लेकिन मेनोपॉज के बाद हार्ट हेल्थ के लिए HRT की सलाह नहीं दी जाती है। देर से HRT शुरू करने पर यह रक्त के थक्के (Blood Clots) बनने और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकती है। इसलिए किसी महिला को मेनोपॉज के बाद HRT लेना है या नहीं, इस संबंध में डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें।
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Sep 29, 2026 10:05 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Ujjawal Kumar
