Fri Sep 11, 2026 | 09:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Naveen Polavarapu , Gastroenterologist

हर वक्‍त खाने का ख्याल और बढ़ता वजन? यह है Food Noise, एक्सपर्ट से जानें इसके बारे में

क्‍या आपके मन में भी हर समय खाने के ख्‍याल आते हैं? अगर हां, तो यह फूड नॉइज (Food Noise) हो सकता है। इस समस्‍या में व्‍यक्‍त‍ि भूख के बगैर भी खाने के बारे में सोचता रहता है।

आज की तेज रफ्तार जि‍ंदगी में, जहां विज्ञापन, सोशल मीडिया और हर जगह स्नैक्स आसानी से मिल जाते हैं, कई लोग फूड नॉइज (Food Noise) नाम की समस्या से जूझ रहे हैं। ओजेम्पिक (Ozempic) जैसी दवाओं ने फूड नॉइज को लोकप्र‍िय बना द‍िया है। कई मरीज बताते हैं कि दवा लेने से पहले वे हर समय खाने के बारे में सोचते रहते थे, लेकिन इलाज के बाद यह समस्‍या काफी कम हो जाता है। हालांकि, फूड नॉइज सिर्फ दवा लेने वालों की समस्या नहीं है, यह आज के माहौल की वजह से लगभग सभी को प्रभावित करता है। इस लेख में जानेंगे फूड नॉइज क्‍या होता है और इसका इलाज क्‍या है? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Naveen Polavarapu, Senior Consultant, Medical Gastroenterologist, Liver Specialist, Lead Advanced Endoscopic Interventions & Training, Clinical Director,Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

फूड नॉइज क्‍या है?- What Is Food Noise

thinking-about-food-what-is-food-noise

फूड नॉइज का मतलब है दिमाग में बार-बार खाने के बारे में सोचना यानी ऐसे ख्याल जो बिना भूख के भी खाने के लिए मजबूर करते हैं। कुछ लोग भूख के बगैर भी खाने के बारे में सोचते रहते हैं, बार-बार लंच टाइम चेक करते हैं या खाने का इंतजार करते हैं। ये सभी फूड नॉइज का श‍िकार हो सकते हैं। 

यह भी पढ़ें- ज्यादा खाने (ओवरईटिंग) से हो सकती हैं ये 5 गंभीर बीमारियां, यूं करें खुद का बचाव

स्‍ट्रेस, बोरियत और इमोशनल ईट‍िंग से फूड नॉइज बढ़ती है

इसका कारण हमारे दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम है। मीठा या तला-भुना खाना देखने या सूंघने से दिमाग में डोपामिन रिलीज होता है, जिससे क्रेविंग बढ़ती है। जो सिस्टम पहले भूख से बचाने में मदद करता था, वही ज्‍यादा खाने और मोटापे की वजह बन सकता है। स्‍ट्रेस, बोरियत और इमोशनल ईट‍िंग, इस समस्या को और बढ़ा देते हैं।

यह भी पढ़ें- Binge Eating Disorder: जरूरत से ज्यादा खाना कौन सी बीमारियों को बढ़ा सकता हैं? डॉक्टर से जानें मैनेज करने के तरीके

फूड नॉइज का इलाज क्‍या है?- How To Treat Food Noise

Dr. Naveen Polavarapu ने बताया क‍ि कुछ मरीज बताते हैं कि वे पोषण के बजाय क्रेविंग के हिसाब से खाना चुनते हैं, जिससे मानसिक थकान होती है। इसे कंट्रोल करने के लिए सही सोच विकसित करना जरूरी है। फूड नॉइज टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों को बढ़ा सकता है। फूड नॉइज को ऐसे कम करें-

  • घर में जंक फूड कम रखें, तो आप क्रेव‍िंग से बच सकते हैं।
  • खाने से पहले भूख को 1 से 10 के स्केल पर आंकें। इससे आपको असली भूख समझ आएगी।
  • माइंडफुल ईटिंग जैसे तरीके मददगार हो सकते हैं।
  • वजन घटाने की दवाएं फूड नॉइज को शांत कर सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक फायदा पाने के लिए लाइफस्टाइल बदलाव करने जरूरी हैं।
  • न्यूट्रिशन काउंसलिंग, थेरेपी और सपोर्ट ग्रुप इसमें मदद कर सकते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

अगर खाने से जुड़े विचार आपकी रोजमर्रा की जि‍ंदगी को प्रभावित कर रहे हैं, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है क्योंकि फूड नॉइज को कंट्रोल करना बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक बड़ा कदम है।

उम्‍मीद करते हैं क‍ि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इस लेख को शेयर करना न भूलें।

Read Next

ब्लड शुगर को नेचुरली बैलेंस करते हैं ये 7 फैक्टर, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें फॉलो?

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Dec 18, 2025 19:04 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Dec 18, 2025 19:04 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Naveen Polavarapu

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content