Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Purendra Bhasin , Ophthalmologist

आंख फड़कना सिर्फ थकान नहीं, इन 5 बीमारियों का भी हो सकता है संकेत, जानें डॉक्टर से

आमतौर पर आंखों का फड़कना स्ट्रेस, थकान या स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा देखने की वजह से हो सकता है, लेकिन अगर यह समस्या कई हफ्तों तक बनी रहे, तो इसकी वजह बीमारियां भी हो सकती हैं। इस लेख में डॉक्टर ने आंखों के फड़कने से जुड़ी बीमारियों के बारे में विस्तार से बताया है। 

आंखों का फड़कना एक आम समस्या है, क्योंकि जो लोग बहुत ज्यादा मोबाइल या लैपटॉप पर रहते हैं या आंखों की थकान इसकी वजह हो सकती है। ज्यादातर मामलों में यह खुद ही कुछ समय बाद ठीक हो जाती है, लेकिन अगर आंखों का फड़कना कई हफ्तों तक बना रहे या चेहरे की दूसरी मांसपेशियों तक पहुंच रही हो, तो यह बीमारियों का सिग्नल हो सकता है। इसके बारे में जानने के लिए हमने Dr. Purendra Bhasin, Opthamologist, Founder & Director, Ratan Jyoti Netralaya, Gwalior से बात की।

आंखें फड़कने का कारण 5 बीमारियां होना

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “आमतौर पर आंख फड़कने का कारण तनाव, ज्यादा कैफीन लेना, आंखों पर ज्यादा दबाव पड़ना, थकान, ड्राई आई और निकोटीन का इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन कुछ मामलों में बार-बार होने वाली फड़कन किसी बीमारी से भी जुड़ी हो सकती है।

1. मायोकिमिया (Myokymia)

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “मायोकिमिया आंखों की पलक फड़कने का सबसे आम कारण है। इसमें आमतौर पर पलक की मांसपेशी हल्के-हल्के तरीके से फड़कने लगती है और अक्सर यह एक ही आंख में होती ह और कुछ सेकेंड या मिनट से लेकर कभी-कभी ज्यादा समय तक महसूस हो सकती है।”

Cleveland Clinic के मुताबिक, मायोकिमिया होने का कारण मिर्गी, एंटीसाइकोटिक्स या कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स दवाएं शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा, ऑटोइम्यून बीमारियां या नर्व सिस्टम से जुड़ी समस्याएं इसकी वजह हो सकती हैं।

2. ब्लेफेरोस्पाज्म (Blepharospasm)

Dr. Purendra Bhasin बताते हैं कि अगर पलक की फड़कन इतनी तेज हो जाए कि आंख बार-बार या बिना इच्छा के ही बंद होने लगे, तो यह ब्लेफेरोस्पाज्म हो सकता है। इसमें पलक की मांसपेशियों में बार-बार ऐंठन होती है। यह बीमारी दोनों आंखों को प्रभावित कर सकता है। अगर मरीज तेज रोशनी, थकान या तनाव में होता है, तो उसके लक्षण बढ़ सकते हैं। कुछ लोगों में ड्राई आई की समस्या भी हो सकती है।

Korean Journal of Ophthalmology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, इस स्टडी में करीब 101 मरीजों को शामिल किया गया। इसमें बिनाइन एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म के लक्षणों की जांच की गई। इसमें पाया गया कि जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज की समस्या थी, उनमें ब्लेफेरोस्पाज्म हो सकात है। इसके अलावा, स्मोकिंग करने वाले लोगों और दिन में एक कप से ज्यादा कैफीन लेने से भी इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

3. हेमीफेशियल स्पाज्म (Hemifacial Spasm)

Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “अगर फड़कन केवल आंख तक सीमित न रहकर चेहरे के एक तरफ फैलने लगे, तो हेमीफेशियल स्पाज्म की जांच की जा सकती है। इस कंडीशन की शुरुआत अक्सर आंख फड़कने से होती है, जो बाद में भौंह, गाल या मुंह के आसपास की मांसपेशियों में भी फैल जाती है। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह ऐंठन कई बार महसूस हो सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसमें चेहरे की नस पर ब्लड वेसल्स का प्रेशर सबसे आम कारण माना जाता है। इसके अलावा, चोट, चेहरे या दिमाग से जुड़ी समस्याएं हो सकती है।”

Disease related to eye twitching

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4. बेनाइन फासिकुलेशन सिंड्रोम (Benign Fasciculation Syndrome)

Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि कभी-कभी आंख की पलक के साथ शरीर के दूसरे हिस्सों में भी बार-बार मांसपेशियां फड़कती हैं। ऐसी स्थिति को बेनाइन फासिकुलेशन सिंड्रोम (BFS) से जुड़ी हो सकती है। इसमें मांसपेशियों में बार-बार बिना इच्छा से फड़कती रहती है, लेकिन चेकअप में कोई गंभीर बीमारी नहीं मिलती।

ये फड़कन पलकों के अलावा पैरों, हाथों, जांघों या शरीर के दूसरे हिस्सों में भी हो सकती है। अगर आंखों के फड़कने के साथ मांसपेशियों में कमजोरी या मांसपेशियों का आकार कम होने जैसी समस्या भी हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

5. निस्टैग्मस और नर्व सिस्टम से जुड़ी समस्याएं (Nystagmus)

Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “निस्टैग्मस में सामान्य पलक फड़कने के बजाय आंखों की पुतलियां आगे-पीछे, ऊपर-नीचे या गोल दिशा में हिल सकती हैं। यह आंखों से जुड़ी कुछ सामान्य स्थितियों में भी हो सकता है, लेकिन कुछ मामलों में यह नर्व सिस्टम से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में आंखों की जांच के साथ न्यूरोलॉजिस्ट से भी चेकअप कराना जरूरी हो जाता है।"

आंखें फड़कने पर डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि यह जरूरी नहीं है कि आंख फड़कना हमेशा ही बीमारी हो और अगर पलक कभी-कभार फड़कती है, तो अपने-आप ठीक हो जाती है। अगर ये कंडीशन हो, तो आंखों के एक्सपर्ट को जरूर दिखाना चाहिए।

  • आंखों का फड़कना कई हफ्तों तक लगातार बनी रहे।
  • आंखों का फड़कना पहले से ज्यादा बार होने लगे।
  • पलक इतनी सिकुड़े कि आंख बंद होने लगे।
  • फड़कन चेहरे के दूसरे हिस्सों तक पहुंच जाए।
  • आंखों में लालिमा, दर्द या ज्यादा रोशनी से परेशानी हो।
  • दिखाई देने में बदलाव या डबल विजन हो।
  • चेहरे पर कमजोरी या झुकाव महसूस हो।
  • शरीर की दूसरी मांसपेशियां भी लगातार फड़कने लगें।
  • मांसपेशियों में कमजोरी या उनका आकार कम होने लगे।

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निष्कर्ष
Dr. Purendra Bhasin सलाह देते हैं कि अगर आंख फड़कने की वजह स्ट्रेस, थकान या लाइफस्टाइल से जुड़ी है, तो पर्याप्त नींद लेना, कैफीन कम करना, स्क्रीन से नियमित ब्रेक लेना और आंखों को आराम देना मददगार हो सकता है। ड्राई आई की समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जा सकता है। आंखों में बार-बार फड़कन को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे लंबे समय तक नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • सामान्य थकान और बीमारी के कारण फड़कने वाली आंख में क्या अंतर है?

    थकान या कैफीन से होने वाला फड़कना कुछ मिनटों या 1 से 2 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन बीमारी से जुड़ा फड़कना हफ्तों तक लगातार बना रहता है और पलक पूरी बंद होने लगती है।
  • क्या आंखों में मोतियाबिंद या चश्मे का नंबर बदलने से भी आंख फड़क सकती है?

    हां, जब विजन कमजोर होता है या चश्मे का नंबर बदल जाता है, तो आंखों की मांसपेशियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह आई स्ट्रेन पलकों में ऐंठन और फड़कन पैदा कर सकता है।
  • तनाव और नींद की कमी से आंख क्यों फड़कती है?

    जब कोई स्ट्रेस में होता है, तो शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है। यह हार्मोन नसों और मांसपेशियों की उत्तेजना बढ़ा देता है, जिससे आंखों के आसपास की मांसपेशियां खुद ही फड़कने लगती हैं।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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