Mon Sep 14, 2026 | 03:14 PM IST

Medically Reviewed by Dr Akshay Chugh

परीक्षा के दौरान बच्चा तनाव में है-कैसे पहचानें? लक्षण जानें और मानें एक्सपर्ट के दिए सुझाव

बच्चों में तनाव को पहचानना अक्सर मुश्किल होता है लेकिन लंबे समय तक इसका बने रहना उनकी सेहत और सोच को प्रभावित कर सकता है इसलिए डॉक्टर से समझते हैं कि इससे कैसे बचें?

आजकल बच्चों में बचपन से ही एक प्रेशर का माहौल है। अभी से उन्हें हर छोटी-बड़ी बातों का स्ट्रेस हो जाता है। हालांकि, चिंता इस बात की है कि बच्चों में स्ट्रेस का रहना उनकी ग्रोथ और मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकता है। इस वजह से कई बार उनके व्यवहार में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और हर छोटी बात पर असहमति दिखाने जैसी चीजें नजर आती हैं। हालांकि, इन लक्षणों से आप बच्चों में स्ट्रेस की पहचान कर सकते हैं जिसके बारे में विस्तार से हमने Dr. Parimala V Thirumalesh, Lead Sr. Consultant - Neonatology & Paediatrics, Aster CMI Hospital, Bangaluru से बात की। साथ ही बच्चों में तनाव का शारीरिक लक्षण क्या हो सकता है, इसके बारे में हमने Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida

परीक्षा के दौरान बच्चों में तनाव कैसे पहचानें?

Dr. Parimala V Thirumalesh बताती हैं कि जब बच्चों को मार्क्स, उम्मीदों, कॉम्पिटिशन या माता-पिता और टीचर कनिराश करने के डर की वजह से चिंता होती है, तो उन्हें परीक्षा का तनाव हो सकता है। ऐसे में बच्चे इस तनाव के बारे में माता-पिता से अक्सर बात करने से बचते हैं लेकिन मां बाप बच्चों में स्ट्रेस के लक्षणों को देखकर पहचान कर सकते हैं जैसे-

  • बच्चों को बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा होना।
  • बार-बार रोना और दुखी रहना
  • ध्यान लगाने में मुश्किल

छोटे बच्चों में तनाव के शारीरिक संकेत

Dr. Akshay Chugh बताते हैं कि कई बार माता-पिता बच्चों की कुछ ऐसी समस्याओं को लेकर हमारे सामने आते हैं जिनमें वे बीमार हैं, लक्षण हैं लेकिन अकारण। दरअसल, ये लक्षण तनाव की वजह से हो सकते हैं। जैसे-

1. पेट दर्द

दरअसल, आपने सुना होगा कि कई बार बच्चे बताते हैं कि उन्हें पेट दर्द हो रहा है और स्कूल नहीं जाना। ये बिना किसी मेडिकल कारण के बार-बार पेट दर्द होना या जी मिचलाना असल में स्ट्रेस की वजह से भी हो सकता है। साथ ही कई बार बच्चों को एंग्जायटी हो रही है होती है जिसे वे पेट दर्द समझकर शिकायत करते हैं।

2. नींद में परेशानी

डॉ. अक्षय बताते हैं कि सोने में दिक्कत, रात में बार-बार जागना या बार-बार बुरे सपने देखना असल में बच्चों में मेंटल स्ट्रेस के लक्षण है। ये बताता है कि आपका बच्चा किसी चीज से परशान है और इसकी वजह से उनका मानसिक तनाव काफी हद तक प्रभावित हो रहा है।

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3. भूख में बदलाव

अगर आपके बच्चे ने खाना खाना कम कर दिया है या बार-बार कहता है कि मन नहीं है तो ये तनाव का शारीरिक लक्षण हो सकता है। दरअसल, स्ट्रेस की वजह से बच्चों का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और अक्सर स्लो हो जाता है जिससे उन्हें भूख कम लगती है।

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4. बिस्तर गीला करना

टॉयलेट की आदतों में बदलाव भी स्ट्रेस के लक्षणों में से एक हो सकते हैं। कुछ बच्चे स्ट्रेस में रहने की वजह से बिस्तर गीला करते हैं। कुछ बच्चों में दिन में टॉयलेट निकल जाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में आपको डॉक्टर की मदद लेने के साथ बच्चे से बात करने की जरूरत है।

5. बच्चों में इन आदतों को चेक करें

अगर आपका बच्चा बार-बार अंगूठा चूसता है, बाल घुमाता रहता है, नाखून चबाता है या दांत पीसता है तो आपका बच्चा स्ट्रेस में हो सकता है। ऐसे में आपको अपने बच्चे में एंग्जायटी कम करने की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा डॉ. अक्षय ये भी बताते हैं कि बार-बार बीमार पड़ना भी स्ट्रेस का लक्षण हो सकता है। इससे इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है जिससे बार-बार सर्दी-जुकाम या छोटे-मोटे इंफेक्शन हो सकते हैं।

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व्यवहार में नजर आ सकते हैं ये बदलाव

डॉक्टर बताती हैं कि कई बार बच्चों में स्ट्रेस होने पर वे दोस्तों से दूर रहना पसंद करते हैं। इसके अलावा बच्चे एक्टिविटीज में कम दिलचस्पी लेते हैं। इसके अलावा कुछ बच्चों में अकेलापन नजर आ सकता है जिसकी वजह से ऐसे बच्चे खुद को अलग रखने की कोशिश करते हैं।

Unicef के अनुसार 1 से 3 साल के बच्चे में अगर ये लक्षण दिखे तो ये स्ट्रेस हो सकता है जैसे अपनी देखभाल करने वालों से सामान्य से ज्यादा चिपके रहना। सोने और खाने-पीने की आदतों में बदलाव और
चीजों से ज्यादा डरना।

बच्चों में तनाव कैसे कम करें?

Dr. Parimala V Thirumalesh बताती हैं कि माता-पिता शांत और सहयोगी माहौल बनाकर बच्चों की मदद कर सकते हैं। वे बिना तुरंत कोई राय बनाए या बच्चे की तुलना दूसरों से किए उनकी बात सुन सकते हैं।
-बच्चों से पूछे उन्हें हुआ क्या है? कौम सी चीज उन्हें परेशान कर रही है और इसके लिए वे क्या कर सकते हैं।
-माता पिता बच्चों को पढ़ाई का एक ऐसा शेड्यूल अपनाने में मदद कर सकते हैं जो असल में पूरा किया जा सके और जिसमें बीच-बीच में ब्रेक भी हों।
-बच्चों को अच्छी नींद लेने के लिए प्रेरित करें और अगर उन्हें नींद नहीं आ रही है तो उनकी बात सुनें और दिक्कत दूर करें।
- पौष्टिक खाना खाने और थोड़ी-बहुत फिजिकल एक्टिविटीज करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं और उन्हें यह याद दिला सकते हैं कि उनके मार्क्स उनकी असल कीमत तय नहीं करते।

पढ़ाई के बड़े कामों को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटने, शौक पूरे करने और आराम करने के लिए समय देने और खराब परफॉर्मेंस के लिए बहुत ज्यादा दबाव न डालने या सजा न देने से भी बच्चे ज्यादा कॉन्फिडेंट और चीज़ों पर अपना कंट्रोल महसूस कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

Dr. Parimala V Thirumalesh बताती हैं कि अगर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ जाए या परीक्षा के बाद भी बना रहे, तो माता-पिता को बच्चों के डॉक्टर, स्कूल काउंसलर या मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करने के बारे में सोचना चाहिए। खासकर तब, जब बच्चा स्कूल जाने से मना कर रहा हो, उसे बार-बार शारीरिक तकलीफें हो रही हों, उसकी नींद या खाने-पीने की आदतों में बड़ा बदलाव आया हो, वह लोगों से कटने लगा हो, उसके काम-काज में काफी गिरावट आई हो या वह निराशा जाहिर कर रहा हो। मकसद परीक्षा के तनाव की हर वजह को खत्म करना नहीं, बल्कि बच्चों को तनाव को सही तरीके से संभालने के उपाय सिखाना होना चाहिए, साथ ही उन्हें यह भरोसा दिलाना चाहिए कि नतीजे चाहे जो भी हों, उन्हें हमेशा साथ मिलेगा।

FAQ

  • तनाव का पहला शारीरिक लक्षण क्या हो सकता है?

    तनाव का पहला शारीरिक लक्षण पेट में अजीब सी गुड़गुड़ है। इसके अलावा मांसपेशियों में खिंचाव या दिल की धड़कन तेज होना भी इसके लक्षण हो सकते हैं।
  • ज्यादा तनाव से कौन सी बीमारी होती है?

    ज्यादा तनाव से एंग्जायटी, डिप्रेशन और हाई बीपी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा ज्यादा स्ट्रेस से दिल की बीमारियां भी हो सकती हैं।

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Disclaimer

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Pallavi Kumari

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चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 14, 2026 14:55 IST

    Published By : Pallavi Kumari
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