वजन का बढ़ना किसी भी लिहाज से सही नहीं है। इससे सेहत को भारी नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों की मानें, तो वजन बढ़ने से डायबिटीज, थायराइड और ब्लड प्रेशर जैसी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यहां तक कि अगर समय पर वजन को संतुलित करने पर जोर न दिया जाए, तो इसकी वजह से हार्ट हेल्थ को भी नुकसान हो सकता है। बहरहाल, आमतौर पर हमारे लिए मोटापा यानी समग्र शरीर का वजन बढ़ना होता है। आपने कई बार देखा होगा कि कुछ लोगों का वजन सामान्य रहता है, लेकिन पेट की चर्बी बढ़ जाती है। अक्सर लोग पेट की चर्बी को अधिक खतरनाक नहीं मानते हैं। इसलिए, यह जान लेना बहुत ज्यादा जरूरी है कि सामान्य वजन का बढ़ना और पेट की चर्बी में से दिल के लिए अधिक खतरनाक क्या है? आइए, जानते हैं दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के कार्डियोलॉजी एवं कार्डियक सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अंकेश अग्रवाल (Dr. Ankesh Aggarwal, Cardiology & Cardiac Surgery, Senior Consultant, Apollo Spectra Hospital, Delhi, Karol Bagh) से।
हृदय स्वास्थ्य के लिए मोटापा क्यों खराब है?
मोटापा या वजन अधिक होना हृदय स्वास्थ्य को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है, जैसे-
हृदय पर अतिरिक्त दबाव का बनना
European Society of Cardiology में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, अगर किसी इंसान का वजन 20 साल की उम्र के बाद (यानी जवानी या मिडिल एज में) जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगे, तो 60 साल की उम्र तक आते-आते उसका दिल कमजोर और बीमार हो जाता है। चाहे वह बुढ़ापे में अपना वजन कम करने की कितनी ही कोशिश क्यों न कर ले, हृदय को पहले ही नुकसान पहुंच चुका होता है। डॉक्टर समझाते हैं, ‘किसी भी उम्र में वजन का बढ़ना हृदय के लिए सही नहीं होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जैसे-जैसे शरीर का वजन या बॉडी मास बढ़ता है, दिल को पूरे शरीर में खून पहुंचाने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। निरंतर इतनी मेहनत करने से धीरे-धीरे दिल कमजोर हो जाता है और उसके फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।
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ब्लड वेसल्स को नुकसान
डॉ. अंकेश अग्रवाल बताते हैं कि वजन बढ़ने के कारण ब्लड वेसल्स को भी नुकसान होने लगता है। दरअसल, वजन बढ़ने के कारण आर्टरीज में प्लाक जमने लगता है, जो कि ब्लड फ्लो को बाधित करता है। ऐसे में हार्ट को ब्लड फ्लो में और भी ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, जिससे कई बार ब्लड वेसल्स को क्षति हो जाती है। ऐसा आमतौर पर ओबेसिटी से गुजर रहे लोगों के साथ अधिक होता है। ध्यान रखें कि इस तरह की स्थितियों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है।
क्रॉनिक इंफ्लेमेशन का जोखिम
साल 2025 में Frontiers in Endocrinology में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, मोटापा सिर्फ फैट का बढ़ना भर नहीं है, बल्कि यह एक अंदरूनी बीमारी है, जिसे गंभीर भी माना जाता है। जब शरीर में फैट बढ़ने लगता है, तो इसकी वजह से लो ग्रेड इंफ्लेमेशन बढ़ जाता है यानी शरीर में अंदरूनी सूजन आने लगती है, जिससे हार्मोन्स का असंतुलन बिगड़ जाता है। इस तरह की स्थिति के कारण भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारियों और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
रिस्क फैक्टर्स का बढ़ना
चूंकि, मोटापा किसी बीमारी से कम नहीं है। ऐसे में यह अपने आप कई अन्य बीमारियों के जोखिम को बढ़ा देता है। जैसे मोटापे के कारण हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है और शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। ये दोनों ही परिस्थितियां ऐसी हैं, जिनको वक्त रहने संभाला न जाए, तो भविष्य में दिल की सेहत को भारी नुकसान हो सकता है। साल 2013 में PubMed में प्रकाशित एक रिव्यू के अनुसार शरीर का वजन बढ़ना या मोटापा कार्डियोवास्कुलर हेल्थ के लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक है।
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हृदय स्वास्थ्य के लिए पेट की चर्बी के नुकसान
पूरे शरीर का वजन बढ़ना और पेट की चर्बी बढ़ना, दोनों ही हमारे लिए नुकसानदेह होते हैं, लेकिन पेट की चर्बी की बात करें तो यह काफी खतरनाक है-
दिल के लिए नुकसानदेह बदलाव
Radiological Society of North America (RSNA) के एक रिसर्च के मुताबिक, पेट की चर्बी का सीधा संबंध कंसेंट्रिक हाइपरट्रॉफी से है। आपको बता दें कि यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें दिल की मांसपेशियां मोटी हो जाती हैं और उसके अंदर का हिस्सा सिकुड़ जाता है। ऐसे में हार्ट सही तरह से ब्लड पंप नहीं कर पाता है, जिससे उसे अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। यह स्थिति आगे चलकर हार्ट फेलियर का बड़ा कारण बन सकती है।
सिस्टेमिक इंफ्लेमेशन में बढ़ोतरी
डॉ. अंकेश अग्रवाल बताते हैं कि पेट के अंदरूनी अंगों में जमा चर्बी, जिसे हम विसरल फैट भी कहते हैं, यह पूरे शरीर में सूजन को बढ़ाती है। पूरे शरीर में फैलने वाली सूजन को ही हम सिस्टेमिक इंफ्लेमेशन के नाम से जानते हैं। यह सूजन हार्ट फेलियर होने के खतरे को बहुत ज्यादा बढ़ा देती है। यहां तक कि जिन लोगों का वजन कम या औसत है और विसरल फैट बढ़ा हुआ है, उनमें भी यह रिस्क अधिक होता है।
धमनियों को नुकसान और ब्लॉकेज
पेट के अंदर जमा चर्बी धमनियों को न सिर्फ नुकसान पहुंचाती है, बल्कि ब्लॉक भी कर देती है। असल में पेट की चर्बी से निकलने वाले नुकसानदेह तत्व बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ाते हैं, अच्छे कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और खून की नलियों को सख्त बना देते हैं। इस वजह से धमनियों में ब्लॉकेज की समस्या होने लगती है।
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दिल के लिए क्या है ज्यादा खतरनाक?
डॉ. अंकेश अग्रवाल बताते हैं, "दिल के लिए पूरे शरीर का वजन बढ़ने से ज्यादा पेट की चर्बी का बढ़ना खतरनाक माना जाता है। ऐसा इसलिए पेट की चर्बी में विसरल फैट होता है, जो कि आपके पेट के अंदर मौजूद अंगों को चारों तरफ से घेर लेती है। यह चर्बी सिर्फ शरीर में जमा नहीं होती है, बल्कि आसपास कई तरह के रसायन रिलीज करती है। इसकी वजह से शरीर में सूजन बढ़ जाती है, जो कि हार्ट को अपने आप नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है।"
दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
डाॅ. सलाह देते हैं कि हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए कई उपाय अपनाए जा सकते हैं, जैसे-
- पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें। हृदय स्वास्थ्य के लिए मछली, साबुत अनाज, फल, नट्स आदि का सेवन करें। इसके अलावा, ट्रांस फैट, एडेड शुगर आदि का सेवन कम से कम करें।
- हृदय स्वास्थ्य के लिए एक्टिव रहना बहुत जरूरी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सप्ताह भर में 150 मिनट की मॉडरेट एक्सरसाइज हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद है।
- ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्लूकोज आदि को नियमित रूप से मॉनिटर करें। साथ ही, कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर भी नजर रखें। इससे भविष्य में समस्या के बिगड़ने से पहले ही उसे रोकने में मदद मिलती है।
- तनाव कम लें। एक्सपर्ट्स की मानें, तो हार्ट के लिए तनाव में रहना सही नहीं है। तनाव कम करने के लिए रोजाना 7-9 घंटे की नींद लें। इससे बॉडी की हीलिंग प्रक्रिया बेहतर रहती है, जो कि हार्ट के लिए भी उपयोगी है।
- शराब, स्मोकिंग या किसी भी तरह के नशीले पदार्थ से दूर रहें।
निष्कर्ष
वैसे तो पेट की चर्बी हो या वजन का बढ़ना, दोनों ही स्थितियां हृदय के लिए सही नहीं है। हां, अगर इनमें से किसी एक की बात करें, जो कि हृदय को घातक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है, तो वह है कि पेट की चर्बी। इसमें विसरल फैट होता है, जो कि अंदरूनी अंगों के आसपास होता है। इस तरह का फैट अंदरूनी अंगों की कार्यप्रणाली पर असर डालता है, जो कि सही नहीं है। इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो कि हृदय से संबंधित बीमारियों के जोखिम को बढ़ाता है।
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FAQ
क्या कम वजन या पतले दिखने वाले लोगों को भी दिल की बीमारी का खतरा हो सकता है?
हां, बिलकुल। ऐसे लोगों को थिन आउटसाइड, फैट इनसाइड कहते हैं और उन्हें भी दिल की बीमारी का खतरा होता है।क्या केवल रनिंग या वॉक करने से पेट की जिद्दी चर्बीको कम किया जा सकता है?
नहीं, सिर्फ वॉक या रनिंग से पेट की चर्बी कम नहीं होती है। इसके साथ-साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हाई-प्रोटीन डाइट लेना बहुत जरूरी है।
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Jul 14, 2026 08:50 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Ankesh Aggarwal