Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vijay S Dahiphale , Consultant Urologist, Andrologist & Sexologist

क्या लंबे समय से चल रही दवाओं का यौन इच्छा पर भी असर पड़ता है? बता रहे हैं डॉक्टर

क्या आप भी कोई दवा लंबे समय से ले रहे हैं? अगर हां, तो ध्यान रखें कि दवाओं का असर नेगेटिव असर यौन इच्छा पर पड़ता है। ऐसा क्यों होता है और किस तरह की दवाएं इसके लिए जिम्मेदार हैं? जानें, इस लेख में सभी जरूरी बातें।

जब हम लंबे समय तक कोई दवा लेते हैं, तो शरीर पर इसके नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। कई बार ये प्रभाव धीरे-धीरे विकसित होते हैं और सालों बाद इनका पता चलता है। बहरहाल, माना जाता है कि लंबे समय तक चल रही दवा का यौन इच्छा पर भी असर पड़ सकता है। सवाल है, क्या यह वाकई सच है? इस संबंध में एक्सपर्ट का मानना है कि कुछ दवाएं ऐसी हैं, जो कि यौन इच्छा के स्तर को कम कर सकती हैं। आइए, नवी मुंबई स्थित मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले से जानते हैं इस बारे में विस्तार से।

लंबे समय से चल रही दवाओं का यौन इच्छा पर असर

how long term medications affect libido and sex drive 01 (26)

डाॅ. विजय दहिफले स्पष्ट बताते हैं, "अगर कोई लंबे समय से दवा ले रहा है, तो इसका असर उनकी यौन इच्छा पर पड़ सकता है। हालांकि, वे किस तरह की दवा ले रहे हैं, यह बात भी मायने रखती है।" यहां हम जानेंगे कि लंबे समय से चल रही दवा का यौन इच्छा पर क्या असर पड़ता है-

1. हॉर्मोन के स्तर में कमी

Harvard Health Publishing के अनुसार, जब कोई दवा लंबे समय तक ली जाती है, तो इसका प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है। विशेषकर, हार्मोन के स्तर में कमी आने लगती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक दवा लेने के कारण शरीर में टेस्टोस्टेरोन या एस्ट्रोजन में गिरावट आने से यौन इच्छा कम हो जाती है। ऐसा महिला और पुरुष दोनों के साथ हो सकता है।

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2. न्यूरोट्रांसमीटर का ब्लॉक होना

कई ऐसी दवाएं हैं, जिनका सेवन करने से हमारे ब्रेन फंक्शन को सीधे प्रभावित करती है। इसमें विशेषकर एंटी-डिप्रेसेंट जैसी दवाएं शामिल हैं। इस संबंध में डाॅक्टर बताते हैं कि मेंटल हेल्थ में ली जानेवाली कई दवाएं दिमाग में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे रसायनों के काम करने के तरीके को बदलकर शरीर की कार्य-प्रणाली को प्रभावित करती हैं। 

यह प्रक्रिया सेक्शुअल डिजायर को बढ़ाने वाले डोपामाइन के स्तर को कम करती है तथा अल्फा-1 (रक्तवाहिकाओं और कुछ मांसपेशियों की सतह पर मौजूद छोटे स्विच, जो कि ब्लड फ्लो और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं) को ब्लॉक करके यौन अंगों तक रक्त के प्रवाह को सीमित कर देती है। नतीजतन, सेक्शुअल डिजायर कम हो जाती है और पुरुषों में इरेक्शन संबंधी समस्या भी होने लगती है।

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3. रक्त प्रवाह में कमी

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जैसा कि हमने कुछ देर पहले ही बताया है कि कुछ दवाएं डोपामाइन या सेरोटोनिन के स्तर और प्रभाव को कम कर देती है। ऐसे में पुरुष और महिला दोनों में सेक्शुअल इच्छा में कमी आती है। दरअसल, बेहतर यौन संबंध के लिए सही ब्लड फ्लो का होना बहुत जरूरी है। अगर पुरुषों में जननांग तक ब्लड फ्लो सही नहीं होता है, तो ऐसे में इरेक्शन की समस्या हो सकती है और इसमें चरम सुख प्राप्त करने में भी दिक्कतें आ सकती हैं।

4. थकान और मूड में बदलाव

कुछ दवाओं के कारण शरीर में थकान और मूड में बदलाव भी होता है। The World Journal of Men's Health - WJMH में प्रकाशित एक रिव्यू आर्टिकल के अनुसार, एंटीसाइकोटिक दवाएं लेने वाले मरीजों में यौन समस्याएं होना आम बात है। यह असल में दवा का साइड इफेक्ट है। यही कारण है कि कई मरीज इस दवा को लंबे समय तक नहीं लेते हैं। यह दवा उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर सकती है, जिससे उन्हें मूड स्विंग का सामना भी करना पड़ता है।

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कामेच्छा कम करने वाली दवाओं की श्रेणी

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ऐसा नहीं है कि सभी दवाएं कामेच्छा के स्तर को कम करती है। हालांकि, कुछ विशेष दवाओं की श्रेणी है, जो सेक्शुअल प्लेजर को प्रभावित करती हैं, जैसे-

अवसादरोधी दवाएंः Harvard Health Publishing के अनुसार अवसाद कम करने के लिए कुछ दवाइयां ली जाती हैं, जिससे शरीर में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ जाता है। यह न्यूरोट्रांसमीटर यौन इच्छा को सुन्न कर सकती है और चरम सुख तक पहुंचने में भी बाधा डालती है। 

हार्मोन ट्रीटमेंट और गर्भनिरोधक गोलियांः कई पुरुष और महिलाएं अधिक उम्र में हार्मोन ट्रीटमेंट लेती हैं। वहीं, कुछ महिलाएं असमय प्रेग्नेंसी से बचने के लिए गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं। जब कोई लंबे समय तक इस तरह की दवाई लेता है, तो इसकी वजह से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में एस्ट्रोजन के संतुलन को बिगाड़ने लगती है। नतीजतन, यौन इच्छा अपने आप कम होने लगती है।

ब्लड प्रेशर की दवाएंः हर मरीज की स्थिति के अनुसार वह ब्लड प्रेशर की दवा लेता है। हालांकि, इसके डोज की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। अगर कोई लंबे समय तक ब्लड प्रेशर की दवा लेता है, तो इसकी वजह से ब्लड फ्लो का स्तर कम हो सकता है। ऐसे में नर्वस सिस्टम पर असर पड़ सकता है, जिससे यौन इच्छा के लिए एक्साइटमेंट महसूस नहीं होती है।

दवाओं के सेक्शुअल साइड इफेक्ट्स को कैसे कम करें?

अगर आपको लगे कि दवाओं के कारण सेक्शुअल हेल्थ पर असर पड़ रहा है, तो यहां बताई गई बातों को अमल में लाएं-

  • तुरंत डाॅक्टर से संपर्क कर अपनी समस्या के बारे में बताएं।
  • संभव हो, तो डाॅक्टर की सलाह पर अपनी दवा बदल दें।
  • डाॅक्टर से पूछकर अपनी दवा के डोज में परिवर्तन कर सकते हैं।
  • कुछ सपोर्टिव थेरेपी ले सकते हैं, जिससे यौन संबंध में सुधार हो सकता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि लंबे समय तक ली जाने वाली दवाएं अक्सर शरीर के किसी न किसी हिस्से को प्रभावित करती हैं। हालांकि, इसके लक्षण लंबे समय बाद नजर आते हैं। इसलिए, मरीजों को शुरू से अपने शरीर में नजर आ रहे किसी भी संकेत की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। अगर आप कभी भी सेक्शुअल डिजायर या लिबिडो के स्तर में कमी महसूस करें, तो तुरंत अपने डाॅक्टर से मिलकर समस्या के बारे में बताएं।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या डिप्रेशन या बीपी की दवाएं बंद किए बिना भी कामेच्छा में सुधार किया जा सकता है?

    डॉक्टर की सलाह से दवा की डोज में बदलाव करके इसके साइड इफेक्ट को कम किया जा सकता है।
  • दवाएं बंद करने के कितने समय बाद कामेच्छा दोबारा सामान्य होती है?

    दवा बंद करने या बदलने के 2 से 6 सप्ताह के भीतर शरीर का हार्मोनल और न्यूरोट्रांसमीटर स्तर सामान्य होने लगता है। हालांकि, मरीज की स्वास्थ्य स्थिति भी यह तय करती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Aug 11, 2026 18:32 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Aug 11, 2026 18:32 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Vijay S Dahiphale

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