पर्याप्त और अच्छी नींद हमारे बेहतर स्वास्थ्य का आधार मानी जाती है। एक हेल्दी व्यक्ति के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की अच्छी नींद लेना जरूरी माना जाता है। वर्तमान समय में बदलती लाइफस्टाइल, ज्यादा स्क्रीन टाइम, काम का बढ़ता प्रेशर और मानसिक तनाव के कारण कम नींद की समस्या तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक नींद पूरी न होने या खराब नींद लेने के कारण कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जैसे मोटापा, डायबिटीज, दिल की बीमारी और कुछ तरह के कैंसर के जोखिम बढ़ सकते हैं। इसलिए, आइए इस लेख में हम Dr. Mandeep Singh Malhotra, Oncologist, Art of Healing Cancer, Delhi से जानते हैं कि खराब नींद कैंसर के जोखिम को कैसे बढ़ा सकती है, खासकर महिलाओं में?
कम नींद और कैंसर में कनेक्शन
Dr. Mandeep Singh Malhotra के अनुसार, नींद के दौरान शरीर सेल्स को रिपेयर करता है, हार्मोन संतुलन बनाए रखता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करता है। जब व्यक्ति लगातार कम सोता है या उसकी नींद बार-बार खराब होती है तो शरीर की नेचुरल सर्कैडियन रिद्म प्रभावित होती है। इससे शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का लेवल कम हो सकता है। मेलाटोनिन सिर्फ नींद को कंट्रोल नहीं करता है, बल्कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट के साथ सेल्स की सुरक्षा करने की भी क्षमता होती है। इसके लेवल में कमी से सेल्स की असामान्य वृद्धि का जोखिम बढ़ सकता है, जो कैंसर के विकास को बढ़ा सकता है। साल 2018 में BMC Cancer में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, एशियाई लोगों में कम समय तक सोने से कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है और ज्यादा समय तक सोने से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
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महिलाओं में ज्यादा जोखिम क्यों?
Dr. Mandeep Singh Malhotra का कहना है कि महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, पीरियड, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के कारण पहले से ही हार्मोन संतुलन प्रभावित होते हैं। अगर इसके साथ लगातार नींद की कमी भी जुड़ जाए तो हार्मोन असंतुलन और ज्यादा बढ़ सकता है। इसके अलावा, युवतियों में देर रात तक जागना, अनियमित काम का समय, शिफ्ट ड्यूटी और डिजिटल डिवाइस का ज्यादा इस्तेमाल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। साल 2018 में BMC Cancer में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, एशियाई महिलाओं में कम नींद लेना कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा पाया गया है। इसके पीछे एक संभावित कारण यह हो सकता है कि एशियाई महिलाओं में मेलाटोनिन का स्तर अमेरिकी महिलाओं की तुलना में कम होता है।
साल 2026 में American Society Of Clinical Oncology में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, अनिद्रा का सीधा कनेक्शन शुरुआती कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़ते जोखिम से पाया गया है। नींद से जुड़ी समस्याएं नॉर्मल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर की तुलना में कोलोरेक्टल कैंसर के लिए ज्यादा जिम्मेदार हो सकती हैं।
कैंसर से बचाव के उपाय
Dr. Mandeep Singh Malhotra बताते हैं कि कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए अच्छी नींद की आदतें अपनाना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप रोजाना 7 से 9 घंटे की नियमित और अच्छी नींद लेने की कोशिश करें। साथ ही सोने और जागने का समय तय रखें, सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित करें। इसके साथ ही कैफीन और ज्यादा तनाव लेने से भी बचें। इसके अलावा आप अपने रूटीन में नियमित रूप से एक्सरसाइज, संतुलित आहार और हेल्दी वजन बनाए रख सकते हैं, जो संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर रखने और कैंसर की रोकथाम में मददगार हो सकते हैं।
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निष्कर्ष
Dr. Mandeep Singh Malhotra का कहना है कि खराब और कम नींद का कनेक्शन कई स्वास्थ्य समस्याओं के साथ कुछ तरह के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है। खासकर महिलाओं में हार्मोनल और बायोलॉजिकल कारणों से यह असर ज्यादा जरूरी हो सकता है। हालांकि, सिर्फ कम नींद ही सीधे कैंसर का कारण नहीं बनती है, बल्कि कई जैविक और लाइफस्टाइल से जुड़ी कारकों के साथ मिलकर यह जोखिम बढ़ सकता है।
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FAQ
ज्यादा नींद आना किस बीमारी का लक्षण है?
ज्यादा नींद आना हाइपरसोमनिया नाम की स्थिति या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। यह मुख्य रूप से स्लीप एपनिया, नार्कोलेप्सी यानी अचानक दिन में नींद आना, थायरायड, एनीमिया, डिप्रेशन या विटामिन B12 और डी की कमी के कारण हो सकता है।नींद की कमी का क्या कारण है?
कम नींद आने या अनिद्रा के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे तनाव, एंग्जायटी, डिप्रेशन, सोने से पहले स्क्रीन का ज्यादा उपयोग और कैफी का सेवन शामिल हैं।
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Jul 10, 2026 08:46 IST
Modified By : Katyayani Tiwari Jul 10, 2026 08:46 IST
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Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Mandeep Singh Malhotra