सुबह उठने के कुछ घंटे बाद ही आंखें भारी होने लगती हैं? काम करते-करते बार-बार जम्हाई आती है और दोपहर में ऐसा लगता है कि बस थोड़ी देर आंखें बंद कर लें? अगर रात में 7-8 घंटे सोने के बाद भी दिनभर नींद और सुस्ती बनी रहती है, तो इसे सिर्फ आलस या ज्यादा काम करने का असर मानना सही नहीं है। कुछ लोगों में इसके पीछे थायराइड हार्मोन में होने वाला बदलाव भी एक कारण हो सकता है। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, जब थायराइड हार्मोन कम बनने लगते हैं, तो शरीर की एक्टिविटीज धीमी महसूस हो सकती हैं। इसका असर केवल वजन या ठंड ज्यादा लगने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यक्ति को लगातार थकान, सुस्ती और दिन में नींद आने की शिकायत भी हो सकती है।
थायराइड में दिनभर नींद क्यों आती रहती है?
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, थायराइड की समस्या में खासकर हाइपोथायराइडिज्म के दौरान थायराइड हार्मोन का लेवल कम हो सकता है। ये हार्मोन शरीर में एनर्जी के इस्तेमाल और मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाते हैं। हार्मोन कम होने पर शरीर की एक्टिविटीज धीमी महसूस हो सकती हैं, जिससे व्यक्ति को पर्याप्त नींद लेने के बाद भी थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है।
- ऐसे में व्यक्ति को सुबह उठने में परेशानी, दिन में बार-बार झपकी आने या सामान्य काम करने के बाद भी एनर्जी कम महसूस होने जैसी दिक्कत हो सकती है।
- थायराइड हार्मोन शरीर की सेल्स को एनर्जी इस्तेमाल करने में मदद करते हैं। जब इनका लेवल कम होता है, तो शरीर की एनर्जी से जुड़ी प्रक्रियाओं की स्पीड प्रभावित हो सकती है। इसका असर व्यक्ति के एनर्जी लेवल पर दिखाई दे सकता है।
- इसी कारण हाइपोथायराइडिज्म में केवल नींद ही नहीं, बल्कि कमजोरी, सुस्ती, काम करने में मन न लगना और फिजिकल एक्टिविटीज के दौरान जल्दी थकान जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में लक्षणों की तेजी एक जैसी नहीं होती।
क्या थायराइड की वजह से नींद की क्वालिटी खराब हो सकती है?
- एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष का कहना है कि थायराइड में समस्या होने पर केवल ज्यादा नींद आना ही जरूरी नहीं है। कुछ लोगों में नींद की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है।
- शरीर में हार्मोनल बदलाव और थकान के कारण दिन-रात के सामान्य नींद-जागने के पैटर्न में बदलाव महसूस हो सकता है।
- इसके अलावा, अगर व्यक्ति को रात में अच्छी और पर्याप्त नींद नहीं मिल रही है, तो दिन में नींद और थकान ज्यादा महसूस होना स्वाभाविक है।
- इसलिए दिनभर नींद आने का कारण समझने के लिए रात की नींद की क्वालिटी को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

साल 2024 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार-
- हाइपोथायराइडिज्म और अनिद्रा (कम नींद आना) के बीच गहरा संबंध है। कम थायराइड लेवल के कारण शरीर में दर्द, बेचैनी और चिंता होती है, जिससे सोने में कठिनाई और दिन में ज्यादा नींद आने की समस्या बढ़ जाती है।
- इसके अलावा, एक स्टडी से यह भी पता चला है कि दिन में नींद आना और खर्राटे लेना थायराइड हार्मोन के असंतुलन से सीधे जुड़े हुए हैं।
- थायराइड की कमी और नींद की समस्याएं एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं, इसलिए बेहतर स्वास्थ्य के लिए थायराइड के साथ-साथ नींद की क्वालिटी का समय पर इलाज और ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
थायराइड की दवा लेने के बाद भी नींद ज्यादा आए तो क्या करें?
डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, अगर डॉक्टर ने थायराइड की दवा शुरू की है और इसके बावजूद लंबे समय तक ज्यादा नींद या थकान बनी हुई है, तो दवा की खुराक खुद से बदलना या बंद करना सही नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार TSH और अन्य थायराइड हार्मोन की जांच देखकर इलाज को बदल सकते हैं। अगर रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद दिनभर ज्यादा नींद आती है, तो डॉक्टर इसके दूसरे संभावित कारणों की भी जांच कर सकते हैं।
निष्कर्ष
थायराइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म और एनर्जी से जुड़ी प्रोसेस में अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर हाइपोथायराइडिज्म में हार्मोन का लेवल कम होने पर कुछ लोगों को पर्याप्त नींद के बावजूद दिनभर सुस्ती, थकान और नींद महसूस हो सकती है लेकिन लगातार नींद आने का कारण हमेशा थायराइड नहीं होता। इसलिए लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच कराना और थायराइड की दवा केवल डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना जरूरी है।
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FAQ
क्या थायराइड में दोपहर में नींद ज्यादा आती है?
कुछ लोगों में दिन के किसी खास समय पर सुस्ती ज्यादा महसूस हो सकती है, लेकिन यह सभी मरीजों में एक जैसा नहीं होता।क्या थायराइड की समस्या से रात में बेचैनी होती है?
थायराइड के प्रकार और हार्मोन के लेवल के अनुसार नींद से जुड़े लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। लगातार समस्या होने पर डॉक्टर से कारण की जांच करानी चाहिए।
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Sep 16, 2026 13:55 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Jayaditya Ghosh