हर साल लोगों को जागरुक करने के लिए वर्ल्ड हार्ट डे (World Heart Day) 29 सितंबर को मनाया जाता है। अगर आपके परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक या दिल की बीमारी हो चुकी है, तो आपके लिए भी यह जानना जरूरी है कि दिल की जांच कब से शुरू करनी चाहिए? गुरुग्राम के पारस हेल्थ के कार्डियोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. विकास गोयल के अनुसार, फैमिली हिस्ट्री को व्यक्ति के ओवरऑल हार्ट रिस्क का एक अहम हिस्सा माना जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि परिवार में हार्ट डिजीज होने पर आपको भी यही बीमारी होगी। सही समय पर जोखिमों की पहचान, जरूरी टेस्ट और हेल्दी लाइफस्टाइल के जरिए हार्ट हेल्थ पर नजर रखी जा सकती है।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि लोग मानते हैं कि हार्ट चेकअप की जरूरत उम्र बढ़ने के बाद ही होती है, लेकिन परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास होने पर लोगों को चेकअप सही उम्र में करना शुरू कर देना चाहिए। कुछ मामलों में जेनेटिक कारणों की वजह से कोलेस्ट्रॉल या अन्य कार्डियोवैस्कुलर जोखिम कम उम्र में ही बढ़ने लगते हैं।
क्या फैमिली हिस्ट्री बढ़ाती है दिल की बीमारियों का खतरा?
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल के अनुसार, अगर परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को कम उम्र में हार्ट अटैक (Heart attack at a young age), कोरोनरी आर्टरी डिजीज या अचानक कार्डियक डेथ जैसी समस्या हुई है, तो इसे केवल पारिवारिक इतिहास मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ हार्ट संबंधी जोखिम आनुवंशिक हो सकते हैं और लंबे समय तक बिना लक्षण के भी बने रह सकते हैं। खासतौर पर कम उम्र में हुई हार्ट डिजीज परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए जोखिम का संकेत हो सकती है।
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ऐसे लोगों को 25 की उम्र के बाद नियमित हार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग जरूरी होती है। हालांकि, हर व्यक्ति को एक जैसे टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। उम्र, पारिवारिक इतिहास, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, वजन और अन्य जोखिमों को देखकर डॉक्टर हार्ट स्क्रीनिंग टेस्ट (Heart screening tests) और चेकअप तय करते हैं।
फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों को कौन-कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?
- कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल सलाह देते हैं कि सबसे पहले ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल और ब्लड शुगर/HbA1c जैसे सामान्य कारकों की जांच पर ध्यान देना चाहिए।
- लिपिड प्रोफाइल में टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स देखे जाते हैं। नियमित रूप से इन पर नजर रखने से जोखिम को समय रहते पहचानने में मदद मिल सकती है।
- इसके अलावा Lipoprotein(a) यानी Lp(a) टेस्ट खास तौर पर जरूरी हो सकता है। यह सामान्य लिपिड प्रोफाइल का हिस्सा नहीं होता और इसका लेवल काफी हद तक आनुवंशिक होता है।
- 2026 की AHA गाइडलाइन के अनुसार, हर वयस्क को जीवन में कम से कम एक बार Lp(a) की जांच कराने की सलाह दी गई है। कम उम्र में परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास होने पर यह टेस्ट और जरूरी हो सकता है।
- अगर परिवार में बहुत ज्यादा LDL कोलेस्ट्रॉल या कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास है, तो फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया जैसी आनुवंशिक स्थिति की जांच पर भी डॉक्टर करवा सकते हैं।
when to monitor heart health
अनुवांशिक (Genetic) खतरों के बावजूद दिल को हेल्दी कैसे रखें?
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल के अनुसार, फैमिली हिस्ट्री ऐसी चीज है जिसे बदला नहीं जा सकता, लेकिन बाकी जोखिमों को कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह बचना, फिजिकली एक्टिव रहना, वजन को हेल्दी लिमिट में रखना और बैलेंस डाइट लेना जरूरी है।
खाने में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, नट्स और पर्याप्त फाइबर शामिल करें और ज्यादा नमक, ट्रांस फैट, ज्यादा चीनी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को सीमित करें। पर्याप्त नींद और तनाव को मैनेज करना भी हार्ट हेल्थ के लिए जरूरी है। हाई Lp(a) होने पर भी लाइफस्टाइल इसे सीधे कम नहीं करती, लेकिन अन्य जोखिमों को कंट्रोल करके ओवरऑल कार्डियोवैस्कुलर रिस्क कम करने में मदद मिल सकती है।
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कम उम्र में दिखने वाले दिल की बीमारी के शुरुआती चेतावनी संकेत
- कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि कम उम्र होने का मतलब यह नहीं है कि सीने से जुड़ी परेशानी को नजरअंदाज किया जाए।
- सीने में दबाव या दर्द, चलते या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, असामान्य थकान, तेज धड़कन, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए।
- कुछ मामलों में हार्ट डिजीज लंबे समय तक बिना खास लक्षण के भी विकसित हो सकती है।
- इसलिए केवल लक्षण आने का इंतजार करने के बजाय जिन लोगों में पारिवारिक जोखिम है, उन्हें डॉक्टर के साथ नियमित कार्डियोवैस्कुलर रिस्क पर बात करनी चाहिए।
क्या ECG या हार्ट स्कैन हर साल जरूरी है?
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल के अनुसार, फैमिली हिस्ट्री होने का मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को हर साल ECG, इको या CT स्कैन करवाना चाहिए। ये जांच व्यक्ति के लक्षण और रिस्क प्रोफाइल के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं।
निष्कर्ष
अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज हुई है, तो घबराने के बजाय समय रहते अपना रिस्क समझना जरूरी है। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और जरूरत के अनुसार Lp(a) जैसे टेस्ट डॉक्टर की सलाह से कराए जा सकते हैं। आनुवंशिक जोखिम को बदला नहीं जा सकता, लेकिन धूम्रपान, वजन, खान-पान, फिजिकल एक्टिविटी, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसे कई कारकों को कंट्रोल करके हार्ट हेल्थ पर नजर रखी जा सकती है।
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FAQ
क्या परिवार में हार्ट डिजीज होने का मतलब बीमारी होना तय है?
नहीं। आनुवंशिक जोखिम बीमारी की संभावना बढ़ा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से हार्ट डिजीज होगी।क्या कोलेस्ट्रॉल सामान्य होने पर भी हार्ट अटैक हो सकता है?
हां। कोलेस्ट्रॉल के अलावा ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, आनुवंशिक कारक और अन्य स्थितियां भी हार्ट संबंधी जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।
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Sep 29, 2026 14:18 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Vikash Goyal
