Triphala For Piles: त्रिफला को हमेशा खराब पाचन क्रिया से परेशान लोगों ने देसी उपचार के रूप में पसंद किया है। त्रिफला में आंवला, बहेड़ा और हरड़ होता है। ये तीनों ही सदियों से आंतों की गति को तेज करने और शरीर के मेटाबॉलिज्म को ठीक करने के लिए जाने जाते रहे हैं। जिन लोगों को लंबे समय से कब्ज या बवासीर की समस्या रहती है उनके लिए मल को मुलायम करने में मददगार है। त्रिफला के ऐसे ही तमाम गुण बवासीर के लक्षणों को भी कम करने में मददगार है जिसके बारे में हमें आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा (Ayurvedic Dr. Chanchal Sharma, Director and Gynecologist, Asha Ayurveda) ने। साथ ही जानेंगे इन सब्जियों के सेवन का तरीका। सबसे पहले जान लेते हैं बवासीर में त्रिफला कैसे लें?
बवासीर में त्रिफला कैसे लें?
डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि त्रिफला में आप इसे सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं। इसके अलावा आप इसे दूसरे तरीके से भी ले सकते हैं जैसे-
1. त्रिफला की चाय लें
त्रिफला की चाय बवासीर की समस्या में बेहद फायदेमंद है। आपको करना ये है कि त्रिफला पाउडर लें और इसे 1 कप पानी में पकाएं। जब ये अच्छी तरह के पककर गाढ़ा हो जाए तो पानी को छान लें। इसमें मिठास के लिए 1 चम्मच शहद मिला लें और इसे आराम से पिएं।
बवासीर में त्रिफला की चाय पीने के फायदे:
डॉ. चंचल कहती हैं कि इस प्रकार से त्रिफला की चाय पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और आंतों की गति में तेजी आती है। इसके अलावा ये मल को मुलायम करता है जिससे बवासीर की समस्या में कमी आती है।
2. त्रिफला में नींबू और शहद मिलाकर लें
त्रिफला पाउडर को आप नींबू और शहद मिलाकर ले सकते हैं। आपको करना ये है कि 1 चम्मच त्रिफला लें और इसमें थोड़ा सा शहद और नींबू का रस मिला लें। शहद मल को मुलायम करने में मददगार है तो नींबू का विटामिन सी और एस्कॉर्बिक एसिड आंतों की सफाई में मददगार है। इससे बवासीर में कठोर मल की समस्या से छुटकारा मिलता है।
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बवासीर में कैसे फायदेमंद है त्रिफला?
डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं कि त्रिफला के 3 तत्व बवासीर के तमाम लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। सबसे पहले तो ये बवासीर में कब्ज की समस्या के लिए बेहद मददगार है। ये आंतों को अकड़न को कम करने के साथ इन्हें अंदर से मुलायम बनाता है जिससे बवासीर में होने वाली कब्ज की समस्या में कमी आती है।
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साल 2019 में European Journal of Integrative Medicine में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, त्रिफला में मौजूद हरीतकी बवासीर की समस्या में फायदेमंद होता है। इसमें दर्द निवारक गुण होते हैं, जो बवासीर के कारण होने वाले दर्द और जलन को कम करने में मदद करते हैं।
मल त्याग में मददगार है
त्रिफला की खास बात यह है कि ये आयुर्वेदिक मिक्सचर शरीर में गर्माहट पैदा करती है जिससे मलाशय तक का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है जिससे मल त्याग में होने वाला दर्द कम हो जाता है जिससे ब्लीडिंग में भी कमी आती है। इसके अलावा ये मलाशय के रास्ते को फ्लेक्सिबल करता है जिससे मलत्याग में दर्द कम होता है। इसमें लैक्सेटिव प्रभाव होता है, जो पेट साफ करने और कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।
खून की कमी को कम करने में मददगार
त्रिफला में आंवला होता है जो कि आयरन से भरपूर है। यह आयरन बवासीर के मरीजों में होने वाली खून की कमी को रोकती है। इसके अलावा ये आंवला इम्यून सेल्स को बढ़ावा देने में मददगार है जिससे ऐसे मरीजों की इम्यूनिटी बढ़ती है और कमजोरी कम होती है।
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निष्कर्ष:
त्रिफला का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन किसी भी चीज को ज्यादा खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए, त्रिफला की मात्रा अपनी समस्या के अनुसार डॉक्टर की बताई गई तय मात्रा के अनुसार ही लेना चाहिए। इसके अलावा, जिन लोगों को त्रिफला में मौजूद चीजों से एलर्जी है, उन्हें इसे लेने से बचना चाहिए। एलर्जी होने पर त्रिफला का सेवन दस्त, मतली, उल्टी, स्किन से जुड़ी समस्या आदि परेशानियों को बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही, लंबे समय तक त्रिफला का सेवन करने से भी बचें। खासकर अगर आप प्रेग्नेंट हैं, बच्चे को ब्रेस्टफीड करवाती हैं या किसी तरह की दवा ले रहे हैं।
FAQ
त्रिफला चूर्ण किन-किन बीमारियों में काम आता है?
त्रिफला चूर्ण एसिडिटी और कब्ज की समस्या में मददगार है। इसके अलावा ये बदहजमी से भी बचाव में मददगार है इसलिए आप इस स्थिति में गर्म पानी के साथ इसका सेवन कर सकते हैं।सुबह खाली पेट त्रिफला लेने से क्या होता है?
सुबह खाली पेट त्रिफला खाने से वेट लॉस में मदद मिलती है। इसके अलावा ये पाचन को तेज करने के साथ शरीर को डिटॉक्स करने में भी मददगार है।
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Sep 09, 2026 15:24 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Dr Chanchal Sharma