आजकल दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और इसकी सबसे बड़ी वजहों में से एक है गलत खानपान। ऐसे में लोग अपनी डाइट में बदलाव करके हार्ट को हेल्दी रखने की कोशिश करते हैं लेकिन जब बात आती है लो फैट (Low Fat) डाइट और लो कार्ब (Low Carb) डाइट की, तो अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर दोनों में से कौन-सी डाइट दिल के लिए ज्यादा फायदेमंद है। कुछ लोग मानते हैं कि फैट कम खाने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहता है और हार्ट डिजीज का खतरा घटता है, जबकि कई लोगों का कहना है कि कार्बोहाइड्रेट कम करने से वजन, ब्लड शुगर और ट्राइग्लिसराइड्स बेहतर तरीके से कंट्रोल होते हैं, जिससे हार्ट को भी फायदा मिल सकता है। इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने, गुरुग्राम के पारस हेल्थ के कार्डियोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. विकास गोयल से बात की।
हार्ट हेल्थ के लिए लो फैट या लो कार्ब डाइट?
डॉ. विकास गोयल के अनुसार, किसी भी डाइट को अपनाने से पहले यह समझना जरूरी है कि उसका शरीर और हार्ट पर क्या प्रभाव पड़ता है। डॉक्टर विकास गोयल का कहना है कि किसी एक डाइट को सभी लोगों के लिए बेस्ट नहीं कहा जा सकता। यदि लो फैट डाइट में पौष्टिक और फाइबर युक्त भोजन शामिल किया जाए, तो यह हार्ट के लिए फायदेमंद हो सकती है। वहीं, यदि लो कार्ब डाइट में हेल्दी फैट जैसे जैतून का तेल, एवोकाडो, नट्स और मछली शामिल हों, तो यह भी दिल की सेहत के लिए अच्छी साबित हो सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट, ज्यादा चीनी और जंक फूड से दूरी बनाई जाए। नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव कंट्रोल भी हार्ट को हेल्दी रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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लो फैट डाइट क्या होती है?
लो फैट डाइट में खाने में मौजूद फैट यानी फैट की मात्रा को सीमित किया जाता है। इसमें घी, मक्खन, तले हुए फूड्स, फुल फैट डेयरी और प्रोसेस्ड फूड कम खाए जाते हैं। इसकी जगह फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल किया जाता है। डॉक्टर विकास गोयल बताते हैं कि लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि सैचुरेटेड फैट कम करने से खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) घटता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। हालांकि, यदि लो फैट डाइट में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और मीठे फूड्स ज्यादा शामिल कर लिए जाएं, तो इसका फायदा कम हो सकता है।
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लो कार्ब डाइट कैसे करती है काम?
लो कार्ब डाइट में कार्बोहाइड्रेट जैसे चावल, सफेद ब्रेड, मिठाई, मैदा और शक्कर का सेवन कम किया जाता है। इसकी जगह प्रोटीन और हेल्दी फैट वाले फूड्स जैसे अंडे, मछली, नट्स, बीज और हरी सब्जियां खाई जाती हैं। डॉक्टर विकास गोयल के अनुसार, यह डाइट वजन घटाने, ब्लड शुगर कंट्रोस करने और ट्राइग्लिसराइड्स कम करने में मदद कर सकती है।

साल 1998 में European Journal of Clinical Nutrition में प्रकाशित स्टडी से पता चलता है कि जब हम अपनी डाइट में अनहेल्दी सैचुरेटेड फैट को हटाकर साबुत अनाज, सब्जियों, दालों और फलों से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट और फाइबर को शामिल करते हैं, तो इससे हमारे शरीर का टोटल और बैड (LDL) कोलेस्ट्रॉल कम होता है। इस तरह की फाइबर से भरपूर डाइट लेने पर शरीर का वजन भी थोड़ा कम होता है। यही वजह है कि इस डाइट से ट्राइग्लिसराइड बढ़ने और गुड (HDL) कोलेस्ट्रॉल घटने का खतरा नहीं रहता। सीधे शब्दों में कहें, तो सही कार्बोहाइड्रेट चुनना दिल की सेहत और वजन दोनों के लिए फायदेमंद है।
निष्कर्ष
लो फैट और लो कार्ब दोनों डाइट के अपने-अपने फायदे हैं। डॉक्टर विकास गोयल के अनुसार, डाइट चुनते समय केवल फैट या कार्ब कम करने पर नहीं, बल्कि भोजन की क्वालिटी पर ध्यान देना चाहिए। बैलेंस डाइट, ताजे फल-सब्जियां, साबुत अनाज, पर्याप्त प्रोटीन और हेल्दी फैट का सही संयोजन दिल को लंबे समय तक हेल्दी रखने में मदद करता है। यदि आपको पहले से हार्ट डिजीज, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्या है, तो किसी भी नई डाइट को शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।
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FAQ
क्या डायबिटीज के मरीज लो कार्ब डाइट ले सकते हैं?
कई मामलों में लो कार्ब डाइट फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इसे शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना जरूरी है।क्या हार्ट ब्लॉकेज को डाइट से ठीक किया जा सकता है?
हार्ट ब्लॉकेज को सिर्फ डाइट से ठीक नहीं किया जा सकता है, ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह को फॉलो करें।दिल क्या खाने से मजबूत होता है?
रोजाना हेल्दी और बैलेंस डाइट लेने से दिल हेल्दी रहता है लेकिन इसके साथ ही एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल भी जरूरी है।
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Jun 29, 2026 17:59 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Jun 29, 2026 17:59 IST
Modified By : Akanksha TiwariJun 29, 2026 17:59 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Vikash Goyal