Fri Sep 11, 2026 | 09:01 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

कमर के आसपास फैट बढ़ना क्यों है चिंता की बात? जानें सेंट्रल ओबेसिटी के बारे में

पेट की चर्बी डायबिटीज, हार्ट डिजीज और फैटी लिवर का खतरा बढ़ा सकती है। जानें सेंट्रल ओबेस‍िटी के कारण, संंकेत और इसे कम करने के उपाय।

आजकल खराब लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठे रहना, स्‍ट्रेस और अनहेल्दी खानपान की वजह से मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई लोगों का वजन सामान्य दिखता है, लेकिन पेट और कमर के आसपास फैट जमा होने लगता है। इस स्थिति को सेंट्रल ओबेसिटी या एब्डॉमिनल ओबेसिटी कहा जाता है। सेंट्रल ओबेसिटी शरीर के कई गंभीर रोगों का खतरा बढ़ा सकती है। सेंट्रल ओबेस‍िटी और इसके खतरोंं को समझने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

क्या होती है सेंट्रल ओबेसिटी?

central-obesity

सेंट्रल ओबेसिटी वह स्थिति है जिसमें शरीर के बीच वाले हिस्से यानी पेट और कमर के आसपास ज्‍यादा फैट जमा हो जाता है। यह फैट त्वचा के नीचे ही नहीं, बल्कि अंदरूनी अंगों के आसपास भी जमा हो सकता है। इसे विसरल फैट कहा जाता है जो सेहत के ल‍िए सबसे ज्यादा हान‍िकारक माना जाता है। पुरुषों में 90 सेंटीमीटर से ज्यादा और महिलाओं में 80 सेंटीमीटर से ज्यादा कमर का आकार सेंट्रल ओबेसिटी का संकेत हो सकता है।

यह भी पढ़ें- उम्र बढ़ने के साथ क्यों बढ़ता है पेट पर फैट? वैज्ञानिकों ने खोजा कारण और बैली फैट कम करने का तरीका

क्यों खतरनाक है पेट के आसपास जमा फैट?

  • पेट के आसपास जमा फैट शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ा सकता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, ब्लॉकेज और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।
  • सेंट्रल ओबेसिटी इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देती है और टाइप 2 डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • ज्यादा विसरल फैट लिवर में फैट जमा होने का कारण बन सकता है। इससे फैटी लिवर का खतरा बढ़ता है।
  • कमर के आसपास फैट बढ़ने से शरीर महिलाओं में PMOS (पूर्व नाम PCOS) और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के लेवल में कमी जैसी हार्मोनल समस्याएं देखी जा सकती हैं।
  • पेट का ज्‍यादा फैट स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

यह भी पढ़ें- मोटापा बन सकता है हाई ब्लड प्रेशर का कारण,? डॉक्टर से समझें मोटापे और बीपी का कनेक्शन

सेंट्रल ओबेसिटी के कारण

  • ज्यादा तला-भुना खाना, शुगर वाले ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड के कारण पेट के आसपास फैट बढ़ सकता है।
  • लंबे समय तक बैठे रहना और एक्सरसाइज न करना शरीर में कैलोरी जमा होने का कारण बनता है।
  • स्‍ट्रेस के दौरान कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो पेट के आस-पास फैट जमा करने से जुड़ा माना जाता है। वहीं कम नींद भी वजन बढ़ने का कारण बन सकती है।
  • उम्र बढ़ने के साथ शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है। इससे फैट तेजी से जमा हो सकता है, खासकर पेट के आसपास।
  • कुछ लोगों में जेनेटिक कारणों की वजह से पेट पर जल्दी फैट जमा होने की प्रवृत्ति हो सकती है।

यह भी पढ़ें- मोटापा पांच गुना तक बढ़ा सकता है कैंसर का खतरा, रिसर्च में हुआ खुलासा

सेंट्रल ओबेसिटी के संकेत

  • कमर का आकार बढ़ना
  • पेट बाहर निकलना
  • जल्दी थकान महसूस होना
  • सीढ़ियां चढ़ने में सांस फूलना
  • वजन कम करने में मुश्‍क‍िल होना

यह भी पढ़ें- अब रोज 10,000 नहीं, सिर्फ 8,500 कदम चलकर भी वजन रहेगा कंट्रोल- नई स्टडी में मिले प्रमाण

पेट के आसपास जमा फैट को कैसे कम करें?

  • डाइट में प्रोटीन, फाइबर, फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें।
  • शुगर और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें।
  • कम से कम 30 से 45 मिनट तक वॉक, जॉगिंग, योग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
  • हर दिन सात से आठ घंटे की अच्छी नींद वजन कंट्रोल करने में मदद कर सकती है।
  • मेडिटेशन, योग और रिलैक्सेशन तकनीकों की मदद से स्‍ट्रेस को कंंट्रोल किया जा सकता है।
  • कोल्ड ड्रिंक्स और ज्यादा शुगर वाले जूस की जगह पानी, नारियल पानी या बिना चीनी वाली ड्र‍िंक्‍स प‍िएं।

निष्कर्ष:

कमर के आसपास फैट बढ़ना केवल वजन बढ़ने की समस्या नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। सेंट्रल ओबेसिटी को नजरअंदाज करना भविष्य में हार्ट डिजीज, डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

Read Next

क्‍या ब्रश करने से कम हो सकती है मीठे की क्रेविंग? एक्‍सपर्ट से जानें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    May 17, 2026 12:55 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 17, 2026 12:55 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content