एड्रिनल फटीग (Adrenal Fatigue) एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल कुछ आम लक्षणों के एक साथ नजर आने पर किया जाता है जैसे कि थकान, शरीर में दर्द और नींद से जुड़ी समस्याएं। एड्रिनल फटीग को आसान भाषा में समझें, तो मान लें कि शरीर एक मोबाइल फोन है और जिस तरह लगातार फोन के इस्तेमाल से बैटरी खर्च होती है, ठीक वैसे ही काम करने, टेंशन लेने या पढ़ने से शरीर की बैटरी धीरे-धीरे खर्च होती है। शरीर के अंदर छोटी-छोटी ग्रंथियां होती हैं जिन्हें एड्रिनल कहते हैं, जो इसे चलाने में मदद करती हैं। जब व्यक्ति लंबे समय तक स्ट्रेस में रहता है, तो ये ग्रंंथियां थक जाती हैं और इसे एड्रिनल फटीग कहा जाता है। एड्रिनल फटीग से जुड़े सवालों के जवाब जानने के लिए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals, Hitech City, Hyderabad से बात की।
एड्रिनल ग्लैंड क्या है?
एड्रिनल ग्लैंड (Adrenal Gland) एक तरह का शारीरिक अंग है जो किडनी के ऊपर मौजूद होता है। अगर किसी कारण से एड्रिनल ग्लैंड ठीक से काम नहीं करती है, तो कुछ हार्मोन्स की कमी हो सकती है जिसके कारण हाई बीपी, हाई शुगर लेवल जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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एड्रिनल ग्लैंड कौन से हार्मोन बनाते हैं?
- कोर्टिसोल (Cortisol) जो कि स्ट्रेस हार्मोन कहलाता है।
- एल्डोस्टेरोन (Aldosterone) जो ब्लड प्रेशर को रेगुलेट करने का काम करता है।
- एड्रेनालाईन (Adrenaline) और नॉरएड्रेनालाईन (Noradrenaline) ऐसे हार्मोन हैं, जो फाइट या फ्लाइट प्रतिक्रिया (Fight-Or-Flight Response) को नियंत्रित करते हैं। फाइट या फ्लाइट प्रतिक्रिया का मतलब होता है, शरीर की इमरजेंसी स्वास्थ्य स्थिति से लड़ने या उससे बचने के लिए तैयार हो जाना।
एड्रिनल फटीग क्या होता है?

Dr. Vidhya Tickoo ने बताया कि एड्रिनल फटीग (Adrenal Fatigue) होने पर थकान, शरीर में दर्द और नींद से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। इसका कोई तय इलाज नहीं होता, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। Endocrine Society के मुताबिक, एड्रिनल फटीग (Adrenal Fatigue) शब्द का इस्तेमाल लक्षणों के एक समूह को समझाने के लिए किया जाता है। एड्रिनल फटीग को एक वास्तविक चिकित्सीय स्थिति मानने से संंबंधित कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। जब एड्रिनल ग्रंथियां पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बनातीं, तो इस स्थिति को एड्रिनल इनसफिशिएंसी नामक मेडिकल कंडीशन कहा जाता है।
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एड्रिनल फटीग, एड्रिनल इनसफिशिएंसी और एड्रिनल क्राइसिस में अंतर
- एड्रिनल फटीग (Adrenal Fatigue) कोई बीमारी नहीं है। इसमें लंबे समय तक थकान, कमजोरी और स्ट्रेस महसूस होता है।
- जब एड्रिनल ग्रंथियां पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पातीं, तो इस स्थिति को मेडिकल भाषा में एड्रिनल इनसफिशिएंसी (Adrenal Insufficiency) कहते हैं। इसमें थकान, लो बीपी, वेट लॉस जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- एड्रिनल क्राइसिस (Adrenal Crisis) एक इमरजेंसी स्थिति है जिसमें शरीर में अचानक कोर्टिसोल का स्तर बहुत कम हो जाता है। एड्रिनल क्राइसिस में चक्कर, उल्टी, बहुत लो बीपी, बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह एक मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति हो सकती है इसलिए ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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शरीर में एड्रिनल फटीग कैसे होता है?
- जब हम स्ट्रेस में होते हैं, तो शरीर का इम्यून सिस्टम ज्यादा एक्टिव होकर प्रतिक्रिया देता है।
- इस दौरान एड्रिनल ग्लैंड स्ट्रेस के जवाब में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन रिलीज करती है। ये हार्मोन आपकी फाइट या फ्लाइट (Fight-Or-Flight) प्रतिक्रिया का हिस्सा होते हैं।
- ये आपके ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन को बढ़ा देते हैं।
- ऐसे में लंबे समय तक स्ट्रेस में रहने से कोर्टिसोल लगातार बनता रहता है और एड्रिनल ग्लैंड थक जाती हैं और इसी स्थिति को एड्रिनल फटीग कहा जाता है।
एड्रिनल फटीग का खतरा किसे ज्यादा होता है?
- आजकल यह समस्या उन लोगों में ज्यादा देखने को मिल रही है जो लंबे समय तक काम या किसी परेशानी के कारण स्ट्रेस में रहते हैं।
- जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती या जिन्हें अनिद्रा की समस्या है उनमें भी इसके लक्षण नजर आ सकते हैं।
- अनहेल्दी चीजों का सेवन करने से भी एड्रिनल फटीग का रिस्क बढ़ जाता है।
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एड्रिनल फटीग के लक्षण
- बहुत ज्यादा और लगातार थकान होती है।
- सोचने-समझने में मुश्किल होना।
- कोई भी काम करने में बॉडी पेन होता है।
- वजन कम हो सकता है।
- बीपी कम हो सकता है।
- हेयर लॉस हो सकता है।
- त्वचा में डिस्कलरेशन (Discoloration) हो सकता है।
- त्वचा में पिगमेंटेशन भी हो सकती है।
- अनिद्रा की समस्या हो सकती है।
- नमक और शुगर क्रेविंग होना।
- इम्यूनिटी कमजोर होना।
एड्रिनल फटीग के कारण
- बहुत सालों से स्ट्रेस में हैं, तो एड्रिनल फटीग हो सकता है।
- फिजिकल स्ट्रेस के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
- खराब डाइट के कारण यह समस्या हो सकती है।
- नींद की कमी और ज्यादा एक्सरसाइज से भी शरीर स्ट्रेस में आ सकता है और एड्रिनल फटीग हो सकता है।
एड्रिनल फटीग की जांच कैसे होती है?
- एड्रिनल फटीग के लिए कोई खास जांच नहीं होती है।
- ब्लड टेस्ट की मदद से इसका अंदाजा लगाया जाता है। कोर्टिसोल और ACTH (Adrenocorticotropic Hormone) जैसे टेस्ट किए जा सकते हैं। ACTH एक हार्मोन है जो एड्रिनल ग्रंथियों को कोर्टिसोल हार्मोन बनाने का संकेत देता है।
- इसके अलावा थायराइड जांच भी हो सकती है।
Mayo Clinic के मुताबिक, एड्रिनल इनसफिशिएंसी की जांच के लिए भी ऊपर बताए ब्लड टेस्ट की मदद ली जा सकती है। जो टेस्ट एड्रिनल हार्मोन्स की जांच करते हैं उनसे ही एड्रिनल इनसफिशिएंसी की पुष्टि की जाती है। CT स्कैन या MRI जैसे टेस्ट की मदद भी ली जा सकती है।
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एड्रिनल फटीग का स्ट्रेस से क्या संबंध है?
Dr. Vidhya Tickoo ने बताया कि एड्रिनल फटीग और स्ट्रेस का संबंध अक्सर देखा जाता है। जब व्यक्ति लंबे समय तक स्ट्रेस में रहता है, तो शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन की मांग बढ़ जाती है। शुरू में शरीर स्ट्रेस को कंट्रोल करने की कोशिश करता है, लेकिन ज्यादा स्ट्रेस होने पर शरीर का कंट्रोल सिस्टम बिगड़ जाता है जिसे HPA Axis कहते हैं। HPA Axis दिमाग और एड्रिनल ग्रंथियों के कनेक्शन को कहते हैं। इस वजह से एड्रिनल फटीग हो सकता है। 2014 में Advances in Integrative Medicine नामक जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला तनाव (chronic stress) शरीर पर लगातार दबाव डालता है और एड्रिनल ग्रंथियों को बार-बार काम करना पड़ता है, जिससे कुछ लोगों में थकान जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
एड्रिनल फटीग के खतरे
- Healthdirect Australia के मुताबिक, एड्रिनल फटीग कोई मेडिकल स्थिति नहीं है, इसलिए बिना सही जांच के इसके लक्षणों का इलाज करने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है।
- जब आपको एड्रिनल सप्लीमेंट्स की जरूरत न हो, तब उन्हें लेने से आपकी एड्रिनल ग्रंथियां ठीक से काम करना बंद कर सकती हैं। इससे आपके शरीर के लिए स्ट्रेस को मैनेज करना और भी मुश्किल हो जाता है।
- अगर आप इन सप्लीमेंट्स को अचानक लेना बंद कर देते हैं, तो आपकी एड्रिनल ग्रंथियों को ठीक होने में कई महीने लग सकते हैं। इससे 'एड्रिनल क्राइसिस' हो सकता है जो कि एक गंभीर स्थिति है जिसके कारण अधिक कमजोरी और लो बीपी की समस्या हो सकती है।
- यह मान लेना कि एड्रिनल फटीग है, लक्षणों के असली कारण का पता लगाने में भी देरी कर सकता है। हर समय थकान महसूस होती है, तो सही जांच और इलाज के लिए डॉक्टर से जल्द संपर्क करना जरूरी है।
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एड्रिनल फटीग का इलाज
Dr. Vidhya Tickoo ने बताया कि एड्रिनल फटीग में डॉक्टर कारण का पता लगाकर इलाज करते हैं। अगर स्ट्रेस के कारण यह समस्या हुई है, तो काउंसलिंग या थेरेपी दी जाती है, नींद की समस्या है, तो स्लीप मैनेजमेंट के लिए थेरेपी दी जाती है, थकान के कारण यह समस्या होने पर डाइट में बदलाव किए जाते हैं और एड्रिनल इनसफिशिएंसी होने पर स्टेरॉइड दिए जाते हैं। एड्रिनल फटीग को ठीक करने के लिए डॉक्टर लाइफस्टाइल में बदलाव करने की सलाह देते हैं।
- नींद को नजरअंदाज न करें।
- रोज कम से कम सात से आठ घंटों की नींद लें।
- बैलेंस्ड डाइट लें। एक्सरसाइज करें।
- स्ट्रेस को मैनेज करें।
- मेडिटेशन की मदद लें और डॉक्टर की सलाह के बगैर सप्लीमेंट्स का सेवन न करें।
हेल्दी डाइट से एड्रिनल फटीग को मैनेज कर सकते हैं
एड्रिनल फटीग को मैनेज करने के लिए हेल्दी डाइट की मदद ले सकते हैं। डाइट में एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स जैसे ताजी सब्जियां, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स को शामिल करें। साथ ही ऐसे फूड्स खाएं जिससे आपको एनर्जी मिले जैसे दाल, अंडा, फाइबर वगैरह। साथ ही कैफीन और शुगर का सेवन करने से बचें।
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एड्रिनल फटीग से बचने के लिए क्या करें?
- धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन न करें।
- डिहाइड्रेशन से बचें।
- रोजाना एक्सरसाइज करें।
- इससे बचने के लिए प्रोसेस्ड फूड्स, कार्ब्स और जंक फूड का सेवन कम करें।
- डाइट में होल ग्रेन्स को शामिल करें।
- स्ट्रेस को कंट्रोल करें और अनिद्रा से बचें।
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डॉक्टर से संपर्क कब करें?
अगर थकान दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही अगर ये लक्षण नजर आएं, तो भी डॉक्टर से संपर्क करें-
- वजन कम होना
- चक्कर आना
- त्वचा का रंग गहरा होना
निष्कर्ष:
Consultant Endocrinologist & Diabetologist Dr. Vidhya Tickoo से हुई बातचीत के आधार पर पता चलता है कि एड्रिनल फटीग होने पर थकान, शरीर में दर्द और नींद जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। यह कोई मेडिकल कंडीशन नहीं है, इसलिए इसके लक्षणों को ठीक करने के लिए डाइट, थेरेपी और दवाओं की मदद ली जा सकती है। शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल कम होने के कारण एड्रिनल इनसफिशिएंसी हो सकती है जो कि एक मेडिकल कंडीशन है। इसके इलाज के लिए डॉक्टर स्टेरॉइड दे सकते हैं। अचानक वेट लॉस, थकान, चक्कर जैसे लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
FAQ
क्या एड्रिनल फटीग अस्थायी समस्या है?
एड्रिनल फटीग एक दीर्घकालिक समस्या नहीं है। जीवनशैली में बदलाव करके भी एड्रिनल फटीग के लक्षणों को ठीक नहीं किया जा सकता है।एड्रिनल फटीग और सामान्य फटीग में क्या अंतर है?
अगर व्यक्ति को सामान्य थकान है, तो वह आराम करने से दूर हो जाएगी, लेकिन एड्रिनल फटीग में ऐसा नहीं होता। आराम करने के बाद भी थकान बनी रहती है और लाइफस्टाइल में बदलाव का भी ज्यादा असर नजर नहीं आता है।एड्रिनल फटीग और एड्रिनल इनसफिशिएंसी में क्या अंतर है?
एड्रिनल इनसफिशिएंसी एक बीमारी है और इसके कारण कोर्टिसोल लेवल कम हो जाता है, इसलिए इसमें इलाज की तुरंत जरूरत होती है, जबकि एड्रिनल फटीग मेडिकल कंडीशन नहीं, बल्कि लक्षणों का एक समूह है।क्या एड्रिनल फटीग कोई बीमारी है?
नहीं, एड्रिनल फटीग को बीमारी नहीं कहा जा सकता। इस समस्या में लक्षणों का एक समूह देखने को मिलता है। इसके लक्षण अक्सर जीवनशैली से जुड़े कारकों के कारण होते हैं।
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Current Version
Apr 21, 2026 10:55 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Apr 21, 2026 10:55 IST
Modified By : Yashaswi MathurApr 21, 2026 10:55 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Vidya Tickoo