Wed Sep 16, 2026 | 07:06 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajat Grover , Paediatrician & Neonatologist - Cloudnine Hospital, East Delhi

बच्चे के खर्राटे को सिर्फ आदत न समझें, इन 5 समस्याओं का हो सकता है संकेत

अगर आपका बच्चा भी सोते समय खर्राटे लेता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। सोते समय खर्राटे लेना कई बीमारियों का कारण हो सकता है। इसलिए अगर लगातार बच्चे को खर्राटे की समस्या है, तो इसे डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

बच्चे का लगातार रोजाना सोते समय खर्राटे लेना गंभीर समस्या हो सकता है। अगर बच्चे के रोजाना तेज खर्राटे सुनाई देते हैं, तो ये परेशानियों का कारण हो सकता है। कई बार सर्दी-जुकाम, नाक बंद होना या कुछ दिनों की थकान की वजह से भी बच्चा खर्राटे ले सकता है, लेकिन अगर कई हफ्तों से खर्राटे ले रहा है, खर्राटों की तेज आवाज है या सांस लेने का तरीका असामान्य है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस बारे में दिल्ली के Cloudnine Group of Hospitals के Pediatrician and Neonatologist विभाग के सीनियर कंसल्टेंट Dr. Rajat Grover कहते हैं कि कई बार बार-बार खर्राटे लेना इस बात का संकेत हो सकता है कि नींद के दौरान बच्चे की सांस की नली ठीक तरह से खुली नहीं रह रही है।

बच्चों के खर्राटे लेने का कारण हो सकती हैं ये 5 समस्याएं

Cleveland Clinic के अनुसार, खर्राटे आने का कारण सांस के रास्ते में ब्लॉकेज होना हो सकता है। जब हवा इस संकरे रास्ते से गुजरती है, तो यह मुंह, नाक और गले के सोफ्ट टिश्यू को आपस में वाइब्रेट करता है। बच्चों में खर्राटे आने का कारण सूजे हुए टॉन्सिल्स, एलर्जी, बच्चों को मोटापा और स्लीप एपनिया हो सकती है।

Dr. Rajat Grover का कहना है कि अगर बच्चों को रेगुलर खर्राटे आते हैं, तो डॉक्टर टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, क्योंकि खर्राटों का कारण अन्य वजहों से हो सकता है।

1. ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया

Dr. Rajat Grover कहते हैं, “बच्चों में लगातार खर्राटों का महत्वपूर्ण कारण ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea - OSA) हो सकता है। इसमें सोते समय ऊपरी सांस की नली कुछ समय के लिए आंशिक या पूरी तरह बंद हो जाती है। ऐसे में कई बार बच्चा कुछ सेंकेड के लिए सांस रोक सकता है और फिर अचानक से हांफते हुए या जोर से सांस लेकर सामान्य ब्रीदिंग शुरू कर सकता है। इस वजह से कई बच्चों की बार-बार नींद टूट सकती है।”

2. बढ़े हुए टॉन्सिल्स

Dr. Rajat Grover ने कहा, “बच्चों में खर्राटों की सबसे आम वजहों में बड़े टॉन्सिल्स होना हो सकता है। एडनॉयड्स नाक के पीछे मौजूद टिश्यू होते हैं, जो अगर आकार में बढ़ जाए, तो सांस लेना मुश्किल हो सकता है। ऐसी कंडीशन में बच्चे अक्सर मुंह खोलकर सोते हैं। रात में खर्राटे लेने के साथ वे बेचैन हो सकते हैं और कई बार सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है।

3. एलर्जी या हमेशा बंद रहने वाली नाक

Dr. Rajat Grover के अनुसार, अगर बच्चे की नाक अक्सर बंद रहती है, तो उसे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। एलर्जिक रिनिटस जैसी समस्या में नाक के अंदर सूजन और ब्लॉकेज की वजह से एयरफ्लो प्रभावित हो सकता है। ऐसे में बच्चा सोते समय मुंह से सांस लेने लगता है और खर्राटे ज्यादा सुनाई दे सकते हैं।

अगर बच्चे को बार-बार छींक आती है, नाक में खुजली रहती है, पानी बहता है या लंबे समय तक नाक बंद रहती है, तो सिर्फ खर्राटों का इलाज करने के बजाय एलर्जी की वजह का पता लगाना जरूरी है।

snoring in kids

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4. बच्चे का मोटापा से ग्रस्त होना

Dr. Rajat Grover ने बताया कि जो बच्चे मोटापे से ग्रस्त है, उन्हें सांस लेने और ओब्स्ट्रेक्टिव स्लीप एपनिया का रिस्क बढ़ सकता है। शरीर में अतिरिक्त टिश्यू सांस लेने वाली नली को प्रभावित कर सकते हैं। इस वजह से सोते समय सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर ज्यादा वजन वाले बच्चे को स्लीप एपनिया की समस्या हो सकती है, लेकिन अगर बच्चे का वजन सामान्य से ज्यादा है और खर्राटों की समस्या है, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

5. चेहरे या सांस की नली की बनावट में बदलाव

Dr. Rajat Grover का कहना है, “कुछ बच्चों में सांस लेने की नली की बनावट अलग हो सकती है। इससे भी सोते समय सांस लेने में परेशानी हो सकती है। चेहरे या जबड़े की बनावट या जन्मजात स्थितियां सांस लेने की नली को संकरा कर सकती हैं। कुछ बच्चों को न्यूरोमस्कुलर कंडीशन भी हो सकती है। इसलिए हर बच्चे के खर्राटे का कारण एक जैसा नहीं होता। यही वजह है कि लगातार खर्राटे होने पर डॉक्टर से पूरा चेकअप कराना चाहिए।”

बच्चों में खर्राटे आने के लक्षण

Sleep Foundation के मुताबिक, अगर बच्चा खर्राटे लेता है, तो पेरेंट्स को इन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये लक्षण स्लीप डिसऑर्डर के हो सकते हैं।

  • हफ्ते में तीन रातें या उससे ज्यादा रातों में खर्राटे लेना
  • सोते समय सांस का रुकना, हांफना या सांस लेने में तकलीफ होना
  • बिस्तर गीला करना
  • स्किन का रंग नीला पड़ना
  • सुबह उठने पर सिरदर्द होना
  • दिन के समय बहुत ज्यादा सुस्ती या नींद आना
  • पढ़ाई में मन न लगना
  • फोकस करने में परेशानी होना
  • उम्र के हिसाब से वजन न बढ़ना
  • मोटापा

डॉक्टर की सलाह

Dr. Rajat Grover सलाह देते हैं कि अगर बच्चे को बहुत ज्यादा खर्राटे आते हैं, तो डॉक्टर बच्चे की पहले पूरी मेडिकल हिस्ट्री, लक्षण और फिजिकल चेकअप करता है। अगर स्लीप एपनिया लगता है, तो कुछ बच्चों को पॉलीसोम्नोग्राफी कराने की सलाह दे सकते हैं। इसमें नींद के दौरान सांस लेने, ऑक्सीजन लेवल और दूसरी नींद से जुड़ी एक्टिविटीज को मॉनिटर किया जाता है। जिन बच्चों को टॉन्सिल्स होते हैं, उनका इलाज अलग तरीके से होता है।

निष्कर्ष
अगर बच्चा लगातार खर्राटे ले रहा है, रात में सांस लेने में परेशानी दिखाई देती है या दिन के समय उसके व्यवहार में बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। बच्चों को अच्छी नींद लेने से उनकी ग्रोथ, बिहेवियर और पूरा विकास होता है। इसलिए बच्चों के खर्राटों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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FAQ

  •  क्या खर्राटों के कारण रात भर मुंह खोलकर सोने से बच्चे के चेहरे की बनावट बदल सकती है?

    लगातार मुंह से सांस लेने से बच्चे के चेहरे की हड्डियों के विकास पर असर पड़ता है। इससे ऊपर का जबड़ा संकरा होना, दांत बाहर की तरफ निकलना और चेहरा लंबा दिखना शुरू हो जाता है, जिसे एडिनोइड फेसिस कहते हैं।
  • क्या सोते समय बच्चे की पोजिशन बदलने से खर्राटे कम हो सकते हैं?

    पीठ के बल सोने से जीभ पीछे की तरफ रहती है, जिससे सांस की नली संकरी हो जाती है। बच्चे को करवट सुलाने से हवा का प्रवाह बेहतर होता है और खर्राटे अस्थायी रूप से कम हो सकते हैं।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 16, 2026 18:04 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Rajat Grover

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