पलकें झपकने या जबरन बंद होने की समस्या को लोग अक्सर नॉर्मल समस्या या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या 'ब्लेफेरोस्पाज्म' का संकेत हो सकता है। शुरुआती दौर में यह सिर्फ आंखों में ड्राइनेस या जलन जैसा महसूस होता है, लेकिन समय के साथ यह रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे पढ़ने, गाड़ी चलाने और स्क्रीन देखने में बड़ी बाधा बन जाता है। Dr. Purendra Bhasin, Ophthalmologist, Ratan Jyoti Netralaya Ophthalmic Institute & Research Centre, Gwalior के अनुसार पलकों का कभी-कभी फड़कना आम है और ज्यादातर मामलों में थकान, नींद की कमी, तनाव और आंखों में ड्राइनेस के कारण कुछ समय में खुद ठीक हो जाता है। हालांकि, अगर दोनों आंखों की पलकें बार-बार अनियंत्रित होकर झपकने लगें, आंखें जोर से बंद हो जाएं या व्यक्ति को उन्हें खोलने में मुश्किल होने लगे तो यह ब्लेफेरोस्पाज्म का संकेत हो सकता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
ब्लेफेरोस्पाज्म के लक्षण
Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि ब्लेफेरोस्पाज्म में आंखों के आसपास की मांसपेशियां व्यक्ति की इच्छा के बिना बार-बार सिकुड़ती हैं। इसे एक तरह का न्यूरोलॉजिकल मूवमेंट डिसऑर्डर या फोकल डिस्टोनिया माना जाता है। शुरुआती दौर में बार-बार पलक झपकना, आंखों में जलन, रोशनी से परेशानी, ड्राइनेस और आंखों में कुछ पड़ा होने जैसा अहसास हो सकता है।
धीरे-धीरे आंखों में ऐंठन बढ़ने, गाड़ी चलाने, स्क्रीन देखने या नॉर्मल गतिविधियां करने में मुश्किल आ सकती है। कुछ गंभीर स्थिति में पलकें कुछ समय के लिए पूरी तरह बंद हो सकती हैं, जबकि आंखों की रोशनी नॉर्मल रह सकती है।
Cleveland Clinic के अनुसार, ब्लेफेरोस्पास्म का सिर्फ एक लक्षण पलक का फड़कना है। लेकिन जो बात इसे इसी तरह की दूसरी स्थितियों से अलग करती है, वह है आंखों में ऐंठन की कुछ खास बातें या पलक झपकाने का तरीका। इनमें शामिल हैं, बहुत ज्यादा ऐंठन होना, आमतौर पर ज्यादा पलकें झपकाना, दोनों आंखों पर असर पड़ना, इस पर कंट्रोल न कर पाना या दोनों पलकों में एक ही समय पर ऐंठन होना।
ब्लेफेरोस्पाज्म होने का कारण
Dr. Purendra Bhasin के अनुसार, ब्लेफेरोस्पाज्म होने का सही कारण हर मामलों में साफ नहीं होता है। ऐसा माना जाता है कि दिमाग द्वारा पलक झपकने और चेहरे की मांसपेशियों की गतिविधि को कंट्रोल करने वाले सिस्टम में असामान्यता होने के कारण बार-बार पलकें झपकने या पलकें बंद होने की समस्या हो सकती है। तेज रोशनी, तनाव, थकावट, तेज हवा, धूल-मिट्टी, लंबे समय तक स्क्रीन देखना और आंखों का ड्राई होना इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। कुछ आंखों की सतह से जुड़ी समस्याएं, दवाएं या दूसरे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर भी काबू न कर पाने वाले पलक बंद होने का कारण बन सकते हैं।
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साल 2024 में Frontiers in Neurology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, "ब्लेफेरोस्पास्म को जेनेटिक संवेदनशीलता, पर्यावरणीय कारकों और कई अन्य कारकों से जुड़ा माना जाता है, लेकिन इसका साफ कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है।"
नॉर्मल आंखों का फड़कना और ब्लेफेरोस्पाज्म में अंतर
Dr. Purendra Bhasin बताते हैं कि नॉर्मल आंखों की पलकों के फड़कने और ब्लेफेरोस्पाज्म के बीच अंतर समझना बहुत जरूरी है। नॉर्मल आंख फड़कन अक्सर एक पलक के छोटे हिस्से में होती है और कुछ देर या दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है। ब्लेफेरोस्पाज्म आमतौर पर दोनों आंखों को प्रभावित करता है, बार-बार वापस होता है और समय के साथ रोजमर्रा की लाइफ पर बुरा असर डाल सकता है।
ब्लेफेरोस्पाज्म का पता लगाने का तरीका
Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि किसी भी आई डिसऑर्डर के सही कारण का पता लगाने के लिए सही जांच की जरूरत होती है। आई स्पेशलिस्ट खासकर गैजेट्स की मदद से आंखों, पलकों, कॉर्निया और आंख की सतह की बारीकी से जांच करते हैं। इससे यह पता लगाया जाता है कि समस्या बाहरी सतह पर है या आंखों की अंदरूनी संरचनाओं में। अगर आई स्पेशलिस्ट को यह अंदेशा हो कि समस्या नर्वस सिस्टम या दिमाग से जुड़ी मांसपेशियों के कंट्रोल से जुड़ा है तो न्यूरोलॉजिस्ट से कंसल्ट करना जरूरी होता है।
ब्लेफेरोस्पाज्म का इलाज
Dr. Purendra Bhasin के मुताबिक, ब्लेफेरोस्पाज्म की गंभीरता के हिसाब से इलाज के विकल्प अलग-अलग हो सकते हैं, जो डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार चुनते हैं-
- आंखों की ड्राइनेस कम करना: आंखों में नमी बनाए रखने के लिए डॉक्टर आर्टिफिशियल टियर्स का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। स्क्रीन टाइम कम करने और पलकों को नियमित रूप से झपकाने के अभ्यास पर जोर दिया जाता है।
- ट्रिगर या कारकों से बचाव: तेज धूप, तेज हवा, धूल और धुएं जैसे पर्यावरणीय कारकों से आंखों की सुरक्षा करना जरूरी है। इसके अलावा, तनाव और ज्यादा थकान से बचना भी जरूरी होता है, क्योंकि ये कई बार मांसपेशियों में ऐंठन को बढ़ा सकते हैं।
- बोटुलिनम टॉक्सिन इंजेक्शन: यह गंभीर पलक झपकने या मांसपेशियों के संकुचन के लिए एक प्रभावी तरीका है। ये इंजेक्शन प्रभावित मांसपेशियों को कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से आराम देते हैं, जिससे ज्यादा और कंट्रोल न कर पाने वाला संकुचन रुक जाता है। इसका असर आमतौर पर कुछ महीनों तक रहता है, जिसके बाद इसे दोबारा लेने की जरूरत हो सकती है।
- गंभीर मामलों में सर्जरी: जब ऊपर बताए गए ट्रीटमेंट और दवाइयां असर नहीं करती हैं या स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है, तब सर्जरी का विकल्प चुना जाता है, जिसमें मायोसेक्टमी या अन्य सर्जिकल तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
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डॉक्टर से कब मिलें?
Dr. Purendra Bhasin का कहना है कि ब्लेफेरोस्पाज्म एक गंभीर स्थिति है। इसलिए, अगर बार-बार अपने आप पलकें बंद होने की समस्या होती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। साथ ही अगर पलक बंद होने के साथ चेहरे के एक हिस्से में खिंचाव, चेहरे या हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी, चीजें दो-दो दिखना या अचानक नजर कम होने की स्थिति गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों के नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।
निष्कर्ष
बिना इच्छा के अपने आप आंखों की पलकें बंद होना ब्लेफेरोस्पाज्म जैसी गंभीर समस्या का संकेत होता है। इसे शुरुआती स्तर पर पहचानना और सही कदम उठाना ही आपकी आंखों की सेहत की रक्षा कर सकता है। अगर आपकी पलकें लगातार अनियंत्रित रूप से बंद हो रही हैं तो डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है।
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FAQ
बार-बार पलक झपकने का क्या कारण है?
बार-बार पलक झपकने के पीछे कई कारण शामिल हैं, जिनमें आंखों का सूखापन, आंखों में थकान या तनाव और एलर्जी या जलन महसूस होना।कौन सी विटामिन की कमी से आंख फड़कती है?
आंख का फड़कना मुख्य रूप से विटामिन बी12 और विटामिन डी की कमी के कारण हो सकता है। इसके अलावा, शरीर में मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स की कमी भी इसका एक बड़ा कारण बनती है।
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Jul 31, 2026 15:00 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Purendra Bhasin