बहुत से लोग रात को सोते समय खर्राटे लेते हैं। यह एक आम समस्या बन चुकी है। कई बार आसपास सोने वाले लोगों को खर्राटों की आवाज ज्यादा पेशानी करती है, जबकि खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को खुद इसका पता नहीं चलता है, लेकिन अगर खर्राटे लगातार और बहुत ज्यादा होते हैं, तो इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार इसके कारण खर्राटे लेने वाले व्यक्ति की नींद भी प्रभावित हो सकती है। आइए इस बारे में Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानें।
खर्राटे लेने वाले लोगों को दिन में नींद क्यों आती है?
डॉ. पूजा के अनुसार, खर्राटे लेना कभी-कभी नुकसानदायक नहीं होता है, लेकिन जोर से या बार-बार खर्राटे लेना इस बात का संकेत हो सकता है कि सोते समय ऊपरी एयरवे (सांस की नली) आंशिक रूप से बंद हो रही है।
कुछ लोगों में इसका कारण 'ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया' होता है, जिसमें सांस बार-बार कम हो जाती है या कुछ समय के लिए रुक जाती है। इन रुकावटों के कारण व्यक्ति की नींद बार-बार टूट सकती है और उसे लगातार, अच्छी नींद नहीं मिल पाती है, भले ही उसे रात में जागने का एहसास न हो।
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क्या कहती है स्टडी?
साल 2023 में Journal of Clinical Sleep Medicine में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, खर्राटे लेने वाले लोगों को दिन में सुस्ती और थकान महसूस होती है क्योंकि स्टडी के अनुसार, खर्राटों का सीधा कनेक्शन दिन की थकान और ज्यादा नींद महसूस होने से है। सोते समय खर्राटों के कारण ऊपरी सांस की नली पलती हो जाती है, जिससे शरीर को सांस लेने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और नींद की क्वालिटी खराब होती है। इसके अलावा, खर्राटे REM (rapid eye movement sleep) स्लीप के समय को कम कर देते हैं।

खर्राटों के कारण होती है कई परेशानियां
डॉ. पूजा का कहना है कि खर्राटे लेने के कारण व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां होती हैं, जिसके कारण उनके दिनभर के कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।
- व्यक्ति सुबह उठने पर थकान महसूस कर सकता है।
- उसे दिन में बहुत ज्यादा नींद आना।
- ध्यान (काम पर फोकस न कर पाने) न लगना।
- सतर्कता में कमी।
- सुबह सिरदर्द या चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
खर्राटे आने के क्या कारण हो सकते हैं?
डॉ. पूजा आगे कहती हैं, व्यक्ति को खर्राटों के आने की समस्या कई कारणों से हो सकती है। जैसे-
- टीवी देखने।
- काम करते या ट्रैवल करते समय अनजाने में सो भी सकते हैं।
- ज्यादा वजन।
- अल्कोहल का सेवन करने।
- स्मोकिंग करना।
- नाक बंद होना।
- सोने के कुछ खास तरीके।
- नाक, गले व जबड़े की बनावट।
ये सभी फैक्टर्स ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की संभावना को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, खर्राटे लेने वाले हर व्यक्ति को यह समस्या हो ही, ऐसा जरूरी नहीं है।
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किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
डॉ. पूजा का कहना है, लगातार जोर से खर्राटे लेने को नॉर्मल आदत नहीं मानना चाहिए, खासकर तब जब पार्टनर सोते समय सांस रुकने, दम घुटने या हांफने जैसी चीजें नोटिस करे।
बिना इलाज वाला स्लीप एपनिया दिन के कामकाज पर असर डाल सकता है और इससे दिल और मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी सेहत को भी खतरा हो सकता है। डॉक्टर लक्षणों और खतरे वाले फैक्टर्स की जांच कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर 'स्लीप स्टडी' की सलाह दे सकते हैं।
खर्राटों का इलाज कैसे होता है?
डॉ. पूजा आगे कहती हैं, इन समस्याओं से राहत के लिए डॉक्टर कुछ इलाज की सलाह देते हैं।
- इलाज में वजन कम करना (जहां जरूरी हो)।
- सोने से पहले अल्कोहल न पीना।
- नाक की समस्याओं का इलाज।
सोने के तरीके में बदलाव या बीमारी की गंभीरता के आधार पर 'कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर' (CPAP) जैसी खास थेरेपी शामिल हो सकती हैं।
निष्कर्ष
खर्राटे आना की समस्या सांस ऊपरी सांस की नली के आंशिक रूप से बंद होने के कारण होती है। हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होते हैं, लेकिन लगातार और तेज खर्राटों के साथ दिन में अत्यधिक नींद को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, खासकर जब रात में सांस रुकने या हांफने जैसे संकेत दिखाई दें।
नींद से जुड़ी ऐसी समस्याओं की समय पर पहचान व्यक्ति की दिन की एक्टिविटी और आम स्वास्थ्य के लिए जरूरी हो सकती है।
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FAQ
खर्राटे क्यों आते हैं?
मांसपेशियों के ढीली होने, वजन ज्यादा होने, नाक से जुड़ी समस्या, शारीरिक बनावट, अल्कोहल का सेवन करने और पीठ के बल सोने के कारण लोगों को खर्राटे आने की समस्या हो सकती है।नींद की कमी से क्या परेशानियां होती हैं?
नींद की कमी के कारण व्यक्ति को चिड़चिड़ापन होने, मूड में बदलाव होने, स्ट्रेस, याददाश्त के कमजोर होने, मोटापे, दिल की बीमारियों, ब्लड शुगर और इम्यूनिटी के कमजोर होने जैसी समस्याएं होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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Sep 16, 2026 22:27 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr. Pooja Pillai