Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Dr Deebanshu Gupta , Cardiologist

क्या फिट लोगों को भी हार्ट अटैक आ सकता है? डॉक्टर से जानें इसके कारण

जिम में लगातार एक्सरसाइज करना, यूरिक एसिड बढ़ना और जेनेटिक कारणों के चलते फिट लोगों को हार्ट अटैक का रिस्क हो सकता है। इसलिए हार्ट अटैक के लक्षणों की पहचान करके समय पर जांच कराना बहुत महत्वपूर्ण है। 

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Mayo Clinic के अनुसार, जब हार्ट की मांसपेशियों तक ब्लड पहुंचाने वाली आर्टरी में ब्लड फ्लो बहुत कम हो जाता है या पूरी तरह से रुक जाता है, तब हार्ट अटैक आता है। हार्ट अटैक आने का कारण कोरोनरी आर्टरी में फैट, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों का जमा होना हो सकता है। इसे प्लाक कहा जाता है और जब प्लाक जमने लगता है, तो इस प्रोसेस को एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं। इससे आर्टरी संकरी और सख्त होने लगती है। अगर यह प्लाक फट जाए तो वहां ब्लड के क्लॉट बनने लगते हैं। ब्लड क्लॉट ब्लड के फ्लो को पूरी तरह से रोक देते हैं और हार्ट की मांसपेशियों को ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स नहीं मिलते। इससे हार्ट के टिश्यू क्षतिग्रस्त होने लगते हैं और हार्ट अटैक का कारण बनते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि हार्ट अटैक उन लोगों को आ सकता है, जो फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते और डाइट का ध्यान नहीं देते। जो लोग फिट हैं या रोजाना कसरत करते हैं, उन्हें हार्ट अटैक का खतरा कम या नहीं होता। इसमें कितनी सच्चाई है, यह जानने के लिए हमने Dr Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist at Sarvodaya Hospital, Jalandhar से बात की।

क्या फिट लोगों को हार्ट अटैक आ सकता है?

Cureus Journal of Medical Science 2023 में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, एथलीट्स में अचानक कार्डिएक डेथ के मामले देखने को मिले हैं, क्योंकि लगातार मुश्किल ट्रेनिंग के कारण एथलीट्स के हार्ट में बदलाव आते हैं। वैसे तो यह बदलाव सामान्य होते हैं और एक्सरसाइज छोड़ने के बाद हार्ट वापस सामान्य स्थिति में आ जाता है, लेकिन कुछ बदलाव परमानेंट हो जाते हैं, जिससे हार्ट का फंक्शन कम हो जाता है। इससे सडन कार्डिएक अरेस्ट का खतरा बढ़ सकता है। लगातार ट्रेनिंग करने से हार्टबीट असामान्य तरीके से बहुत ज्यादा बढ़ सकती है और हार्ट की मांसपेशियां मोटी या कमजोर हो सकती हैं। इस वजह से हार्ट को नुकसान पहुंच सकता है। डॉ. दिबांशु कहते हैं, "फिट लोग जो लगातार जिम करते हैं, उनमें फिजिकल स्ट्रेस बढ़ सकता है। जो लोग अचानक से भारी वजन उठा लेते हैं, उनमें ब्लड प्रेशर अचानक से बढ़ सकता है, या हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग के दौरान बहुत ही कम समय में हार्ट बीट बहुत तेजी से बढ़ सकती है। जो लोग बिना वार्म-अप किए सीधे मुश्किल और भारी कसरत करना शुरू कर देते हैं, उन्हें हार्ट अटैक का रिस्क हो सकता है।"

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किन कारणों से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है?

डॉ. दिबांशु कहते हैं, “फिट लोगों में हार्ट अटैक आने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें डिहाइड्रेशन के कारण शरीर का ब्लड गाढ़ा हो सकता है। इसके अलावा, बहुत ज्यादा पसीने आने से पोटेशियम और सोडियम की कमी के चलते हार्ट का रिद्म बिगड़ सकता है। कई लोग जिम जाने से पहले प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स लेते हैं, जिसमें कैफीन की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इसके चलते हार्ट अटैक आ सकता है।”

यूरिक एसिड बढ़ने से हार्ट को रिस्क

Journal of Cardiology, 2021 के अनुसार, शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने पर न सिर्फ गठिया रोग बढ़ता है, बल्कि यूरिक एसिड बढ़ने से शरीर के अंदर सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा हो सकता है। इससे ब्लड वेसल्स पर असर पड़ सकता है। ब्लड वेसल्स की अंदरूनी परत नसों को फैलाने और सिकोड़ने वाले केमिकल्स को कंट्रोल करती है। यूरिक एसिड बढ़ने से यह बैलेंस बिगड़ जाता है और नसें सही तरीके से फैल नहीं पातीं, जिससे हार्ट की बीमारियां शुरू हो सकती हैं। इस स्टडी में बताया गया है कि यूरिक एसिड में प्रति 1 mg/dl की वृद्धि होने पर हाई बीपी होने का रिस्क 13% बढ़ जाता है। हाई बीपी हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकती है।

साइलेंट एथेरोस्क्लेरोसिस

डॉ. दिबांशु कहते हैं, “फिट लोगों में एथेरोस्क्लेरोसिस की वजह से भी हार्ट अटैक हो सकता है। इस कंडीशन में आर्टरी के अंदर प्लाक जम जाता है, जिससे ब्लड फ्लो रुक जाता है। इसे साइलेंट किलर डिजीज भी कहा जाता है। दरअसल, इस बीमारी के लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते, जब तक कि ब्लॉकेज गंभीर न हो जाए। इसलिए कई बार फिट लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें हार्ट से जुड़ी कोई बीमारी है। इसमें मरीज को सीने में दर्द और भारीपन महसूस होने लगता है और हाथ या पैर अचानक सुन्न होने लगते हैं।"

जेनेटिक कारण

American College of Cardiology 2024 के मुताबिक, रिसर्चर्स ने लंबे समय तक देखा कि छुट्टियों, चुनावों और बड़े खेलों के दौरान लोगों में हार्ट अटैक के केस बढ़ जाते हैं। इसके पीछे के जेनेटिक कारणों को जानने के लिए रिसर्चर्स ने स्टडी की। इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने न्यूरोटिसिज्म पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर (nPRS) का इस्तेमाल किया। यह स्कोर बताता है कि कोई व्यक्ति जेनेटिक रूप से स्ट्रेस के प्रति कितना सेंसिटिव है। जिन लोगों का nPRS स्कोर ज्यादा था, उनमें तनावपूर्ण समय के दौरान एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (ACS) का खतरा 34 फीसदी ज्यादा पाया गया। एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (ACS) में हार्ट अटैक भी शामिल हैं।अगर जेनेटिक सेंसिटिविटी के साथ-साथ चिंता या डिप्रेशन भी है, तो तनावपूर्ण समय में उनके हार्ट अटैक का खतरा 3.2 गुना (यानी 300% से ज्यादा) बढ़ गया। इस स्टडी से पता चलता है कि अगर फिट लोगों को जेनेटिक स्ट्रेस सेंसिटिविटी है, तो हार्ट अटैक का रिस्क बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस

Journal of International Medical Research के अनुसार, इंसुलिन हार्मोन है, जो पैंक्रियाज से निकलता है और कोशिकाओं को खोलता है ताकि ब्लड से ग्लूकोज अंदर जाकर एनर्जी दे सके। जब ब्लड में ग्लूकोज बढ़ जाता है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाता है, तो LDL ज्यादा हो जाता है और HDL कम होने लगता है। इससे हार्ट की बीमारियां होने का खतरा बढ़ सकता है। जब ब्लड में शुगर और इंसुलिन ज्यादा होते हैं, तो शरीर में 'फ्री रेडिकल्स' (ROS) बनते हैं। ये नसों की दीवारों को डैमेज करते हैं और प्लाक को फटने के लायक बना देते हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. दिबांशु कहते हैं, "जिन लोगों को इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत होती है और उन्हें लक्षणों की पहचान ही नहीं पाती तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे लोग बाहरी रूप से फिट दिखते हैं, लेकिन शरीर के अंदर हार्ट की आर्टरीज में प्लाक बनने लगता है।

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नींद की कमी

डॉ. दिबांशु कहते हैं, "देर रात या सुबह जल्दी जैसे सुबह 4 बजे से लेकर 6 बजे के बीच हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है। इसका कारण सुबह के समय शरीर में ब्लड प्रेशर का अचानक बढ़ना और तनाव वाले हार्मोन्स का स्तर बढ़ना हो सकता है। नींद के दौरान 'साइलेंट हार्ट अटैक' भी आ सकते हैं, जिनमें बहुत कम या बिल्कुल भी लक्षण महसूस नहीं होते। ऐसा फिट दिखने वाले लोगों में भी हो सकता है।"

स्मोकिंग

National Heart, Lung, and Blood Institute के अनुसार, स्मोकिंग हार्ट की बीमारियां बढ़ा सकता है। सिगरेट के धुएं के साथ केमिकल्स हार्ट और ब्लड वेसल्स को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्मोकिंग के केमिकल्स आर्टरी में प्लाक जमने के प्रोसेस को तेज कर सकते हैं। इससे आर्टरी सख्त और संकरी हो सकती है और स्मोकिंग से हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है। डॉ. दिबांशु कहते हैं, "जो लोग फिट होते हैं, लेकिन स्मोक करते हैं, उन्हें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।"

हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज का ओवरलोड

डॉ. दिबांशु कहते हैं, "कई मामलों में फिट लोगों को हार्ट की बीमारियां हो सकती है, जिसके बारे में उन्हें न पता हो। ऐसे में अगर लोग फिजिकल एक्टिविटी बहुत ज्यादा करते हैं, तो हार्ट बीट तेजी से बढ़ सकती है और आर्टरी में जमा प्लाक प्रेशर के चलते फट सकता है। इससे अचानक हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है और कई मामलों में यह देखने को भी मिला है कि जिम करते समय लोगों को हार्ट अटैक आ गया।"

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन

इस बारे में डॉ. दिबांशु कहते हैं, "इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की वजह से हार्ट अटैक आ सकता है। इसमें फिट दिखने वाले लोग भी शामिल है। इलेक्ट्रोलाइट्स मिनरल्स होते हैं, जो शरीर के तरल पदार्थों में इलेक्ट्रिक चार्ज करते हैं। हार्ट बीट भी पूरी तरह से इलेक्ट्रिक चार्ज पर निर्भर करती है। जब पोटेशियम की कमी होती है, तो ब्लड प्रेशर बढ़ने से हार्ट बीट स्टेबल नहीं रह पाती और ज्यादा हार्ट बीट एरिदमिया (Arrhythmia) का खतरा बढ़ा सकती है, जो हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ा सकती है। कैल्शियम और मैग्नीशियम दोनों हार्ट को सिकुड़ने और फैलने का काम करते हैं। अगर इन दोनों का बैलेंस नहीं होगा, तो घबराहट और गंभीर कार्डिएक अरेस्ट का कारण बन सकता है। मिनरल्स की कमी बाहरी तौर पर फिट दिखने वाले लोगों में भी हो सकती है और ये कारण हार्ट अटैक के बन सकते हैं।"

हार्ट अटैक के लक्षण

Cleveland Clinic के अनुसार, हार्ट अटैक आने के लक्षण हर किसी को एक जैसे नहीं होते और लक्षण अचानक नहीं आते। कई बार ये धीरे-धीरे शुरू होते हैं, जैसे सीढ़ियां चढ़ते समय या तेज चलते समय छाती में हल्का दर्द हो सकता है। आमतौर पर छाती में दबाव, जकड़न या भारीपन महसूस हो सकता है। हार्ट अटैक के लक्षण ये होते हैं, जिन पर लोगों को ध्यान देने की जरूरत है।

  1. सीने में बेचैनी कम से कम दस मिनट तक रह सकती है। कभी-कभी एसिडिटी जैसा महसूस होता है।
  2. छाती का दर्द जबड़े, गर्दन, कंधे, हाथ या पीठ तक फैल सकता है।
  3. बिना वजह बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होती है।
  4. बहुत ज्यादा पसीना आना, चक्कर आना या बेहोश होना संभव है।
  5. पेट खराब, मतली और उल्टी हो सकती है।

हार्ट अटैक आने का किन लोगों को ज्यादा खतरा है?

CDC के अनुसार, जिन लोगों को निम्न परेशानियां है, उन्हें हार्ट अटैक से बचाव के लिए रेगुलर चेकअप कराते रहना चाहिए।

  1. अगर हाई ब्लड प्रेशर है, तो आर्टरी में ब्लड का प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इससे किडनी और दिमाग को भी नुकसान पहुंचता है।
  2. कोलेस्ट्रॉल धमनियों में जमा होने पर आर्टरी संकरी होने लगती हैं। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
  3. डायबिटीज के रोगियों के शरीर में सही तरीके से इंसुलिन नहीं बन पाता, जिस वजह से ब्लड में शुगर जमा होने लगता है। डायबिटीज के मरीजों को हार्ट की बीमारियों से मृत्यु का जोखिम सामान्य लोगों के मुकाबले में बहुत ज्यादा होता है।
  4. जो लोग मोटापे से ग्रस्त हैं, उन्हें मोटापे के कारण हाई बीपी और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है।
  5. जो लोग बिल्कुल भी फिजिकल एक्टिव नहीं होते, उन्हें हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है।
  6. स्मोकिंग और शराब का ज्यादा सेवन हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकता है।

हार्ट अटैक से बचाव के लिए जरूरी टेस्ट

NHS के मुताबिक, हार्ट अटैक की जांच के लिए दो टेस्ट किए जा सकते हैं।

  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) - यह हार्ट की इलेक्ट्रिक एक्टिविटी को चेक करता है।
  • ब्लड टेस्ट - हार्ट की मांसपेशियां डैमेज होने पर ब्लड में कुछ खास प्रोटीन पाए जाते हैं, ब्लड टेस्ट के जरिए उसकी जांच की जाती है।
  • इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram) - इसके जरिए चेक किया जाता है कि हार्ट को कितना नुकसान हुआ है।
  • कोरोनरी एंजियोग्राम (Coronary Angiogram) - इस टेस्ट से पता लगाया जाता है कि ब्लॉकेज कहां है और अक्सर जांच के दौरान ही ब्लॉकेज का इलाज भी कर दिया जाता है।

हार्ट अटैक का इलाज

डॉ. दिबांशु कहते हैं, "हार्ट अटैक आने पर मरीज को तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती किया जाता है और अगर धमनियों में ब्लॉकेज है, तो उसे खोलने और ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने के लिए दवाएं दी जाती है। अगर दवाओं से ब्लॉकेज नहीं खुलती, तो कोरोनरी एंजियोप्लास्टी की जाती है। इसमें एक छोटी प्लास्टिक ट्यूब यानी स्टेंट का इस्तेमाल करके आर्टरी को खोला जाता है। अगर हार्ट अटैक गंभीर है, तो कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी की जा सकती है। इसमें शरीर के किसी अन्य हिस्से से सेहतमंद आर्टरी ली जाती है और उसे हार्ट में लगाया जाता है ताकि नए रास्ते से ब्लड फ्लो हो सके।"

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फिट लोगों को हार्ट अटैक से बचने के उपाय

डॉ. दिबांशु कहते हैं, "फिट लोगों को हार्ट अटैक का एक कारण खराब लाइफस्टाइल होना हो सकता है। इसलिए सभी को अपने लाइफस्टाइल पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर लोग अपनी जीवनशैली में ये बदलाव कर लेंगे, तो हार्ट अटैक के रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है।"

  1. स्मोकिंग तुरंत छोड़ना जरूरी है। तंबाकू और सिगरेट हृदय की धमनियों को सख्त बना देते हैं।
  2. रोजाना अपनी डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, बिना स्किन वाला चिकन, मछली, दालें और नट्स शामिल करने चाहिए।
  3. रेड मीट, प्रोसेस्ड मीट, चीनी युक्त ड्रिंक्स, नमक और सैचुरेटेड फैट का सेवन बिल्कुल सीमित कर दें।
  4. LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल 70 mg/dL से कम होना हार्ट के लिए अच्छा माना जाता है।
  5. HDL यानी गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल जितना ज्यादा होगा, उतना बेहतर है। मोटापा और डायबिटीज इसे कम कर देते हैं।
  6. नमक कम खाना, रोजाना वॉक या एक्सरसाइज करना और दवाओं को समय पर खाना ब्लड प्रेशर को कम कर सकते हैं।
  7. डायबिटीज होने पर हार्ट अटैक का खतरा बहुत बढ़ जाता है। शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए रेगुलर चेकअप कराएं और डॉक्टर द्वारा बताई गई डाइट का पालन करें।
  8. रोजाना सात से नौ घंटे नींद पूरी करें।
  9. स्ट्रेस मैनेज करने के लिए योग और मेडिटेशन करें और दोस्तों के बीच समय बिताएं।
  10. शराब का सेवन बिल्कुल न करें।

डॉक्टर से कब मिलें?

डॉ. दिबांशु कहते हैं कि अगर कसरत के दौरान या आराम करते समय निम्न लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

  • सीढ़ियां चढ़ते या वॉक करते समय सीने में हल्का दबाव या जकड़न महसूस होना
  • सीने का दर्द जो जबड़े, गर्दन, बाएं हाथ या पीठ की तरफ फैल रहा हो
  • एक्सरसाइज के दौरान अचानक बहुत ज्यादा पसीना आना या चक्कर आना
  • बिना किसी कारण सांस फूलने की समस्या होना

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निष्कर्ष

डॉ. दिबांशु कहते हैं कि फिट रहने का मतलब सिर्फ बाहरी तौर पर फिट दिखना नहीं होता, बल्कि शरीर का अंदर से स्ट्रॉन्ग होना महत्वपूर्ण है। इसमें खासतौर पर हार्ट फंक्शन, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और बीपी कंट्रोल होना जरूरी है। जो लोग बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं और उनका शरीर सहन नहीं कर पाता, तो एक्सरसाइज कम करनी चाहिए। इसके अलावा, बिना वजह के सप्लीमेंट्स कम लेने चाहिए और रेगुलर चेकअप जरूर कराते रहना चाहिए।

FAQ

  • क्या जिम जाने से पहले मेडिकल चेकअप जरूरी है?

    आप चाहे खुद को कितना भी फिट समझते हों लेकिन जिम जाने से पहले एक बार डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं। अगर आपकी उम्र 35 साल की है या परिवार में हार्ट की बीमारी की हिस्ट्री है, तो एक बार ECG और लिपिड प्रोफाइल जरूर करवाना चाहिए।
  • क्या बहुत ज्यादा प्रोटीन शेक लेना हार्ट के लिए बुरा है?

    प्रोटीन बुरा नहीं है, लेकिन सप्लीमेंट्स में मौजूद मिलावटी स्टेरॉयड या बहुत ज्यादा कैफीन हार्ट को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • क्या हार्ट अटैक के बाद दोबारा फिट हुआ जा सकता है?

    हार्ट अटैक के बाद सही इलाज, एंजियोप्लास्टी और कार्डियक रिहैबिलिटेशन के जरिए मरीज दोबारा फिट हो सकते हैं।
  • हार्ट अटैक आने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

    हार्ट अटैक आने पर तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करना चाहिए। इस दौरान मरीज को आरामदायक स्थिति में बैठाना चाहिए। एम्बुलेंस का इंतजार करते समय मरीज को एस्पिरिन (300 mg) चबाने के लिए दे सकते हैं। इससे पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें और मरीज के कपड़े ढीले कर दें और अगर वह सांस नहीं ले रहे हैं, तो तुरंत CPR शुरू करें।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 23, 2026 15:16 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Apr 23, 2026 15:16 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta

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