Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma

मेरा अनुभव: रात को एक कटोरी खिचड़ी ने दूर की ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या, पढ़ें आयुर्वेदाचार्य की सलाह

Light Dinner Remedy: मुझे रोज रात को एसिडिटी और ब्लोटिंग की समस्या होना बहुत ही आम हो गई थी। इस समस्या को खत्म करने के लिए मैंने खिचड़ी और सूप को डिनर में शामिल किया। क्या खिचड़ी या सूप हर किसी को फायदेमंद हो सकता है? इस बारे में डॉ. श्रेय ने विस्तार से लेख में बताया है, आप भी पढ़ें।
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मेरा अनुभव: रात को एक कटोरी खिचड़ी ने दूर की ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या, पढ़ें आयुर्वेदाचार्य की सलाह

Khichdi in Dinner: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट की समस्याएं जैसे ब्लोटिंग, गैस, एसिडिटी और रात को पेट भारी होना आम है। कई लोग रात को भारी खाना खा लेते हैं और फिर रातभर परेशान होते हैं। कई बार लोगों को नींद नहीं आती और इस वजह से अगला दिन भी खराब हो जाता है। कुछ ऐसा ही मेरे साथ हो रहा था। रोजाना देर से पेटभर खाने से मुझे रात को एसिडिटी की समस्या बहुत ज्यादा होने लगी थी। मेरी जैसी समस्या से कई लोग जूझते होंगे, लेकिन मैंने इस समस्या से निजात पाने के लिए एक आसान तरीका ढ़ूंढा और मेरे लिए यह उपाय काफी कारगर साबित हुआ। इस लेख में मैंने अपना रात के खाने का प्लान बताया है और इस बारे में हमने हरियाणा के सिरसा में स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से बात की। उन्होंने रात में खिचड़ी खाने के फायदे और नुकसान बताए हैं।


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रात में एसिडिटी की समस्या

रात में ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या मुझे करीब साल 2019 से हो रही थी, लेकिन मैंने इसे काम के प्रेशर के कारण होने वाली थकान और नार्मल गैस समझा। कभी-कभी लगता था कि शायद मैंने भारी खाना खा लिया है, इस वजह से एसिडिटी हो रही है और कोविड के दौरान तो समस्या काफी गंभीर हो गई क्योंकि कोविड के समय पूरा दिन घर बैठकर काम करने से फिजिकल एक्टिविटी काफी कम हो गई थी। इस समय स्क्रीन टाइम भी बढ़ गया था और डिनर के बाद पेट का भारीपन अब रोज महसूस होने लगा था।

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गॉल ब्लैडर सर्जरी होना तो वजह नहीं?

दरअसल, साल 2013 में मेरी गॉल ब्लैडर की सर्जरी हुई थी। सर्जरी के बाद कई साल तक कोई बड़ी दिक्कत नहीं आई थी, लेकिन समय के साथ, खासतौर पर रात के खाने के बाद पेट फूलना, ब्लोटिंग और कभी-कभी एसिडिक फील होने लगा था। कोविड में जब समस्या बहुत बढ़ गई, तो मुझे इस बात का डर लगने लगा था कि कहीं गॉल ब्लैडर रिमूवल के कारण कोई अंदरूनी समस्या तो नहीं बन रही, मैंने एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड भी कराया। राहत की बात यह थी कि रिपोर्ट नॉर्मल थी। लेकिन परेशानी बनी हुई थी। साथ ही वजन भी धीरे-धीरे बढ़ रहा था। जब डॉक्टर से बात की, तो उन्होंने सलाह दी कि रात का खाना हल्का रखों। फिर साल 2021 में मैंने बड़ा फैसला लिया कि अब मैं रात को सिर्फ खिचड़ी या सूप ही लूंगी और फिर इसके बाद मैंने खिचड़ी को अपनी डिनर रूटीन बना लिया।

खिचड़ी खाने का तरीका

मैं खिचड़ी की एक मीडियम साइज की कटोरी ही लेती हूं। खिचड़ी में थोड़े से चावल और अच्छी मात्रा में मूंग दाल डालती हूं। साथ ही मैं इस बात का ध्यान रखती हूं कि मैं रात 8 बजे से पहले खिचड़ी खा लूं और छुट्टी के दिन यह समय शाम के 6 बजे का हो जाता है। इसके बाद मैं कुछ भी नहीं खाती। हालांकि शुरुआत आसान नहीं थी, सच कहूं तो शुरू के कुछ हफ्ते बहुत मुश्किल थे। देर रात ऐसा लगता था कि पेट भरा ही नहीं है। कई बार मन करता था कुछ और खा लूं, लेकिन मैं अपनी डाइट को लेकर सख्त रही। फिर धीरे-धीरे शरीर ही ऐसा बन गया।

खिचड़ी खाने से क्या फर्क महसूस हुआ

आज साल 2026 की शुरुआत हो चुकी है और मैं काफी हद तक इसी आदत पर कायम हूं। इस डाइट से मेरी रात को ब्लोटिंग पूरी तरह खत्म हो गई। अब पेट भारी नहीं लगता, नींद गहरी और समय पर आने लगी और सुबह अपने आप आंख खुल जाती है। पहले जो हल्की-हल्की एसिडिटी महसूस होती थी, वो भी अब नहीं होती। मैं रोज सुबह उठकर खाली पेट एक या दो गिलास नार्मल पानी पीती हूं और दिन की शुरुआत करती हूं।

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रात को खिचड़ी काफी फायदेमंद होती है - डॉ. श्रेय शर्मा

डॉ. श्रेय कहते हैं, “खिचड़ी को आयुर्वेद में सबसे हल्का और सुपाच्य भोजन माना गया है। मूंग दाल और चावल का कॉम्बिनेशन पेट पर बोझ नहीं डालता, पाचन अग्नि को शांत रखता है, गैस और एसिडिटी को बढ़ने नहीं देता। रात के समय जब शरीर खुद को रिपेयर करता है, तब हल्का खाना डाइजेशन सिस्टम को आराम देता है। इसलिए जो लोग रात में खिचड़ी खाते हैं, उन्हें पेट काफी हल्का महसूस होता है।”

क्या हर कोई यह डाइट फॉलो कर सकता है?

डॉ. श्रेय शर्मा जोर देते हुए कहते हैं, “ अगर कोई व्यक्ति रात में खिचड़ी या सूप जैसा हल्का भोजन ले रहा है और फिर 12 से 16 घंटे तक कुछ नहीं खाता, तो यह इंटरमिटेंट फास्टिंग के दायरे में आता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग में शरीर जमा हुई कैलोरी को जलाने लगता है, जिससे वजन कम हो सकता है, ब्लोटिंग घटती है, मेटाबॉलिज्म सुधरता है, लेकिन यह सबके लिए नहीं है। यह तरीका कफज प्रकृति के मोटे, भारी शरीर वाले, कम फिजिकल एक्टिविटी वाले लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद है। जो लोग बहुत दुबले हैं, वातिक प्रकृति के हैं या पहले से कमजोर हैं, उनके लिए यह तरीका नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे लोगों में वात बढ़ सकता है, मसल लॉस हो सकता है और कमजोरी बढ़ सकती है। इसलिए किसी भी तरह की डाइट फॉलो करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।”

खिचड़ी या सूप डिनर में लेने से पहले ध्यान रखें

डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, इस तरह की डाइट अपनाने से पहले इन बातों पर गौर करना जरूरी है।

  1. आपकी बॉडी स्ट्रेंथ कैसी है
  2. आप कितनी कैलोरी बर्न करते हैं
  3. आपकी वर्क प्रोफाइल क्या है
  4. आप किस सीजन में यह डाइट फॉलो कर रहे हैं
  5. जो लोग बहुत हैवी फिजिकल वर्क करते हैं, लेबर क्लास से हैं, उनके लिए यह पैटर्न अलग तरह से काम करता है।

मेरी सलाह

मेरा मानना है कि हर शरीर अलग होता है। मेरे लिए रात की खिचड़ी फायदेमंद साबित हुई, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर किसी को यही करना चाहिए। डॉ. श्रेय कहते हैं कि अपने शरीर की सुनें, किसी एक्सपर्ट की सलाह लें और डाइट में धीरे-धीरे बदलाव करें। खिचड़ी हर किसी के लिए फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए इसे ट्रेंड की तरह नहीं, बल्कि सोच-समझकर अपनाना चाहिए।

 

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FAQ

  • क्या रात में खिचड़ी खाना ठीक है?

    मूंग दाल की खिचड़ी या गर्म सूप का हल्का खाना डाइजेशन को सही रखता है, पेट फूलने से बचाता है और अच्छी नींद सुनिश्चित करता है ।
  • अगर मैं रोज खिचड़ी खाऊं तो क्या होगा?

    खिचड़ी रेगुलर खाने से कब्ज की शिकायत दूर हो सकती है। इतना ही नहीं, दलिया वजन कम करने में भी इस्तेमाल हो सकता है। इसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है। इससे आप ओवरईटिंग करने से बच जाते हैं और वजन कंट्रोल में रहता है।
  • क्या एसिडिटी में खिचड़ी खा सकते हैं?

    जब एसिडिटी लगातार बनी रहती है, तो खिचड़ी पेट की परत को आराम पहुंचाने और डाइजेशन सिस्टम सही रखता है। एसिडिटी से राहत दिलाने में खिचड़ी में मसालेदार सामग्री डालने से बचना चाहिए।

 

 

 

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  • Current Version

  • Jan 02, 2026 16:38 IST

    Published By : Aneesh Rawat

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