Sun Oct 11, 2026 | 01:28 PM IST

Medically Reviewed by Dr Gopal Jee Sharma , Sr. Consultant – Internal Medicine

बुखार नहीं फिर भी लग रही है ठंड और कंपकंपी? फिजीशियन से जानें कारण

बुखार होने पर कई लोगों को ठंड महसूस होती है लेकिन अगर बुखार के बिना ठंड लगती है तो इसके कई कारण हो सकते हैं, बिना बुखार के ठंड लगना कमजोरी, तनाव, लो ब्लड शुगर, एनीमिया, डिहाइड्रेशन या थायराइड जैसी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
बुखार नहीं फिर भी लग रही है ठंड और कंपकंपी? फिजीशियन से जानें कारणबुखार नहीं फिर भी लग रही है ठंड और कंपकंपी? फिजीशियन से जानें कारण

जब किसी व्यक्ति को अचानक ठंड लगने लगे या शरीर में कंपकंपी महसूस हो, तो आमतौर पर लोग इसे बुखार की शुरुआत मान लेते हैं लेकिन कई बार थर्मामीटर पर तापमान बिल्कुल सामान्य होता है, फिर भी व्यक्ति को ठंड से राहत नहीं मिलती। ऐसी स्थिति अक्सर लोगों को कंफ्यूज कर देती है। कई लोग इसे मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ मामलों में यह शरीर के भीतर चल रहे किसी स्वास्थ्य बदलाव का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

कैलाश अस्पताल, देहरादून के सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, बिना बुखार के ठंड लगने को केवल एक साधारण लक्षण मानना सही नहीं है। कई बार यह पोषण की कमी, हार्मोनल असंतुलन, ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव, ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा कर सकता है। इसलिए यदि यह परेशानी बार-बार हो रही है, तो इसके पीछे की वजह जानना जरूरी है, न कि केवल गर्म कपड़े पहनकर इसे अनदेखा करना।

बिना बुखार के कंपकंपी क्यों होती है?

डॉक्टर गोपाल जी शर्मा बताते हैं, ''शरीर का तापमान कंट्रोल करने का काम दिमाग और हार्मोन मिलकर करते हैं। जब किसी कारण से शरीर का तापमान सामान्य सीमा से नीचे महसूस होने लगता है या शरीर को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिलती, तो कंपकंपी शुरू हो सकती है। यह कंपकंपी शरीर का नेचुरल तरीका है, जिससे मसल्स तेजी से काम करके गर्मी पैदा करती हैं। इसलिए हर बार ठंड लगने का मतलब इंफेक्शन या बुखार होना जरूरी नहीं होता।''

1. एनीमिया

डॉक्टर गोपाल जी शर्मा के अनुसार, यदि शरीर में आयरन की कमी के कारण एनीमिया हो जाए, तो शरीर के टिश्यू तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसका असर शरीर की एनर्जी और तापमान कंट्रोल पर भी पड़ सकता है। ऐसे लोगों को बिना बुखार के भी ठंड ज्यादा महसूस हो सकती है। इसके साथ कमजोरी, चक्कर आना, थकान और सांस फूलना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में ब्लड टेस्ट के जरिए एनीमिया की जांच कराना जरूरी होता है।

2. थायराइड

हाइपोथायराइडिज्म यानी थायराइड हार्मोन का कम बनना भी बिना बुखार के ठंड लगने का एक कारण हो सकता है। इस स्थिति में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे गर्मी कम होती है और व्यक्ति को सामान्य मौसम में भी ज्यादा ठंड महसूस हो सकती है। इसके साथ वजन बढ़ना, स्किन का ड्राई होना, कब्ज और लगातार थकान जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

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3. लो ब्लड शुगर और डिहाइड्रेशन

डॉक्टर गोपाल जी शर्मा के अनुसार, यदि लंबे समय तक भोजन न किया जाए या ब्लड शुगर अचानक कम हो जाए, तो शरीर में कंपकंपी और ठंड महसूस हो सकती है। खासकर डायबिटीज के मरीजों में यह स्थिति ज्यादा देखने को मिलती है। इसके अलावा शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी शरीर के तापमान को प्रभावित कर सकता है। इसलिए समय पर भोजन करना और पर्याप्त मात्रा में लिक्विड लेना जरूरी है।

साल 2019 में BMC Anesthesiology में प्रकाशित रिसर्च में पाया गया कि ब्लड शुगर और शरीर में कंपकंपी शुरू होने के बीच एक सीधा संबंध होता है। जब ब्लड शुगर बहुत कम (हाइपोग्लाइसीमिया) से सामान्य लेवल की ओर बढ़ता है, तो कंपकपी की सीमा में बदलाव आता है। सबसे जरूरी बात यह है कि ब्लड शुगर में गिरावट का कंपकंपी की सीमा पर असर पड़ता है, यह असर शुगर के सामान्य से ज्यादा होने (हाइपरग्लाइसीमिया) पर पड़ने वाले प्रभाव की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा पाया गया।

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4. तनाव और चिंता

मानसिक तनाव और एंग्जायटी केवल मेंटल हेल्थ को ही नहीं, बल्कि शरीर पर भी असर डालते हैं। तनाव के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे कुछ लोगों को ठंड लगना, कंपकंपी, पसीना आना या दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। यदि यह समस्या तनाव होने पर ज्यादा होती है, तो मेंटल हेल्थ पर भी ध्यान देना जरूरी है।

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इस समस्या से बचाव के लिए क्या करें?

डॉक्टर गोपाल जी शर्मा का कहना है कि बिना बुखार के ठंड लगने से बचने के लिए बैलेंस डाइट लेना, पर्याप्त पानी पीना, नियमित एक्सरसाइज करना और समय पर भोजन करना जरूरी है। आयरन, विटामिन बी12 और अन्य जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर भोजन शरीर को हेल्दी रखने में मदद करता है।

यदि पहले से थायराइड, डायबिटीज या अन्य कोई बीमारी है, तो उसकी दवाएं नियमित रूप से लेना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराते रहना भी जरूरी है।

डॉक्टर से संपर्क कब करना चाहिए?

यदि बिना बुखार के ठंड लगने की समस्या बार-बार हो रही है, लंबे समय तक बनी रहती है या इसके साथ वजन कम होना, ज्यादा कमजोरी, बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर ब्लड टेस्ट, थायराइड जांच या अन्य जरूरी टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।

निष्कर्ष

बिना बुखार के ठंड लगना हमेशा सामान्य बात नहीं होती। कई बार यह एनीमिया, थायराइड की समस्या, लो ब्लड शुगर या मानसिक तनाव जैसी स्थितियों का संकेत हो सकता है। यदि यह समस्या कभी-कभार होती है, तो लाइफस्टाइल में सुधार से राहत मिल सकती है, लेकिन यदि यह बार-बार हो रही है या इसके साथ अन्य गंभीर लक्षण भी मौजूद हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से सलाह लेकर सही कारण का पता लगाना और उचित इलाज करना जरूरी होता है।

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FAQ

  • क्या कम वजन वाले लोगों को ज्यादा ठंड लग सकती है?

    जिन लोगों के शरीर में फैट (Body Fat) कम होता है, उन्हें शरीर की गर्मी बनाए रखने में दिक्कत हो सकती है और वे सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा ठंड महसूस कर सकते हैं।
  • क्या ठंड लगने पर एंटीबायोटिक लेनी चाहिए?

    बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना सही नहीं है। डॉक्टर की सलाह अनुसार आप एंटीबायोटिक का का सेवन करें।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 31, 2026 22:22 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Gopal Jee Sharma