टॉयलेट जाते समय अचानक तेज दर्द हो या टॉयलेट पेपर पर लाल खून नजर आए, तो सबसे पहले दिमाग में बवासीर का ख्याल आता है लेकिन हर बार गुदा से खून आने या दर्द होने का मतलब बवासीर नहीं होता। कई बार इसकी वजह फिशर यानी गुदा की स्किन में आई छोटी सी दरार भी हो सकती है। आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और डायरेक्टर, डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, दर्द की प्रकृति, खून आने का तरीका, गुदा के आसपास होने वाले बदलाव और समस्या कितने समय से है, इन बातों से दोनों स्थितियों के बीच अंतर समझने में मदद मिल सकती है।
बवासीर और फिशर में क्या अंतर है?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर शरद मल्होत्रा के अनुसार, बवासीर में गुदा या मलाशय की नसों में सूजन या उनमें खिंचाव आ जाता है। कब्ज, टॉयलेट में ज्यादा जोर लगाना, लंबे समय तक बैठे रहना और मल त्याग की अनियमित आदतें इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं। वहीं फिशर गुदा की स्किन या अंदरूनी परत में होने वाली एक छोटी सी दरार या कट होता है। यह अक्सर कठोर मल निकलने, कब्ज या बार-बार जोर लगाने के कारण हो सकता है। फिशर में होने वाला दर्द कई बार बवासीर की तुलना में ज्यादा तेज महसूस होता है।
| लक्षण | बवासीर (Piles / Hemorrhoids) | फिशर (Anal Fissure) |
| समस्या क्या है? | इसमें गुदा या मलाशय (Rectum) की नसों में सूजन आ जाती है और वे फूल जाती हैं। यह अंदरूनी या बाहरी दोनों हो सकती है। | इसमें गुदा की अंदरूनी स्किन या परत में एक छोटी सी दरार (कट) या चीरा पड़ जाता है। |
| मुख्य कारण | पुरानी कब्ज, टॉयलेट में बहुत ज्यादा जोर लगाना, लंबे समय तक बैठे रहना और वजन उठाना। | बहुत कठोर मल का निकलना, कब्ज रहना या मल त्यागते समय ज्यादा दबाव पड़ना। |
| दर्द का प्रकार | शुरुआती अंदरूनी बवासीर में अक्सर दर्द नहीं होता। बाहरी बवासीर में सूजन या गांठ की वजह से भारीपन और दर्द हो सकता है। | इसमें मल त्यागते समय बहुत तेज, चुभने या शीशे जैसा कटने का दर्द होता है, जो टॉयलेट के बाद भी कुछ देर तक बना रहता है। |
| खून आने का तरीका | इसमें ताजा लाल खून मल के साथ या टॉयलेट पैन में टपकता हुआ नजर आ सकता है। यह बिना दर्द के भी आ सकता है। | इसमें खून बहुत कम मात्रा में आता है, जो अक्सर टॉयलेट पेपर या मल की बाहरी सतह पर दिखाई देता है। |
| गांठ और सूजन | इसमें गुदा के पास या बाहर की तरफ साफ़ तौर पर सूजन, भारीपन या मांस की गांठ महसूस हो सकती है। | इसमें मुख्य समस्या तेज दर्द और जलन है। हालांकि, पुराना फिशर होने पर कट के पास स्किन का छोटा सा उभार बन सकता है। |
| खुजली और बेचैनी | बाहरी बवासीर में अक्सर तेज खुजली, जलन और गीलापन महसूस होता है। | इसमें मुख्य रूप से जलन और चुभन होती है, खुजली बवासीर जितनी आम नहीं होती। |
साल 2025 में NIH की Bookshelf में प्रकाशित जानकारी के अनुसार-
- गुदा में दर्द और खून आने की समस्या केवल बवासीर या फिशर ही नहीं, बल्कि कई अन्य कारणों से भी हो सकती है।
- डॉक्टर शारीरिक जांच के जरिए यह पहचानते हैं कि असली समस्या क्या है।
- इस प्रकार के लक्षणों के पीछे पेरियनल एब्सेस (फोड़ा), फिस्टुला (भगंदर), सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STI), आंतों की सूजन (IBD) या रेक्टल अल्सर जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।
- चूंकि कई समस्याओं के लक्षण एक जैसे होते हैं, इसलिए सही बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना बेहद जरूरी है ताकि सटीक इलाज मिल सके।
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किन लक्षणों में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर शरद मल्होत्रा सलाह देते हैं कि अगर टॉयलेट के दौरान बार-बार खून आ रहा है, दर्द लगातार बना हुआ है, समस्या कुछ दिनों में ठीक नहीं हो रही है या लक्षण बार-बार लौट रहे हैं, तो गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या जनरल फिजीशियन डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, चक्कर या कमजोरी महसूस होना, काला मल, तेज पेट दर्द, बुखार या अचानक बढ़ती सूजन जैसे लक्षण हों तो जल्द डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। हर बार मल में खून आने का कारण बवासीर या फिशर ही हो, यह जरूरी नहीं है।
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निष्कर्ष
बवासीर और फिशर के लक्षणों में कुछ समानताएं जरूर हैं, लेकिन दोनों अलग समस्याएं हैं। फिशर में टॉयलेट के समय तेज दर्द और जलन प्रमुख हो सकती है, जबकि बवासीर में बिना दर्द के भी ताजा लाल खून, गांठ या खुजली हो सकती है। हालांकि, लक्षणों के आधार पर केवल अनुमान लगाना सही नहीं है। बार-बार दर्द या खून आने पर डॉक्टर से जांच कराकर सही कारण पता करना बेहतर है।
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FAQ
क्या फिशर अपने आप ठीक हो सकता है?
कुछ शुरुआती मामलों में उचित देखभाल और कब्ज कंट्रोल होने पर फिशर ठीक हो सकता है लेकिन लंबे समय से दर्द या खून बना रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।क्या बवासीर हमेशा बाहर से दिखाई देती है?
बवासीर अंदर भी हो सकती है और हर स्थिति में बाहर से गांठ दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।क्या ज्यादा बैठने से बवासीर होता है?
ज्यादा बैठने से बवासीर हो ऐसा नहीं होता है लेकिन अगर व्यक्ति को कब्ज की समस्या रहती है तो बवासीर की दिक्कत हो सकती है।
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Sep 16, 2026 12:42 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sharad Malhotra