Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

ज्यादा खुशी या दुख में करता है तरह-तरह की चीजें खाने का मन? जानें इमोशनल ईट‍िंग से जुड़ी ये 5 बातें

जो लोग ज्‍यादा खुशी या दुख में जरूरत से ज्‍यादा खा लेते हैं उन्‍हें बाद में ग‍िल्‍ट महसूस होता है, वजन बढ़ने लगता है और ई‍ट‍िंग ड‍िसआर्डर का श‍िकार होना पड़ता है, इसल‍िए समय रहते इसे ठीक कर लेना चाह‍िए। जानें इमोशनल ईट‍िंग से जुड़ी जरूरी बातें।

हम सब कभी न कभी इमोशनल ईट‍िंग का श‍िकार हुए होंगे। इमोशनल ईट‍िंग हमेशा खराब नहीं होता, लेक‍िन रोज या बार-बार इमोशनल ईट‍िंग हर तरह से शरीर के ल‍िए हान‍िकारक साब‍ित होता है। जो लोग एक बार इमोशनल ईट‍िंग का श‍िकार हो गए, उन्‍हें दोबारा असली भूख को समझने में परेशानी होती है और वह इमोशनल ईटि‍ंग के ट्रैप से बाहर नहीं न‍िकल पाते। अगर आप भी इसका श‍िकार हैं, तो जानें इससे जुड़ी जरूरी बातें। इमोशनल ईट‍िंग से जुड़ी जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

1. इमोशनल ईट‍िंग के पीछे भूख नहीं होती

कुछ लोगों को लगता है क‍ि इमोशनल ईट‍िंग का कारण भूख होती है। जबक‍ि ऐसा नहीं है। इसके पीछे का कारण इमोशन्‍स होते हैं। व्‍यक्‍त‍ि डर, च‍िंता, भय, दुख या बोर‍ियत को दूर करने के ल‍िए खाने का सहारा ले लेता है। इमोशनल ईट‍िंग असल भूख नहीं होती है। यानी शरीर को खाने की जरूरत नहीं होती है।

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2. इमोशनल ईट‍िंग और फ‍िज‍िकल हंगर में अंतर

फ‍िज‍िकल भूख लगने पर हल्‍का पेट दर्द महसूस होता है और पेट भर जाने के बाद व्‍यक्‍त‍ि रुक जाता है। इमोशनल ईट‍िंग के दौरान व्‍यक्‍त‍ि भूख से ज्‍यादा खाता है। साथ ही उसे पेट भर जाने का एहसास समय पर नहीं होता।

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3. इमोशनल ईट‍िंंग और ब‍िंज ईट‍िंग ड‍िसआर्डर में अंतर

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इमोशनल ईट‍िंग में व्‍यक्‍त‍ि भावनाओं जैसे ज्‍यादा दुख या ज्‍यादा खुशी के कारण खा लेता है। इमोशनल ईट‍िंग कभी-कभी हो सकती है, लेक‍िन ब‍िंज ईट‍िंग ड‍िसआर्डर के एप‍िसोड्स बार-बार होते हैं और इसमें व्‍यक्‍त‍ि खाने की मात्रा पर कंट्रोल नहीं कर पाता है और जरूरत से ज्‍यादा खा लेता है।

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4. इमोशनल ईट‍िंग से बचा सकती है माइंडफुल ईट‍िंग

इमोशनल ईट‍िंग से बचने के ल‍िए माइंडफुल ईट‍िंग अपनाएं। इसमें आप ब‍िना क‍िसी बाधा के, यानी फोन या टीवी के बगैर केवल भोजन पर फोकस रखकर खाते हैं। इसे अपनाने से आप धीरे खाते हैं और पेट भरने का एहसास होता है और पता चलता है क‍ि क‍ितनी भूख लगी है? 2017 में Diabetes Spectrum नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, माइंडफुल ईट‍िंग से ओवरईट‍िंग, ब‍िंज ईट‍िंग और इमोशनल ईट‍िंग जैसी समस्‍याएं दूर होती हैं।

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5. इमोशनल ईट‍िंग लंबे समय की परेशानी इलाज नहीं है

अगर आप क‍िसी दुख या तकलीफ में हैं और सोच रहे हैं क‍ि खाकर उसे ठीक कर लेंगे, तो शायद ऐसा हो भी जाए लेक‍िन कुछ देर के ल‍िए। खाने के बाद आपको अच्‍छा महसूस हो सकता है पर यह लंबे समय तक फॉलो नहीं क‍िया जा सकता। बाद में खाने की ग‍िल्‍ट महसूस होगी इसल‍िए हर स्‍ट्रेस या परेशानी में खाने को सहारा न बनाएं।

न‍िष्‍कर्ष:

इमोशनल ईट‍िंग को लंबे समय तक नहीं करना चाह‍िए। माइंडफुल ईट‍िंग के जर‍िए इससे बच सकते हैं। इमोशनल ईट‍िंग असली भूख से अलग होती है और इसमें व्‍यक्‍त‍ि को पेट भर जाने का एहसास जल्‍दी नहीं हो पाता है।

FAQ

  • इमोशनल ईट‍िंग के नुकसान क्‍या हैं?

    वजन बढ़ सकता है, व्‍यक्‍त‍ि मोटापे का श‍िकार हो सकता है, शुगर, बीपी और पाचन से संबंध‍ित समस्‍याएं हो सकती हैं। बार-बार खाने की ग‍िल्‍ट से स्‍ट्रेस बढ़ सकता है।
  • जरूरत से ज्‍यादा खाने से कैसे बचें?

    खाने से पहले खुद से पूछें क‍ि आपको सच में भूख लगी है या नहीं? टीवी देखते हुए या स्‍ट्रेस के दौरान न खाएं। शांत जगह पर खाने पर फोकस करके भोजन करें। 

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 29, 2026 18:20 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Apr 29, 2026 18:20 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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