खानपान की अच्छी आदतें हम सबको स्वस्थ रखती हैं और लंबे समय तक जवां बने रहने में मदद भी करती हैं। कई लोग अपनी डाइट को लेकर काफी संजीदा होते हैं। वे विशेषज्ञ की सलाह पर ही सही डाइट फॉलो करते हैं, ताकि उन्हें जरूरी पोषक तत्व मिल सके और शरीर में किसी तरह से इनकी कमी न हो। बहरहाल, अपने स्वास्थ्य को लेकर सामान्य चिंता करना अच्छी बात है। मगर जरा आप गौर करें कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि हर आप हर समय अपनी डाइट को लेकर परेशान रहते हैं? अगर ऐसा है, तो इस लेख को जरूर पढ़ें, क्योंकि हर समय हेल्दी डाइट को लेकर चिंतित होना ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा का संकेत हो सकता है। आइए, जानते हैं Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से जानते हैं इस बारे में।
ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा क्या है?
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ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा एक तरह का ईटिंग डिसऑर्डर है। इसमें व्यक्ति हर समय अच्छा और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने को लेकर चिंतित रहता है। उनकी चिंता इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि वह किसी मानसिक विकार में तब्दील हो जाती है। असल बात यह है कि ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा के कारण व्यक्ति में खानपान की आदतों को लेकर जुनून छा जाता है और उसे हर समय शुद्ध तथा शाकाहारी खाने की चिंता सताती रहती है। ऐसा व्यक्ति वजन कम करने की चाहत में नहीं, बल्कि अंदर से खुद को शुद्ध रखने की चाह में करता है। न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी समझाती हैं, "ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा के मरीज वजन घटाने या दुबला होने के लिए खाना नहीं छोड़ते, बल्कि उनके मन में यह डर होता है कि अगर उसने बाहर का, पैकेट का या जरा सा भी तेल-मसाले वाला खाना खाया, तो उसका शरीर टॉक्सिक हो सकता है। ऐसे लोग हर भोजन को केमिकल, पेस्टिसाइड (कीटनाशक) और कृत्रिम चीजों से मुक्त देखना चाहता है।"
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ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा के नुकसान
1. कुपोषण और अंगों की कमजोरीः शुद्ध खाने के चक्कर में ऑर्थोरेक्सिया से पीड़ित लोग फैट, काब्र्स या डेयरी जैसे खाद्य पदार्थ से ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा के मरीज पूरी तरह दूर हो जाते हैं। ऐसे में उनके शरीर में विटामिन, मिनरल्स और जरूरी पोषक तत्वों की भारी कमी हो जाती है। लंबे समय खाने की यह चिंता ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा के मरीजों में हड्डियां कमजोर (ऑस्टियोपोरोसिस) हो जाती हैं, मांसपेशियां घटने लगती हैं और शरीर के जरूरी अंग (जैसे दिल और किडनी) के काम करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
2. हार्मोनल असंतुलनः ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा के कारण शरीर को पर्याप्त कैलोरी और सही पोषण नहीं मिल पाता है। ऐसे में शरीर सिर्फ कुपोषित नहीं होता है, बल्कि हार्मोनल असंतुलन भी होने लगता है। इसकी वजह से महिलाओं के शरीर में पीरियड्स से जुड़ी समस्यांए होने लगती हैं। अगर ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा का इलाज न किया जाए, तो उनमें प्रजनन संबंधी समस्याएं भी शुरू हो जाती हैं।
3. कमजोर इम्यूनिटीः निश्चित रूप से जब शरीर को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है, इसके बजाय व्यक्ति लगातार खाने की चिंता करता रहता है कि कहीं वह गलती से अशुद्ध आहार का सेवन न कर ले। ऐसे में शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है, जिससे इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) इतनी कमजोर हो जाती है कि शरीर आम संक्रमणों और बीमारियों से भी नहीं लड़ पाता।
4. मानसिक समस्याएंः चूंकि, ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा एक तरह का ईटिंग डिसऑर्डर है और इसमें व्यक्ति हर समय खाने की शुद्धता को लेकर चिंतित रहता है। ऐसे में तनाव का स्तर बढ़ जाता है। वहीं शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जो कि ब्रेन फॉग (याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने में कमी), अत्यधिक थकान, एंग्जायटी (घबराहट) और डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक समस्याएं पैदा होने लगती हैं।
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निष्कर्ष
ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा ईटिंग डिसऑर्डर है, जिसकी वजह से मरीज को कई तरह की परेशानियां का सामना करना पड़ता है। इसमें मुख्य रूप से मरीज कुपोषित हो जाता है और शरीर में तरह-तरह के पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। यहां तक कि ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा के कारण इम्यूनिटी भी कमजोर हो जाती है, जिस वजह से व्यक्ति आसानी से संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं।
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FAQ
कैसे जानें आप जरूरत से ज्यादा हेल्थ-कॉन्शस हैं?
अगर आपको डाइट में थोड़ी सी भी चूक होते ही आपको गिल्ट होने लगे और एंग्जायटी का एहसास होता है, तो यह सही संकेत नहीं है। इसका मतलब है कि आप जरूरत से ज्यादा हेल्थ कॉन्शस हैं।ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा से कैसे निपटें?
ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा से निपटने के लिए बहुत जरूरी है कि आप इसके कारणों के बारे में जानें। इस संबंध में बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से संपर्क करें।
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Jun 29, 2026 19:56 IST
Modified By : Meera Tagore Jun 29, 2026 19:56 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dt Divya Gandhi