आमतौर पर जिसकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें बार-बार इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता है। इसलिए यह सलाह भी दी जाती है कि जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, वे अपने खान-पान का पूरा ध्यान रखें और जीवनशैली की अच्छी आदतों को अपनाएं। बहरहाल, क्या कभी आपने सोचा है कि जिन लोगों को बार-बार इंफेक्शन होता है, उनकी दिल की सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है? माना जाता है कि बार-बार इंफेक्शन होने के कारण भविष्य में दिल की बीमारी होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आइए, Dr. Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar से जानते हैं इसकी सच्चाई क्या है?
इंफेक्शन और दिल की बीमारी के बीच कनेक्शन
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इंफेक्शन और दिल की बीमारी का गहरा कनेक्शन है। हालांकि, इस संदर्भ में ज्यादातर लोग सोचते नहीं हैं, लेकिन डॉक्टर यह चेतावनी देते हैं कि जिन लोगों को बार-बार इंफेक्शन होता है, उन्हें अपनी सेहत के प्रति लापरवाही नहीं करनी चाहिए। साल 2025 में Journal of the American Heart Association में प्रकाशित रिसर्च स्टडी के अनुसार, कुछ खास किस्म के वायरल इंफेक्शन दिल की गंभीर बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देते हैं। इनमें इंफ्लुएंजा, HIV, COVID-19 जैसे संक्रमण शामिल हैं। शोधकर्ता निष्कर्ष में यह स्पष्ट करते हैं कि अगर समय पर लोग इन वायरस से बचने के लिए वैक्सीन लगवा लें, तो वे न केवल इंफेक्शन से बचे रहते हैं, बल्कि भविष्य में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का जोखिम भी कम हो जाता है।
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किस तरह के इंफेक्शन दिल की बीमारी का रिस्क बढ़ाते हैं?
एक्यूट वायरल इंफेक्शन
अगर किसी को बार-बार एक्यूट वायरल इंफेक्शन जैसे इंफ्लुएंजा और कोविड-19 होता है, तो उनमें इंफेक्शन होने के शुरुआती कुछ हफ्तों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा 3 से 5 गुना तक बढ़ जाता है। यह तथ्य चौंकाने वाला आवश्यक है, लेकिन चिंता का विषय यह भी है कि अगर इंफेक्शन बहुत गंभीर हो, तो इससे मायोकार्डिटिस (दिल की मांसपेशियों में सूजन) भी हो सकती है।
क्रोनिक वायरल इंफेक्शन
इसमें वे संक्रमण आते हैं, जो आजीवन या लंबे समय तक बने रहते हैं, जैसे एचआईवी और हेपेटाइटिस सी। इस तरह के संक्रमण से ग्रस्त लोगों की इम्यूनिटी पहले से ही बहुत कमजोर होती है। साल 2012 में International Journal Of Clinical Practice में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर के अनुसार एचआईवी के मरीजों में भविष्य में दिल की बीमारी होने का खतरा स्वस्थ लोगों की तुलना में अधिक है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि क्रोनिक वायरल इंफेक्शन की वजह से भविष्य में दिल की बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है।
बैक्टीरिया से होने वाले इंफेक्शन
बैक्टीरियल इंफेक्शन भी लोगों में दिल की बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। जैसे मसूड़ों की बीमारी और दांतों और मसूड़ों की सही सफाई न रखने से मुंह के बैक्टीरिया खून में पहुंच जाते हैं। इससे नसों में सूजन आ जाती है और नसें ब्लॉक होने लगती हैं या दिल में इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। यह भी भविष्य में दिल से संबंधित बीमारी के खतरे को बढ़ाती है। इसी तरह, निमोनिया और बार-बार होने वाला यूटीआई इतना गंभीर हो जाए कि अस्पताल में भर्ती होना पड़े, तो आने वाले सालों में हार्ट फेलियर होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।
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दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाने वाले इंफेक्शन से बचाव के टिप्स
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इम्यूनिटी मजबूत करें
जिन लोगों को बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, उन्हें अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने पर काम करना चाहिए। इसके लिए अच्छी डाइट लें, जिसमें मौसमी फल और सब्जियों को शामिल करें। इसके अलावा, नियमित रूप से वर्कआउट करना भी सेहत के लिए आवश्यक होता है।
हाइजीन का ध्यान रखें
अगर किसी को बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, तो उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है? कहीं प्रॉपर साफ-सफाई न करना इसका कारण तो नहीं है? अगर है, तो उस पर विशेष जोर दें, जैसे अपने हाथों को नियमित रूप से धोएं, कुछ भी खाने से पहले हाथों को धोना न भूलें और बीमार लोगों के संपर्क में आने से बचें।
ओरल हेल्थ पर गौर करें
मसूड़ों से अक्सर खून आने के कारण नसों में सूजन आ जाती है, जिससे ब्लड फ्लो बाधित हो सकता है। यह सुनिश्चित करें कि ओरल हेल्थ सही है, दांतों में कैविटी नहीं है और मसूड़े भी हेल्दी हैं या मसूड़े भी स्वस्थ हैं। इसके लिए, नियमित रूप से डेंटिस्ट के पास जाएं और क्लीन अप भी करवाएं।
तनाव मैनेज करें
यह बात आप जानते ही होंगे कि तमाम समस्याओं की वजह तनाव है। अगर किसी को बार-बार इंफेक्श्न हो रहा है, तो उन्हें गौर करना चाहिए कि कहीं ऐसा स्ट्रेस की वजह से तो नहीं है? विशेषज्ञ बताते हैं कि तनाव की वजह से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। ऐसा न हो, इसके लिए जरूरी है कि तनाव को मैनेज किया जाए।
रेगुलर चेकअप करवाएं
अगर कोई मेडिकल कंडीशन जैसे डायबिटीज या ब्लड प्रेशर है, तो अपना नियमित रूप से चेकअप करवाएं और डॉक्टर द्वारा दी गई दवा समय पर लें। ध्यान रखें कि ये दोनों ही बीमारियां हार्ट डिजीज के जोखिम को काफी ज्यादा बढ़ा देती हैं।
निष्कर्ष
अगर किसी को बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, तो उन्हें इस स्थिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। हालांकि, कमजोर इम्यूनिटी इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर बार-बार इंफेक्शन हो, तो बेहतर है कि समय-समय पर अपनी जांच करवाएं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाने पर जोर दें।
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FAQ
क्या दिल के मरीजों को हर साल फ्लू या इंफ्लुएंजा की वैक्सीन लगवानी चाहिए?
आमतौर पर कार्डियोलॉजिस्ट दिल के मरीजों को हर साल इन्फ्लुएंजा की वैक्सीन लगाने की सलाह देते हैं। हालांकि इस संदर्भ में सीधे डॉक्टर से बात करना बेहतर होता है।क्या सामान्य सर्दी-जुकाम या खांसी से भी हार्ट अटैक आ सकता है?
नहीं, साधारण सर्दी-जुकाम से हार्ट अटैक नहीं आता। हां, अगर किसी को बहुत गंभीर फ्लू (जैसे इन्फ्लुएंजा) या कोविड-19 हो जाए और शरीर में सूजन बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो दिल की बीमारी का जोखिम रहता है।
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Jul 13, 2026 12:02 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta