Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vijay S Dahiphale , Consultant Urologist, Andrologist & Sexologist

पुरुषों में 40 की उम्र के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव का सेक्शुअल हेल्थ पर असर, समझें डॉक्टर से

40 साल की उम्र के बाद पुरुषों में हार्मोनल बदलाव होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसका उनकी सेक्शुअल हेल्थ पर असर पड़ता है, जैसे यौन इच्छा कम होने लगती है और इरेक्शन में भी कमी आने लगती है।

आमतौर पर हार्मोनल बदलाव की बात करते ही महिलाओं का जिक्र छिड़ जाता है, जबकि पुरुषों में भी हार्मोनल बदलाव होते हैं। विशेषकर, 40 साल की उम्र के बाद उनके शरीर में हार्मोनल बदलाव का प्रभाव देखने को मिलता है। विशेषज्ञों की मानें, तो 40 साल की उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव होता है और टेस्टोस्टेरोन का स्तर प्रति वर्ष एक फीसदी तक कम होता जाता है। 

सवाल है कि इसका उनके शरीर पर क्या असर पड़ता है? इसकी वजह से उनमें सेक्स ड्राइव कम हो सकती है और इरेक्शन से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं। आइए, जानते हैं कि 40 साल की उम्र के बाद पुरुषों में हार्मोनल बदलाव के बाद उनकी सेक्शुअल लाइफ पर और क्या असर पड़ता है? इस बारे में जानने के लिए हमने नवी मुंबई स्थित मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले से बात की।

40 साल की उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव का पुरुषों की सेक्शुअल लाइफ पर असर

hormonal changes and sexual health in men after forty 01 (25)

सेक्स ड्राइव में कमीः जैसा कि हमने पहले ही जिक्र किया है कि 40 साल की उम्र के बाद पुरुषों में प्रत्येक वर्ष टेस्टोस्टेरोन में एक फीसदी तक कमी आती है। मेयोक्लिनिक से भी इस बात की पुष्टि होती है और इसका असर उनकी सेक्स ड्राइव पर पड़ता है। यही कारण है कि 40 साल की उम्र के बाद पुरुषों में यौन इच्छा कम हो जाती है।

डॉ. विजय दहिफले यह भी समझाते हैं कि 40 साल की उम्र के बाद अगर किसी पुरुष में थायराइड फंक्शन में जरा भी बदलाव होता है, तो इसका सीधा-सीधा असर कोर्टिसोल पर पड़ता है। यह स्ट्रेस हार्मोन है। इसकी वजह से टेस्टोस्टेरोन प्रोडक्शन कम होने लगता है, जो कि पुरुषों के लिए सेक्स हार्मोन भी है।

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इरेक्शन में समस्याः 40 साल की उम्र के बाद जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, पुरुषों में इरेक्शन की समस्या भी होने लगती है। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 40 साल की उम्र के बाद पुरुष सेक्शुअली एक्टिव नहीं होते हैं। हां, यह बात सच है कि 40 साल की उम्र के बाद पुरुषों को इरेक्शन बनाने और बनाए रखने में मामूली समस्या होती है।

इसे सरल भाषा में समझें। चूंकि, 40 साल की उम्र के बाद हर साल एक फीसदी तक टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट आती है, तो इसकी वजह से हार्मोनल असंतुलन भी बढ़ने लगता है। नतीजतन, पुरुषों के शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड प्रोडक्शन कम हो जाता है और पेनिस में ब्लड सर्कुलेशन में अवरोध पैदा होता है। यही कारण है कि पुरुषों को 40 साल की उम्र के बाद से इरेक्शन की समस्या होने लगती है।

एनर्जी के स्तर में कमीः 40 साल की उम्र के बाद पुरुषों में एनर्जी का स्तर भी कम होने लगता है। इसमें भी टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट मुख्य वजह है। इसकी मदद से पुरुषों में स्टेमिना बढ़ता है, जो कि यौन संबंध में सुधार के लिए जरूरी है। एनर्जी में कमी के कारण अक्सर पुरुष सही तरह से सेक्शुअल रिलेशनशिप नहीं बना पाते हैं।

शारीरिक बदलावः Integris Health के अनुसार, 40 साल की उम्र के बाद पुरुषों में कई तरह के शारीरिक बदलाव होते हैं, जैसे हेयर फाॅल और बॉडी फैट का बढ़ना। ये समस्याएं भी टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी आने के कारण होती हैं। अक्सर बढ़ता वजन पुरुषों की सेक्शुअल लाइफ को प्रभावित करता है, क्योंकि इसकी वजह से उनमें सेक्स डिजायर कम हो जाती है और कुछ पुरुष अपनी बाॅडी इमेज को लेकर अधिक कॉन्शियस हो जाते हैं।

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40 साल की उम्र के बाद पुरुषों में यौन इच्छा में कमी के अन्य कारण

क्रम मुख्य कारण शारीरिक प्रक्रिया मुख्य प्रभाव
1.

रक्त प्रवाह से जुड़ी समस्याएं

बढ़ती उम्र के साथ रक्त वाहिकाएं संकुचित और सख्त होने लगती हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है।
  • इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (लिंग में तनाव की कमी)
  • दिल की सेहत पर असर और थकान
  • अंगों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन न पहुंचना
2. तनाव और मेंटल हेल्थ करियर, परिवार की जिम्मेदारियां और फाइनेंस का दबाव आदि। इन कारणों से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है।

मानसिक तनाव के कारण कोर्टिसोल का बढ़ना और इसकी वजह से टेस्टोस्टेरोन का स्तर का गिरना

3. जीवनशैली से जुड़ी आदतें खराब नींद, एक्सरसाइज न करना, गलत खान-पान, शराब/धूम्रपान करना और बढ़ता वजन
  • वजन/फैट बढ़ने से टेस्टोस्टेरोन का एस्ट्रोजन में बदलना
  • नींद की कमी से हार्मोन्स का असंतुलन होना
  • डायबिटीज और हाई बीपी का खतरा बढ़ना

40 साल की उम्र के बाद सेक्शुअल हेल्थ को कैसे सुधारें?

40 साल की उम्र के बाद कुछ प्राकृतिक परिवर्तन को रोका नहीं जा सकता है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि सेक्शुअल लाइफ को सुधारा नहीं जा सकता है। यहां बताए गए टिप्स इस संबंध में आपकी मदद करेंगे-

  1. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। इससे वजन संतुलित रहता है, ब्लड फ्लो में सुधार होता है और टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  2. 40 साल की उम्र के बाद हेल्दी डाइट लेना बहुत जरूरी है। इससे न सिर्फ वजन को बढ़ने से रोका जा सकता है, बल्कि मेटाबोलिक रेट में भी सुधार होता है।
  3. अगर आप नोटिस करें कि 40 साल की उम्र के बाद से ही आपकी सेक्शुअल डिजायर पूरी तरह खत्म हो गई है, तो इस संबंध में डाॅक्टर से मिलने में देरी न करें।
  4. 40 साल की उम्र के बाद अक्सर लोगों पर काम का दबाव अधिक होता है, जो कि उनमें तनाव के स्तर को बढ़ा देता है। पुरुषों को चाहिए कि वे तनाव को मैनेज करें, जिससे सेक्शुअल लाइफ में भी सुधार होगा।
  5. इस साल की उम्र के बाद स्वस्थ सेक्शुअल लाइफ के लिए पार्टनर के साथ खुलकर बात करें। इससे आपको फील गुड होता है और परफाॅर्मेंस एंग्जायटी या अन्य परेशानियां कम होने लगती हैं।

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निष्कर्ष

जिस तरह हम अपनी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोक नहीं सकते हैं, इसी तरह 40 साल की उम्र के बाद पुरुषों में होने वाले हार्मोनल बदलावों को भी रोका नहीं जा सकता है। हालांकि, 40 साल की उम्र के बाद टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर में गिरावट आती है, जिससे शरीर के सभी फंक्शंस पर असर पड़ता है। विशेषकर, पुरुषों की सेक्शुअल लाइफ पर इसका गहरा असर पड़ता है। हालांकि, सही जीवनशैली, अच्छी खान-पान की आदतें और नियमित रूप से एक्सरसाइज कर सेक्शुअल लाइफ को सुधारा जा सकता है।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • टेस्टोस्टेरोन का स्तर जांचने के लिए कौन सा ब्लड टेस्ट किया जाता है?

    इसके लिए टोटल टेस्टोस्टेरोन (Total Testosterone) और फ्री टेस्टोस्टेरोन (Free Testosterone) ब्लड टेस्ट कराया जाता है।
  • क्या 40 की उम्र के बाद टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) लेना सेफ होता है?

    TRT केवल उन्हीं पुरुषों को लेना चाहिए, जिनमें टेस्टोस्टेरोन का स्तर अत्यधिक कम है और इसकी पुष्टि ब्लड टेस्ट से हुई है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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