Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Deebanshu Gupta , Cardiologist

क्या स्टेंट लगने के बाद (एंजियोप्लास्टी) हार्ट अटैक आ सकता है? क्या कहती है रिसर्च और डॉक्टर की राय

अक्सर लोग मान लेते हैं कि स्टेंट लगने के बाद हार्ट अटैक का रिस्क कम हो जाता है, लेकिन स्टेंट लगने के बाद गलत खानपान और लाइफस्टाइल की वजह से दोबारा अटैक होने का खतरा बढ़ सकता है। इस लेख में डॉक्टर ने स्टेंट लगने के बाद रिस्क फैक्टर्स के साथ बचाव के उपाय भी बताए हैं।

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WHO के अनुसार, साल 2022 में दुनियाभर में करीब 1.98 करोड़ लोगों की मृत्यु हार्ट के रोगों के कारण हुई थी और ये दुनियाभर में होने वाली कुल मौतों का लगभग 32% है। हैरानी वाली बात यह है कि इन मौतों में से 85% मामले सिर्फ हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हैं। इसलिए हार्ट अटैक के लक्षणों की पहचान करके समय पर इलाज कराना बहुत जरूरी होता है। हार्ट अटैक आने पर मरीज की जान बचाने के लिए एंजियोप्लास्टी यानी स्टेंट लगाया जाता है। आमतौर पर लोग समझ लेते हैं कि स्टेंट लगने के बाद हार्ट अटैक की संभावना लगभग खत्म हो जाती है, लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है? स्टेंट लगने के बाद मरीज को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए? इन सभी के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने Dr Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar से बात की।

हार्ट में स्टेंट क्यों लगाया जाता है?

National Heart, Lung, and Blood Institute (NHLBI) के अनुसार, स्टेंट एक बहुत ही छोटी जालीदार ट्यूब होती है, जो आमतौर पर कोरोनरी आर्टरीज को खोलने के लिए की जाती है। यह हार्ट को ऑक्सीजन युक्त ब्लड पहुंचाती हैं। डॉ. दिबांशु कहते हैं, "जब मरीज की हार्ट आर्टरी 70% तक ब्लॉक हो जाए, तो एंजियोप्लास्टी प्रोसेस में एक गुब्बारे का इस्तेमाल करके ब्लॉक या कंप्रेस्ड आर्टरी को फैलाकर उसमें स्टेंट डाला जाता है। स्टेंट को वहीं छोड़ दिया जाता है ताकि ब्लड का फ्लो सही तरीके से रहे। इसमें शरीर में कोई बड़ा चीरा नहीं लगाना पड़ता और इस वजह से इसे मेजर सर्जरी नहीं माना जाता। इस सर्जरी से पहले लैब टेस्ट होते हैं और कुछ दवाएं दी जाती हैं, ताकि स्टेंट के अंदर खून के थक्के न जमें।"

stent risks of heart in hindi by dr deebanshu gupta

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स्टेंट कितने तरह का होता है?

National Heart, Lung, and Blood Institute के मुताबिक, स्टेंट अलग-अलग तरीकों से बनते हैं, क्योंकि स्टेंट शरीर के विभिन्न अंगों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

कोरोनरी या कैरोटिड आर्टरी स्टेंट

ये स्टेंट आमतौर पर हार्ट या गर्दन की आर्टरी के लिए बनाए जाते हैं, जो दो तरह के होते हैं।
बेयर मेटल स्टेंट - यह धातु की जाली वाली ट्यूब होती है, जो कोरोनरी और गर्दन दोनों के लिए इस्तेमाल की जाती है।
ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट - इसे ही आमतौर पर डॉक्टर ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसमें बाहरी परत में एक दवा की कोटिंग होती है, जो धीरे-धीरे आर्टरी में घुलती रहती है ताकि वेसल्स दोबारा न सिकुड़ें। इसमें कुछ मामलों में बाहरी परत खुद ही समय के साथ अपने आप घुल जाती है।

एओर्टिक एन्यूरिज्म स्टेंट

यह स्टेंट ग्राफ्ट कहे जाते हैं, जो एओर्टा के एन्यूरिज्म के इलाज के लिए इस्तेमाल होते हैं। पॉलिएस्टर से बनी यह ट्यूब बड़ी आर्टरीज को खोलती है ताकि ब्लड फ्लो के लिए सेफ रास्ता बन सके।

एयरवे स्टेंट

इन स्टेंट का इस्तेमाल फेफड़ों के लिए किया जाता है, जो आमतौर पर दो तरह के होते हैं। मेटल के बने स्टेंट को निकालना मुश्किल होता है, इसलिए इनका इस्तेमाल कम किया जाता है। सिलिकॉन स्टेंट को किसी भी आकार में ढाला जा सकता है और इसे डालना और निकालना दोनों ही आसान होता है।

स्टेंट लगाने के बाद मरीज की देखभाल कैसे करें?

डॉ. दिबांशु कहते हैं, स्टेंट लगाने के बाद मरीज को खून पतला करने वाली दवाएं दी जाती हैं ताकि खून के थक्के न जमें। इसमें मरीज की कंडीशन को देखते हुए दवा की मात्रा तय की जाती है। इसके अलावा स्टेंट लगने के कम से कम 24 घंटे तक मरीज को कोई भारी कसरत या भारी सामान न उठाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, मरीज को कुछ दिनों तक भारी काम न करने के लिए कहा जा सकता है। मरीज को ट्रेनर की देखभाल में कसरत करने के लिए कहा जा सकता है, लेकिन डॉक्टर किसी भी तरह की सलाह सिर्फ मरीज की कंडीशन को देखकर ही देते हैं। इसलिए कसरत या दवाएं सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।”

किन मरीजों को स्टेंट नहीं लगाया जा सकता?

NHLBI के मुताबिक, कुछ मरीजों को स्टेंट न लगाने की सलाह दी जा सकती है।

  1. अगर मरीज की हार्ट ब्लॉकेज को दवाओं के जरिए खत्म किया जा सकता है। ऐसे में डॉक्टर मरीज को लाइफस्टाइल में बदलाव करने की सलाह देते हैं।
  2. जो मरीज स्टेंट लगने के बाद तय समय तक एंटीप्लेटलेट यानी खून पतला करने वाली दवाएं नहीं ले सकते हैं।
  3. कई आर्टरीज में रुकावट, लंबे समय से डायबिटीज या किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों को कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।
  4. यदि किसी मरीज को भविष्य में लेजर थेरेपी या ऐसी किसी प्रोसेस को कराने की जरूरत होती है, तो स्टेंट की सलाह नहीं दी जा सकती है।

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क्या स्टेंट लगाने के बाद हार्ट अटैक आ सकता है?

डॉ. दिबांशु कहते हैं, "आमतौर पर स्टेंट लगाने के बाद ब्लड फ्लो बेहतर होता है और लोगों को लक्षणों में सुधार महसूस होता है, लेकिन अगर मरीज अपने लाइफस्टाइल को लेकर लापरवाह हो जाते हैं और डॉक्टर की सुझाई आदतों का पालन नहीं करते, तो स्टेंट लगने के बाद दोबारा हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है। दरअसल, स्टेंट ब्लॉक हुई आर्टरी को खोलता है, लेकिन अगर मरीज सेडेंटरी लाइफस्टाइल, यानी कसरत न करना, डाइट पर ध्यान न देना और दवाएं समय पर न लेने से स्टेंट के अंदर थक्के बनने का खतरा हो सकता है। इससे हार्ट अटैक आने का रिस्क काफी ज्यादा बढ़ सकता है। स्टेंट लगने के बाद मरीज का हार्ट सिस्टम ज्यादा सेंसिटिव हो सकता है और ऐसे में अगर दोबारा हार्ट अटैक आ जाए, तो यह गंभीर हो सकता है। स्टेंट के मामले में मैं यह कहना चाहूंगा कि स्टेंट ब्लड फ्लो को सुधारता है, लेकिन यह नेचुरल आर्टरी की जगह नहीं ले सकता, इसलिए मरीजों को स्टेंट लगने के बाद अपने लाइफस्टाइल और डाइट दोनों पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है।"
डॉ. दिबांशु आगे कहते हैं, “कई मामलों में मरीज के स्टेंट लगने के बाद वही आर्टरी फिर से बंद हो जाती है, जिसे रिस्टेनोसिस कहते हैं। इसमें कोरोनरी आर्टरी फिर से ब्लॉक हो सकती है। पुराने स्टेंट में यह रिस्क ज्यादा था, लेकिन अब ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट (Drug Eluting Stent) ने इस रिस्क को काफी कम कर दिया है।”

स्टेंट लगाने के बाद किन मरीजों को जटिलताएं आ सकती हैं?

डॉ. दिबांशु कहते हैं कि एंजियोप्लास्टी में स्टेंट लगने के बाद इन मरीजों को दोबारा स्टेंट लगाने की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए ऐसे मरीजों को अपना खास ख्याल रखना चाहिए।

  1. जिन मरीजों का हाई कोलेस्ट्रॉल होता है, तो उनकी आर्टरी में फिर से फैट जमा हो सकता है।
  2. किडनी की बीमारी वाले मरीजों को दोबारा ब्लॉकेज होने का रिस्क हो सकता है।
  3. स्मोकिंग करने वाले मरीजों की नसों की अंदरूनी परत को नुकसान हो सकता है।
  4. जिन मरीजों का डायबिटीज बहुत ज्यादा होता है, उनके स्कार टिश्यू बढ़ सकते हैं।
  5. हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों की नसों की दीवारों पर लगातार प्रेशर बढ़ सकता है।

दोबारा हार्ट अटैक होने के लक्षण

Cleveland Clinic के अनुसार, स्टेंट लगने के बाद मरीजों को दोबारा सीने में बेचैनी या प्रेशर महसूस हो सकता है। इसके अलावा, अगर मरीज कोई फिजिकल एक्टिविटी करता है, तो सीने में दर्द बढ़ सकता है। अगर स्टेंट लगने के बाद मरीज को ये दिक्कतें महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

  1. सीने में बेचैनी महसूस होना
  2. बांह या कंधे में दर्द होना
  3. पसीना आते हुए ठंडा महसूस होना
  4. सांस लेने में तकलीफ होना या सांस फूलना
  5. बिना वजह थकान या कमजोरी महसूस होना
  6. मतली महसूस होना
  7. हार्टबीट तेज होना
  8. चक्कर आना या सिर बहुत हल्का महसूस होना

स्टेंट लगने के बाद हार्ट अटैक से बचने के तरीके

डॉ. दिबांशु बताते हैं कि स्टेंट लगने के बाद मरीज को दोबारा हार्ट अटैक से बचाव के लिए अपने लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करने बहुत जरूरी हैं।

  1. डॉक्टर ने जो भी दवाएं दी हैं, उन्हें समय पर सही डोज में लेनी चाहिए। अपनी मर्जी से दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दवाओं को बीच में छोड़ने से स्टेंट में थक्का जमने का रिस्क बढ़ सकता है।
  2. कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से आर्टरी में ब्लॉकेज हो सकता है, इसलिए डाइट में हाई कोलेस्ट्रॉल की चीजों से परहेज रखना चाहिए।
  3. स्टेंट के बाद मरीजों को प्राणायाम और गहरी सांस लेने वाली एक्सरसाइज करनी चाहिए।
  4. हार्ट अटैक से बचने के लिए रोजाना 20 से 30 मिनट तेज सैर करनी चाहिए।
  5. नमक की मात्रा कम से कम रखनी चाहिए।
  6. शराब और स्मोकिंग बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

stent risks of heart in hindi by dr deebanshu

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डॉक्टर से कब मिलें?

अगर स्टेंट लगने के बाद मरीज को सीने में भारीपन और दर्द महसूस हो, सांस फूलने लगे, कैथेटर वाली जगह पर बहुत ज्यादा सूजन या लालिमा हो, घबराहट, बेहोशी होने लगे, मसूड़ों या स्टूल में खून आने लगे, तो तुरंत डॉक्टर काे दिखाना चाहिए।

निष्कर्ष

स्टेंट नसों में ब्लड के फ्लो को सही करने में मदद करता है, लेकिन इसका कतई मतलब नहीं है कि स्टेंट लगने के बाद दोबारा हार्ट अटैक नहीं आ सकता। अगर मरीज अपने लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव नहीं करता, तो स्टेंट में खून के थक्के जम सकते हैं या फिर किसी अन्य आर्टरी में ब्लॉकेज हो सकती है। इसलिए मरीज को डॉक्टर की बताई दवाएं लेने के साथ कोलेस्ट्रॉल और बीपी को भी कंट्रोल में रखना चाहिए ताकि मरीज सामान्य जीवन बिता सके।

FAQ

  • स्टेंट लगने के कितने समय बाद आप ड्राइविंग कर सकते हैं?

    स्टेंट लगने के बाद मरीज को कम से कम एक हफ्ते तक ड्राइविंग नहीं करनी चाहिए। अगर हार्ट अटैक आने के बाद स्टेंट लगा है, तो इस मामले में एक महीने तक ड्राइविंग न करने की सलाह दी जा सकती है। इसके लिए डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
  • स्टेंट लगने के बाद आप कब हवाई यात्रा (Flight) कर सकते हैं?

    आमतौर पर डॉक्टर स्टेंट लगने के बाद लंबी दूरी की हवाई सफर करने की सलाह नहीं देते, लेकिन मरीज की कंडीशन देखकर डॉक्टर हवाई सफर करने के लिए कह सकते हैं। अगर हार्ट अटैक काफी गंभीर था, तो मरीज को हवाई सफर कम से कम 6 हफ्ते के बाद ही करना चाहिए और सामान्य हार्ट अटैक के बाद स्टेंट लगा है, तो करीब 10 दिन बाद हवाई सफर किया जा सकता है।
  • क्या स्टेंट लगने के बाद यौन संबंध (Sex) बनाना सुरक्षित है?

    एंजियोप्लास्टी और स्टेंट के बाद जब मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है और नॉर्मल लाइफ शुरू कर देता है, तो यौन संबंध बना सकता है। यौन संबंध को लेकर मरीज को डॉक्टर से बात करनी चाहिए ताकि वह मरीज की कंडीशन के अनुसार उसे सही समय बता सकें।
  • क्या स्टेंट शरीर में अपनी जगह से खिसक सकता है?

    ऐसा नहीं होता, स्टेंट एक बार आर्टरी के अंदर लग जाता है, तो वह वहां मजबूती से चिपक जाता है। कुछ ही हफ्तों में शरीर की नेचुरल टिश्यू इसके ऊपर एक परत बना लेते हैं, जिससे यह आर्टरी की दीवार का हिस्सा बन जाता है।
  • स्टेंट की उम्र कितनी होती है? क्या इसे बदलने की जरूरत पड़ती है?

    स्टेंट शरीर के अंदर परमानेंट रहता है और इसे निकाला नहीं जाता। आधुनिक स्टेंट पूरी उम्र चलते हैं, लेकिन अगर स्टेंट के अंदर दोबारा ब्लॉकेज हो जाए, तो उसके अंदर दूसरा स्टेंट डाला जा सकता है या बाईपास सर्जरी की जा सकती है।

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Aneesh Rawat

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Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 20, 2026 11:32 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Apr 20, 2026 11:32 IST

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