Fri Sep 11, 2026 | 08:19 PM IST

Medically Reviewed by Dr Naveen Polavarapu , Gastroenterologist

सर्दियों में एसिडिटी? इन 6 चीजों के सेवन से पाएं राहत, एक्‍सपर्ट से जानें फायदे

सर्दि‍यों में हेल्‍दी डाइट को चुनकर आप एस‍िड‍िटी की समस्‍या से न‍िजात पा सकते हैं। एस‍िड‍िटी को कम करने के ल‍िए सब्‍ज‍ियां, ओट्स, अनाज, हर्बल टी जैसे कुछ हेल्‍दी व‍िकल्‍पों को चुनें और पेट को आराम दें। 

सर्दि‍यों का मौसम पाचन को धीमा कर देता है। इस दौरान लार का उत्‍पादन कम होता है। सर्दि‍यों में लोगों को भारी और मसालेदार खाने की इच्‍छा होती है, जो एस‍िड र‍िफ्लक्‍स की समस्‍या का कारण बनती है। हालांक‍ि हेल्‍दी डाइट को चुनकर आप पेट को आराम दे सकते हैं और एस‍िड‍िटी से बच सकते हैं। पाचन की समस्‍याओं से राहत के ल‍िए ऐसी चीजों का सेवन करना चाह‍िए जो आसानी से पच जाएं। इस लेख में हम छह ऐसी चीजों के बारे में जानेंगे ज‍िनका सेवन करने से सर्दि‍यों में एस‍िड‍िटी की समस्‍या से बच सकते हैं। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Naveen Polavarapu, Senior Consultant, Medical Gastroenterologist, Liver Specialist, Lead, Advanced Endoscopic Interventions & Training, Clinical Director, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

1. हर्बल चााय का सेवन करें- Choose Herbal Tea

fennel-tea-benefits

सर्दि‍यों में एस‍िड‍िटी से बचने के ल‍िए हाइड्रेशन जरूरी है। सौंंफ, अदरक या कैमोमाइल टी प‍िएं। ये एस‍िड‍ के स्राव को रोकते हैं। कैफीन, चॉकलेट या तले हुए खाने से बचें। कम खाना खाएं और उसे सीधे बैठकर खाएं। रात में बेड का स‍िरहाना छह से आठ इंच ऊपर रखकर सोएं।

यह भी पढ़ें- Pudina Vs Dhaniya: सीने में जलन और एसिडिटी में क्या है कारगर? जानें और तब करें इस्तेमाल

2. ओट्स और साबुत अनाज खाएं- Eat Oats And Whole Grains

Dr. Naveen Polavarapu ने बताया क‍ि एस‍िड‍िटी से बचने के ल‍िए एक बाउल केले या सेब के साथ ओटमील खाएं। इससे शरीर को घुलनशील फाइबर म‍िलता है जो पेट के अत‍िर‍िक्‍त एस‍िड को सोख लेता है और पाचन को आसान बनाता है। ओट्स का बीटा-ग्‍लूकन भोजन नली में एक सुरक्षा परत बनाता है जो सर्दि‍यों में पेट की समस्‍याओं से न‍िजात द‍िलाता है।

यह भी पढ़ें- एसिडिटी या पित्त की पथरी? डॉक्टर ने बताया क्यों Pancreatic Cancer के लक्षणों को पहचानने में होती है देर

3. खट्टे फल न खाएं- Avoid Citrus Fruits

सर्दि‍यों में खरबूजा, पपीता, नाशपाती जैसे खट्टे फलों का सेवन न करें। ये कम एस‍िड वाले फल होते हैं ज‍िनमें एंजाइम भरपूर मात्रा में होता है। पपीते में मौजूद पपैन प्रोटीन को ब्रेक करने में मदद करता है ज‍िससे एस‍िड जमा नहीं होता। संतरे या अनानास का सेवन करने से भी बचें। इसके बजाय बेक्‍ड नाशपाती खाएं क्‍योंक‍ि इसे पकाने से जलन पैदार करने की क्षमता कम हो जाती है।

यह भी पढ़ें- लगातार एसिडिटी होना क्यों नहीं है सही? जानें किन बीमारियों का है ये संकेत

4. सर्दि‍यों में सब्‍ज‍ियों को प्राथम‍िकता दें- Give Priority To Vegetables In Winters

carrot-benefits

Dr. Naveen Polavarapu ने बताया क‍ि सर्दि‍यों में सब्‍जि‍यों का सेवन करें गाजर, पालक और स्‍टीम्‍ड ब्रोकली का सेवन करें, इनमें मैग्नीशियम और पोटैशियम मौजूद होता है ज‍िसस‍े एस‍िड र‍िफ्लक्‍स की समस्‍या दूर होती है। शकरकंद जैसी जड़ वाली सब्‍ज‍ियां खाएं। शकरकंद को भूनकर या मैशकर खाएं। ये पीएच लेवल को स्‍थ‍िर रखती हैं।

यह भी पढ़ें- क्या ज्यादा अदरक-तुलसी चाय पीने से एसिडिटी हो सकती है? जानें एक दिन में कितना मात्रा का करना चाहिए सेवन

5. डेयरी प्रोडक्‍ट्स का सेवन करें- Consume Dairy Products

एस‍िड‍िटी से बचने के ल‍िए डेयरी व‍िकल्‍पों का सेवन करें। बादाम का दूध, कम फैट वाला दही खाएं। दही प्रोबायोट‍िक से भरपूर होता है। यह पेट की अंदरूनी परत को आराम देता है। अदरक के साथ ग्रीक दही का सेवन करें। इससे पेट की सूजन शांत होती है। अदरक एस‍िड र‍िफ्लक्‍स की समस्‍या को दूर करता है।

यह भी पढ़ें- मेरा अनुभव: रात को एक कटोरी खिचड़ी ने दूर की ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या, पढ़ें आयुर्वेदाचार्य की सलाह

6. लीन प्रोटीन को चुनें- Choose Lean Protein

Dr. Naveen Polavarapu ने बताया क‍ि सर्दि‍योंं में एस‍िड‍िटी से बचने के ल‍िए लीन प्रोटीन का सेवन करें। ग्रि‍ल्‍ड च‍िकन, मछली या टोफू को डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएंं। लीन प्रोटीन का सेवन करने से पेट में भारीपन महसूस नहीं होता। इसके अलावा खाने के बाद सौंंफ चबाएंं, उसमें मौजूद एनेथॉल कंपाउंड जीआई मांसपेश‍ियों को आराम देता है।

न‍िष्‍कर्ष:

सर्दि‍यों में एस‍िड‍िटी से बचने के ल‍िए इन चीजों को डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएं। इससे मरीजों को हफ्तेभर में राहत म‍िलेगी। लगातार समस्‍या बनी रहे, तो डॉक्‍टर से सलाह लें। जरूरत होने पर डॉक्‍टर एंडोस्‍कोपी या पीपीआई थेरेपी की सलाह देते हैं।

उम्‍मीद करते हैं क‍ि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इस लेख को शेयर करना न भूलें।

FAQ

  • सर्दि‍यों में एस‍िड‍िटी क्‍यों होती है?

    सर्दि‍यों में पानी का सेवन कम करने, तला-भुना ज्‍यादा खााने या शारीर‍िक गत‍िव‍िध‍ि की कमी के कारण पाचन धीमा हो जाता है और पेट में एस‍िड का लेवल बढ़ने लगता है ज‍िससे एस‍िड‍िटी होती है।
  • सर्दि‍यों में एस‍िडि‍टी के लक्षण क्‍या हैं?

    खट्टी डकार आना, गैस, मतली, गले में जलन, उल्‍टी, सीने में जलन वगैरह एस‍िड‍िटी के लक्षण हैं। सर्दि‍यों में यह समस्‍या और भी ज्‍यादा बढ़ जाती है।
  • एस‍िड‍िटी दूर करने के लि‍ए क्‍या प‍िएं?

    एस‍िड‍िटी को दूर करने के ल‍िए गुनगुना पानी, सौंफ-अजवाइन का पानी, नार‍ियल पानी, छाछ, अदरक की चाय जैसे ड्र‍िंक्‍स का सेवन कर सकते हैं। इससे पेट की जलन दूर होती है।

Read Next

Pudina Vs Dhaniya: सीने में जलन और एसिडिटी में क्या है कारगर? जानें और तब करें इस्तेमाल

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jan 16, 2026 17:27 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jan 16, 2026 17:27 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jan 16, 2026 17:27 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Naveen Polavarapu

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content