Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

हर समय हेल्दी खाने के पीछे रहते हैं ऑब्सेस्ड? ये है ‘Orthorexia’ का संंकेत, समझें क्या ये बीमारी है

ऑर्थोरेक्सिया एक कंडीशन है ज‍िसमें लोग हेल्‍दी खाने को लेकर बहुत पाबंद हो जाते हैं और सख्‍त डाइट फॉलो करने लगते हैं। इसका असर उनकी मानस‍िक और शारीर‍िक सेहत पर होता है।

हेल्‍दी खाना अच्‍छी बात है, लेक‍िन कहते हैं न कि‍ जब क‍िसी चीज की अति‍ हो जाती है, तो वह हान‍िकारक होती है। ठीक वैसे ही जरूरत से ज्‍यादा हेल्‍दी खाने का जुनून आपको बीमार बना सकता है। ऑर्थोरेक्सिया एक कंडीशन है ज‍िसमें व्‍यक्‍त‍ि हर समय हेल्‍दी खाने के बारे में सोचता रहता है और उसे हर समय अपनी सेहत की च‍िंता रहती है। इससे व्‍यक्‍त‍ि की शारीर‍िक और मानस‍िक सेहत पर बुरा असर पड़ता है। ऑर्थोरेक्सिया के लक्षण, कारण, इलाज जानने के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

ऑर्थोरेक्सिया क्‍या है?

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कई लोग हेल्‍दी खाने को लेकर बहुत ज्‍यादा च‍िंतन करते हैं, यह अच्‍छी आदत नहीं बल्‍क‍ि ऑर्थोरेक्सिया हो सकता है। यह आदत इसल‍िए भी खतरनाक है क्‍योंक‍ि लोग डाइट से जरूरी चीजों को धीरे-धीरे हटाने लगते हैं।

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ऑर्थोरेक्सिया के लक्षण क्‍या हैं?

  • कभी-कभी अनहेल्‍दी खाने पर भी अपराध करने जैसा महसूस करना इसका लक्षण हो सकता है।
  • हर समय हेल्‍दी खाने के बारे में सोचना और जरूरत से ज्‍यादा हेल्‍दी चीजों का सेवन करना।
  • खाने की मात्रा चेक करके खाना और हर वक्‍त डाइट की च‍िंता होना।
  • हेल्‍दी खाने के व‍िकल्‍प, कुक‍िंग का तरीका और इंग्रीड‍ि‍एंट्स को लेकर सख्‍त न‍ियम‍ बनाना।

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ऑर्थोरेक्सिया के कारण

  • एंग्जायटी या ऑब्सेसिव व्यवहार होना।
  • हर चीज को कंट्रोल में रखने की आदत।
  • गलत या अधूरी न्यूट्रिशन जानकारी को सच मान लेना।
  • ईट‍िंग ड‍िसऑर्डर का श‍िकार होना।
  • वजन बढ़ने या बीमार होने का ज्‍यादा डर होना।

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ऑर्थोरेक्सिया का इलाज कैसे किया जाता है?

  • योग, मेडिटेशन जैसी तकनीक से मन को शांत कर सकते हैं और इस समस्‍या से बाहर न‍िकल सकते हैं।
  • पर‍िवार और दोस्‍तोंं की मदद से सामान्‍य ईटि‍ंग पैटर्न बनाने में मदद म‍िलती है।
  • खाने के बारे में ज्‍यादा सोचने की समस्‍या को कंट्रोल करने के ल‍िए CBT थेरेपी की मदद ली जाती है।
  • डायटीशियन या न्यूट्रिशनिस्ट की मदद ली जाती है जो व्यक्ति को संतुलित डाइट का महत्व समझाते हैं।

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डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • खाने को लेकर हर समय तनाव महसूस होना।
  • कई जरूरी फूड्स का सेवन न करना।
  • तेजी से वजन कम होना।
  • कमजोरी, थकान या चक्‍कर महसूस होना।
  • मानस‍िक और शारीर‍िक सेहत प्रभाव‍ित होना।

न‍िष्‍कर्ष:

ऑर्थोरेक्सिया होने पर व्‍यक्‍त‍ि हेल्‍दी खाने के बारे में जरूरत से ज्‍यादा सोचता है। हेल्‍दी खाना अच्‍छी बात है, लेक‍िन जब यह जुनून बन जाए और इससे मानस‍िक और शारीर‍िक सेहत प्रभाव‍ित होने लगे, तो ऑर्थोरेक्सिया खतरनाक हो सकता है इसल‍िए इसके लक्षण नजर आने पर एक्‍सपर्ट से संपर्क करें।

FAQ

  • ऑर्थोरेक्सिया से कैसे बचें?

    ऑर्थोरेक्सिया या जरूरत से ज्‍यादा हेल्‍दी खाने की आदत से बचने के ल‍िए हेल्‍दी डाइट लें, एक्‍सरसाज करें और काउंसलर या न्‍यूट्र‍िशन एक्‍सपर्ट की सलाह लें। 
  • ऑर्थोरेक्सिया होने पर क्‍या न करें?

    खाने को लेकर जरूरत से ज्‍यादा सख्‍त न‍ियम‍ न बनाएं। हर समय हेल्‍दी फूड के बारे में न सोचें और न ही बार-बार अपना वजन चकें, इससे आप बीमार हो सकते हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 22, 2026 16:15 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 22, 2026 16:15 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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