Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Deebanshu Gupta , Cardiologist

क्या ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ना कोलेस्ट्रॉल बढ़ने जितना ही खतरनाक है? डॉक्टर से जानें

हाई ट्राइग्लिसराइड्स और एलडीएला कोलेस्ट्रॉल, दोनों ही हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकार है। दोनों ही हार्ट हेल्थ को प्रभावित करती हैं। हालांकि, इनमें से एक अधिक घातक है। जानें इसके बारे में।

ट्राइग्लिसराइड्स हमारे ब्लड में पाया जाना वाला एक तरह का फैट है। आमतौर पर हमारा शरीर भोजन से प्राप्त उस कैलोरी को ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है, जिसकी तुरंत जरूरत नहीं होती है। ये ट्राइग्लिसराइड्स आपकी फैट सेल्स में जमा हो जाते हैं। जब शरीर को बाद में ऊर्जा की जरूरत होती है, तो हार्मोन इन ट्राइग्लिसराइड्स को रिलीज करते हैं। इसका मतलब है कि शरीर अपनी जरूरत के अनुसार ट्राइग्लिसराइड्स को स्टोर करके रखता है। हालांकि, कई बार ओवर ईटिंग, अधिक कैलोरी इनटेक, कार्ब्स का अधिक सेवन के कारण हमारे ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ जाता है। यहां यह सवाल जरूर उठता है कि क्या ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने जितना ही खतरनाक है? आइए, जानते हैं Dr. Deebanshu Gupta, Cardiologist at Sarvodya Hospital, Jalandhar क्या बताते हैं। 

क्या ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ना कोलेस्ट्रॉल बढ़ने जितना ही खतरनाक है?

are high triglycerides as dangerous as cholesterol 1 (13)

ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ना कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने जितना ही खतरनाक है। हालांकि, ये बात और है कि ये दोनों ही स्थितियां शरीर को अलग-अलग तरह से प्रभावित करती हैं। जैसे-

हृदय रोग का जोखिमः कोलेस्ट्रॉल और हाई ट्राइग्लिसराइड्स, दोनों ही ब्लड वेसल्स की दीवारों को नुकसान पहुंचाते हैं और उन्हें सिकोड़ देते हैं। हालांकि, ट्राइग्लिसराइड्स अक्सर एक छिपे हुए खतरे की तरह काम करते हैं, जो कि एलडीएल के कणों को और छोटा और गाढ़ा बना देता है, जिससे वे धमनियों की दीवारों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं और प्लाक (Blockage) जमा करते हैं। इसे सरल शब्दों में समझें तो ट्राइग्लिसराइड्स और एलडलएल दोनों का स्तर बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बेहद बढ़ जाता है।

पैनक्रियाटाइटिस का जोखिमः ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के बीच जो सबसे बड़ा फर्क है, वह है ट्राइग्लिसराइड्स का जोखिम। एक तरफ हाई एलडीएल समय के साथ धमनियों में रुकावट पैदा करता है, वहीं ट्राइग्लिसराइड्स का बहुत अधिक स्तर एक्यूट पैनक्रियाटाइटिस का कारण बन सकता है। इसकी वजह से पैनक्रियाज में बहुत ज्यादा सूजन बढ़ जाती है, जिससे दर्द होने लगता है। एलडीएल होने पर इस तरह की समस्या नहीं देखने को मिलती है।

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हाई ट्राइग्लिसराइड्स के लक्षण

आमतौर पर हाई ट्राइग्लिसराइड्स के शुरुआती या हल्के बढ़ने पर किसी तरह का लक्षण नजर नहीं आता है। इसलिए इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। जब समस्या गंभीर रूप ले लेती है, टब जाकर इसके लक्षण नजर आते हैं-

  1. पेट के ऊपरी हिस्से में अचानक और तीव्र दर्द का एहसास होना, जो कि पीठ तक जा सकता है।
  2. हाई ट्राइग्लिसराइड्स होने पर जी मिचलाना, उल्टी आना और पेट में सूजन जैसी कई पेट संबंधी परेशानियां होना।
  3. हाई ट्राइग्लिसराइड्स में त्वचा में भी बदलाव नजर आते हैं, जैसे हाथों, पैरों, छाती या पीठ की त्वचा के नीचे पीले या लाल रंग के छोटे-छोटे वसायुक्त उभार या दाने बनना।
  4. हाई ट्राइग्लिसराइड्स होने पर तेजी से दिल धड़कना, अत्यधिक थकान, चक्कर आना और याददाश्त का कमजोर होना।

एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण

  1. एलडीएल कोलेस्ट्रॉल होने पर नसों में रुकावट आने के कारण ब्लड फ्लो बाधित होता है।
  2. सीने में दर्द, भारीपन जैसी समस्याएं भी एलडीएल कोलेस्ट्रॉल में देखने को मिलती हैं।
  3. थोड़े बहुत शारीरिक श्रम के बाद ही थकान और कमजोरी महसूस करना।
  4. ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने से हमेशा कमजोरी और ऊर्जा की कमी महसूस होती है।
  5. ब्लड सर्कुलेशन बाधित होने के कारण हाथ और पैरों में सुन्नपन का एहसास होना

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निष्कर्ष

एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और हाई ट्राइग्लिसराइड्स एक-दूसरे से कई मायनों में अलग होते हुए भी स्थ्य के लिए एक जैसे ही घातक हैं। हालांकि, हाई ट्राइग्लिसराइड्स को साइलेंट किलर कहना गलत नहीं होगा। यह दिल की बीमारियों के मामले में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल जितना ही खतरनाक है। इसलिए, लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराते समय सिर्फ कोलेस्ट्रॉल पर नहीं, बल्कि ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर की भी जांच की जानी चाहिए।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?

    अत्यधिक मीठा खाना, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, शराब का सेवन और शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवनशैली, हाई ट्राइग्लिसराइड्स के मुख्य कारणों में शामिल हैं।
  • ट्राइग्लिसराइड्स का सामान्य स्तर कितना होना चाहिए?

    रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स का सामान्य स्तर 150 mg/dL से कम होना चाहिए। 200 200 mg/dL से ऊपर होने पर इसे हाई माना जाता है।

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Disclaimer

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Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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