Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kamalesh A , Senior Consultant Physician - Internal Medicine

गाउट अटैक क्या होता है? डॉक्‍टर से जानें लक्षण, कारण और तुरंत राहत के उपाय

हाई यूर‍िक एस‍िड होने पर जोड़ों में क्रि‍स्‍टल फॉर्म हो जाते हैं और इससे गाउट अटैक आ सकता है। गाउट अटैक आने पर कुछ जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं ताक‍ि दर्द कम हो सके। जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज।

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ब्‍लड में हाई यूर‍िक एस‍िड के कारण गाउट अटैक आ सकता है। यह समस्‍या 30 से 50 साल की उम्र में ज्‍यादा देखने को म‍िलती है। आमतौर पर गाउट की चार स्‍टेज देखी जाती हैं। पहली स्‍टेज में ज्‍यादातर मरीजों को लक्षण नजर नहीं आता है। इस स्‍टेज में अक्‍सर मरीज को जोड़ों में सूजन या दर्द महसूस नहीं होता है। दूसरे स्‍टेज में मरीज को एक्‍यूट अटैक आ सकता है। एक्‍सपर्ट्स के मुताब‍िक ज्‍यादातर मामलों में गाउट अटैक एंकल, घुटने या कलाई पर आ सकता है, इसे एमटीपी जॉइंट ( MTP Joint) भी कहा जाता है। तीसरी स्‍टेज इंटरक्रिटिकल गाउट कहलाती है जो क‍ि एक अटैक खत्म होने के बाद का पीरियड है और चौथी क्रोनिक टोफेशियस गाउट है। चौथी स्‍टेज लंबे समय तक इलाज न होने के कारण आती है। गाउट अटैक क्‍या होता है और इसके लक्षण, कारण और इलाज की जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Kamalesh A, Consultant Physician, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

गाउट क्‍या होता है?

Dr. Kamalesh A ने बताया क‍ि गाउट एक तरह का इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस है जो ब्‍लड में यूरिक एसिड का लेवल ज्‍यादा होने की वजह से होता है, जिससे जोड़ों में यूरेट क्रिस्टल (यूर‍िक एस‍िड ज्‍यादा होने पर बनने वाले कण) बन जाते हैं। ये क्रिस्टल अचानक, तेज दर्द और सूजन पैदा करते हैं।

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गाउट अटैक क्‍या है?

गाउट का दौरा या फ्लेयर-अप एक गंभीर स्थिति होती है जिसमें यूरेट क्रिस्टल अचानक किसी जोड़ में सूजन पैदा कर देते हैं, जिससे तेज दर्द, रेडनेस और सूजन होती है। यह अक्सर अचानक शुरू होता है और अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह कई दिनों से लेकर हफ्तों तक रह सकता है।

गाउट अटैक के लक्षण

  • आम लक्षणों में जोड़ों में तेज दर्द (अक्सर रात में शुरू होता है)।
  • सूजन।
  • रेडनेस।
  • प्रभावित हिस्से में गर्मी महसूस होना और जोड़ों को हिलाने-डुलाने में दिक्कत होना शामिल है।
  • गंभीर दौरों के दौरान बुखार या थकान भी महसूस हो सकती है।

गाउट अटैक और गठिया में अंतर कैसे पहचानें?

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Dr. Kamalesh A ने बताया क‍ि गाउट का अटैक अचानक और बहुत तेजी से आता है जो आमतौर पर शरीर के किसी एक जोड़ (जैसे पैर के अंगूठे) को प्रभावित करता है। इसमें जोड़ बहुत ज्‍यादा लाल हो जाता है और गर्म महसूस होता है, जो कुछ हफ्ते में ठीक हो जाता है। इसके विपरीत, गठिया का दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है। यह शरीर के उन जोड़ों को प्रभावित करता है, जिन पर शरीर का वजन पड़ता है (जैसे घुटने) और जैसे-जैसे आप उन जोड़ों का इस्तेमाल करते हैं, दर्द बढ़ता जाता है इसमें आमतौर पर जोड़ लाल नहीं होते।

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गाउट अटैक के कारण क्‍या हैं?

गाउट अटैक तब होता है जब यूरिक एसिड का लेवल अचानक बढ़ जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे-

  • शरीर में पानी की कमी
  • प्यूरीन से भरपूर खाना (रेड मीट, सीफूड)
  • अल्‍कोहल
  • चोट लगना
  • सर्जरी
  • क्रैश डाइटिंग करना

गाउट की जांच कैसे होती है?

गाउट की जांंच के ल‍िए यूर‍िक एस‍िड का लेवल चेक‍ क‍िया जाता है। यूरिक एसिड के लेवल की जांच के लिए ब्लड टेस्ट, माइक्रोस्कोप से यूरेट क्रिस्टल का पता लगाने के लिए जोड़ों के फ्लूइड लेवल की जांच और दूसरी बीमारियों का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे जैसी जांच की जाती है।

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गाउट के गंभीर दौरों का इलाज

Dr. Kamalesh A ने बताया क‍ि दर्द और सूजन कम करने के लिए NSAIDs या स्टेरॉइड्स का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। लंबे समय के लिए यूरिक एसिड का लेवल कम करने वाली दवाओं का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। साथ ही जीवनशैली में बदलाव करने की भी सलाह दी जाती है।

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गाउट अटैक क‍ितने समय तक रहता है?

बिना इलाज के यह आमतौर पर 12 से 24 घंटों में अपने चरम पर पहुंच जाता है और 7-14 दिनों तक रहता है। दवाओंं के साथ, लक्षण अक्सर एक से दो दिनों में बेहतर होने लगते हैं और तीन से दस दिनों में काफी हद तक ठीक हो जाते हैं। StatPearls के मुताब‍िक, गाउट अटैक आमतौर पर तीन द‍िन से दो हफ्ते तक रह सकता है।

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क्‍या गाउट अटैक दोबारा आ सकता है?

हां, बिना इलाज के गाउट अक्सर दोबारा हो जाता है। अगर यूरिक एसिड का लेवल कंट्रोल में न रखा जाए, तो एक साल के अंदर दोबारा अटैक आ सकता है, लेकिन दवाओं और जीवनशैली में बदलाव करके इससे बचना संंभव है। 2024 में JAMA नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, ज‍िन लोगों में सीरम यूरि‍क एस‍िड ज्‍यादा था, उनमें गाउट अटैक दोबारा आने का खतरा ज्‍यादा देखा गया। स्‍टडी के मुताब‍िक दोबारा गाउट अटैक की समस्‍या उन लोगों में देखी गई ज‍िनका यूर‍िक एस‍िड 6 mg/dL या उससे ज्‍यादा था।

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गाउट का अटैक रात में ही क्यों ज्‍यादा आता है?

रात के समय अटैक आना आम बात है, क्योंकि शरीर का तापमान कम होने से यूरेट क्रिस्टल आसानी से बन जाते हैं। शाम को गलत खानपान या अल्‍कोहल के सेवन की वजह से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे यूरिक एसिड गाढ़ा हो जाता है और सोते समय जोड़ों की हलचल कम हो जाती है जिससे सूजन बढ़ने लगती है। 2015 में Arthritis & Rheumatology नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, गाउट के 724 मरीजों का एक साल तक फॉलो अप ल‍िया गया और यह सामने आया क‍ि गाउट अटैक द‍िन के मुकाबले रात को ज्‍यादा होते हैं। ऐसे में समय एक खास ट्र‍िगर फैक्‍टर हो सकता है।

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गाउट अटैक में तुरंत राहत के ल‍िए क्‍या करें?

Dr. Kamalesh A ने बताया क‍ि एक्‍यूट गाउट अचानक से होता है। ऐसी स्‍थ‍िति‍ में तेज दर्द होता है ज‍िसे कंट्रोल करने के ल‍िए ये उपाय अपनाएं-

  • एक्‍यूट गाउट की स्‍थ‍ित‍ि में आराम करें, जोड़ को ऊपर उठाकर रखें और मूवमेंट से बचें क्‍योंक‍ि मूवमेंट करने से दर्द बढ़ सकता है।
  • गाउट अटैक की स्‍थ‍ित‍ि में बर्फ से स‍िंकाई करें। इंफ्लेमेशन को कंट्रोल करने के ल‍िए ठंडी स‍िंकाई फायदेमंद हो सकती है।
  • डॉक्‍टर की सलाह पर पेनक‍िलर ले सकते हैं, लेक‍िन पेट में अल्‍सर है, हार्ट की बीमारी है या क‍िडनी की समस्‍या है, तो पेनक‍िलर खुद से न लें। डॉक्‍टर से कंसल्‍ट करें।
  • जब दवाओं से दर्द नहीं ठीक होता है, तो डॉक्‍टर स्‍टेरॉइड का इंजेक्‍शन देते हैं।
  • पानी प‍िएं। शरीर में पानी की कमी न होने दें।

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गाउट की समस्‍या क‍िसे हो सकती है?

गाउट क‍िसी को भी हो सकता है, लेक‍िन ये कुछ लोगों में ज्‍यादा कॉमन होता है। जैसे-

  • 40 साल से ज्‍यादा उम्र के पुरुषों में
  • मेनोपॉज के बाद वाली महिलाओं में
  • मोटापे, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज के मरीज
  • किडनी की बीमारी या गाउट की पारिवारिक हिस्ट्री वाले लोगों को गाउट होने का खतरा ज्‍यादा होता है।
  • प्यूरीन से भरपूर खाना या फ्रुक्टोज वाली मीठी ड्रिंक्स पीने से भी गाउट होने की संभावना बढ़ जाती है।

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गाउट को मैनेज करने के ल‍िए क्‍या करें?

सीडीसी(Centers For Disease Control And Prevention) के मुताब‍िक, दवाओं के साथ-साथ गाउट को मैनेज करने के ल‍िए ये ट‍िप्‍स अपनाएं-

  1. शारीर‍िक रूप से एक्‍ट‍िव रहें। हफ्ते में कम से कम 150 म‍िनट एक्‍सरसाइज करें।
  2. हाई प्‍यूरीन फूड्स का सेवन न करें। जैसे-
  • अल्‍कोहल
  • शुगरी ड्र‍िंक्‍स और खाद्य पदार्थ
  • रेड मीट
  • कुछ सीफूड्स जैसे ट्राउट और टूना

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गाउट में कैसी डाइट लें?

Dr. Kamalesh A ने बताया क‍ि पानी की कमी पूरी करने वाले और कम प्यूरीन वाली चीजें खाएंं। चेरी या बेरीज का सेवन करें, इससे सूजन कम होगी, कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्‍ट्स खाएं, ताजी सब्‍ज‍ियांं खाएं, साबुत अनाज का सेवन करें और पर्याप्‍त मात्रा में पानी प‍िएंं। रेड मीट, अल्‍कोहल और मीठे सोडा का सेवन करने से बचें। National Institute of Arthritis and Musculoskeletal And Skin Diseases के मुताब‍िक, हेल्‍दी डाइट और लाइफस्‍टाइल की मदद से गाउट के लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं। सबसे पहले वेट लॉस के लि‍ए कैलोरी इंटेक कम करें। इसके अलावा हाई बीपी के मरीज गाउट के लक्षणों को कंट्रोल करने के ल‍िए डैश डाइट फॉलो कर सकते हैंं। इससे बीपी भी कंंट्रोल होता है और गाउट के लक्षणों को कंट्रोल करने में भी मदद म‍िलती है।

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डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर दर्द बर्दाश्त से बाहर हो
  • आपको बुखार या ठंड लग रही हो
  • जोड़ गर्म और लाल हों
  • अगर यह आपका पहला अटैक हो, तो तुरंत इलाज कराएंं।
  • अगर अटैक बार-बार होने लगे या 48 घंटों के अंदर घरेलू इलाज से ठीक न हो, तो भी डॉक्टर से संंपर्क करें।

न‍िष्‍कर्ष:

Consultant Physician Dr. Kamalesh A से हुई बातचीत के आधार पर पता चलता है क‍ि गाउट अटैक एक अचानक से होने वाला या एक्‍यूट एप‍िसोड है। गाउट अटैक आने पर अचानक से तेज दर्द, सूजन, रेडनेस और जोड़ में गर्माहट महसूस होती है। गाउट अटैक आने पर आराम करें और बर्फ से स‍िंकाई करें ताक‍ि तुरंत राहत म‍िले। CDC के मुताब‍िक, गाउट की समस्‍या क‍िसी को भी हो सकती है खासकर ज‍िनमें गाउट की फैम‍िली हि‍स्‍ट्री रही हो।

FAQ

  • गाउट के अटैक में शरीर का कौन सा जोड़ सबसे ज्‍यादा प्रभावित होता है?

    गाउट के पहले अटैक में पैर का अंगूठा सबसे ज्‍यादा प्रभावित होता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि इस जोड़ का तापमान शरीर के बाकी हिस्सों के मुकाबले कम होता है और क्रिस्टल यहीं जमा हो जाते हैं। घुटने, टखने और कलाई भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
  • क्‍या गाउट अटैक इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकता है?

    गाउट अटैक इलाज से पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता, लेक‍िन इसके लक्षणों को दवा, खान-पान, जीवनशैली में बदलाव के जर‍िए कंट्रोल कर सकते हैं।
  • गाउट अटैक कितना दर्दनाक होता है?

    यह बेहद दर्दनाक होता है। इसे अक्सर सबसे भयानक दर्द में ग‍िना जाता है। ऐसा महसूस होता है जैसे आग की लपटें जोड़ में लग रही हों।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 20, 2026 19:13 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Apr 20, 2026 19:13 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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