Sun Sep 13, 2026 | 03:28 PM IST

Medically Reviewed by Dr Gopal Jee Sharma , Sr. Consultant – Internal Medicine

बच्चों में कई हफ्तों तक Low-Grade Fever क्यों रहता है? क्या बिना इंफेक्शन भी हो सकता है ऐसा

बच्चों में लंबे समय तक हल्का बुखार हमेशा इंफेक्शन की वजह से नहीं होता है। डॉक्टर अम्बरीश दीक्षित का कहना है कि इसके पीछे सूजन, ऑटोइम्यून समस्या या अन्य स्वास्थ्य कारण भी हो सकते हैं।

बच्चों में हल्का बुखार यानी लो-ग्रेड फीवर होना अक्सर वायरल इंफेक्शन या मौसम में बदलाव से जुड़ा माना जाता है, लेकिन जब यही बुखार कई हफ्तों तक बना रहे और जांच में किसी इंफेक्शन का पता न चले, तो यह पेरेंट्स के लिए चिंता का विषय बन जाता है। ऐसे में केवल थर्मामीटर पर तापमान देखकर घबराने की बजाय इसके पीछे की वजह को समझना ज्यादा जरूरी है।

कैलाश अस्पताल, देहरादून के सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, हर लंबे समय तक रहने वाला लो-ग्रेड फीवर किसी इंफेक्शन का संकेत नहीं होता। कई बार शरीर के इम्यून सिस्टम का रिएक्शन, सूजन संबंधी समस्याएं, कुछ दवाओं का असर, हार्मोनल बदलाव या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी बच्चों में हल्के बुखार का कारण बन सकती हैं।

क्या बच्चों को बिना इंफेक्शन के बुखार हो सकता है?

डॉ. गोपाल जी शर्मा बताते हैं कि कुछ बच्चों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम के रिएक्शन, ऑटोइम्यून बीमारियां, एलर्जी संबंधी समस्याएं, लंबे समय तक चलने वाली सूजन यानी क्रॉनिक इंफ्लेमेशन, कुछ दवाओं के नुकसान या हार्मोनल बदलाव भी हल्के बुखार का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, कुछ बच्चों में ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी, गर्मी या शरीर के तापमान को कंट्रोल करने की प्रोसेस में बदलाव के कारण भी हल्का तापमान बना रह सकता है। हालांकि, यदि बुखार दो से तीन सप्ताह से ज्यादा समय तक लगातार बना रहे, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

  • यदि बच्चे में इंफेक्शन नहीं पाया जाता, तो डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री और फिजिकल हेल्थ चेकअप के आधार पर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।
  • इसमें ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, एक्स-रे या जरूरत पड़ने पर अन्य टेस्ट शामिल हो सकते हैं।
  • डॉक्टर गोपाल जी शर्मा के अनुसार, कुछ मामलों में थायराइड संबंधी समस्याएं, जुवेनाइल इडियोपैथिक अर्थराइटिस, ऑटोइम्यून डिजीज या दुर्लभ बीमारियां भी लंबे समय तक हल्के बुखार की वजह बन सकती हैं।
  • इसलिए बिना कारण जाने बार-बार एंटीबायोटिक देना सही नहीं है, क्योंकि इससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है।

साल 2024 में Children Journal में प्रकाशित स्टडी से पता चलता है कि बच्चों में बुखार का मुख्य कारण अक्सर कोई न कोई इंफेक्शन ही होता है, हालांकि कई मामलों में इसके सटीक रोगाणु का पता नहीं चल पाता। आमतौर पर देखा गया है कि अगर खून में लिम्फोसाइट्स का लेवल ज्यादा है, तो बुखार का कारण वायरल इंफेक्शन होता है। वहीं दूसरी ओर, बिना किसी इंफेक्शन वाले बुखार (Non-Infective Fever) को पहचानने के लिए कुछ मुख्य संकेत सामने आए हैं। इनमें बच्चे की उम्र ज्यादा होना, परिवार में समय-समय पर बुखार आने का इतिहास, 8 दिनों से ज्यादा बुखार रहना और अस्पताल में ज्यादा दिन भर्ती रहना शामिल है।

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can low grade fever

इसके अलावा, यदि लैब जांच में खून की कमी, प्लेटलेट्स की अधिकता, बढ़ा हुआ CRP व फेरिटिन और सोडियम का कम लेवल मिले, तो यह गैर-संक्रामक बुखार (Non-infectious fever) की ओर इशारा करता है। आंकड़े यह भी साबित करते हैं कि डॉक्टर बच्चों के बुखार को कम करने के लिए पैरासिटामोल को ही सबसे बेहतर और सुरक्षित दवा मानते हैं।

बच्चों में लो-ग्रेड फीवर होने पर क्या करें?

डॉ. गोपाल जी शर्मा का कहना है कि यदि बच्चे का तापमान हल्का बढ़ा हुआ है और वह सामान्य रूप से खेल रहा है, खाना खा रहा है और एक्टिव है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बच्चे को पर्याप्त पानी, पौष्टिक भोजन और पर्याप्त आराम दें, तापमान की नियमित निगरानी करें और बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार दवाएं न दें। डॉक्टर गोपाल जी शर्मा सलाह देते हैं कि यदि बुखार लंबे समय तक बना रहे, बार-बार लौटकर आए या अन्य लक्षणों के साथ हो, तो स्वयं इलाज करने के बजाय एक्सपर्ट से सलाह लेना सबसे सही तरीका है।

निष्कर्ष

बच्चों में बिना इंफेक्शन के भी कई हफ्तों तक लो-ग्रेड बुखार रह सकता है, लेकिन इसे सामान्य मानकर अनदेखा करना सही नहीं है। इसके पीछे इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी, ऑटोइम्यून डिजीज, सूजन संबंधी समस्याएं, हार्मोनल बदलाव या अन्य कारण हो सकते हैं। डॉक्टर गोपाल जी शर्मा के अनुसार, यदि हल्का बुखार लंबे समय तक बना रहे या उसके साथ अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई दें, तो समय पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

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FAQ

  • बच्चों के दांत निकलते समय बुखार आता है क्या?

    दांत निकलने के समय शरीर का तापमान हल्का बढ़ सकता है, लेकिन कई हफ्तों तक लगातार बुखार रहना सामान्य नहीं माना जाता। 
  • क्या बार-बार तापमान मापने से गलत रीडिंग मिल सकती है?

    थर्मामीटर का गलत उपयोग, अलग-अलग तरीके से तापमान मापना या गर्मी के कारण तुरंत जांच करने से रीडिंग प्रभावित हो सकती है।
  • क्या लो-ग्रेड फीवर अपने आप ठीक हो सकता है?

    कई बार हल्का बुखार अपने आप ठीक हो सकता है लेकिन अगर बुखार लंबे समय तक बना रहे या बार-बार लौटे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 29, 2026 22:28 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
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