Wed Oct 7, 2026 | 03:41 AM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

क्या दादा-दादी का '32 बार चबाकर' खाने का नियम सच में ओवरईटिंग से बचाता है? एक्‍सपर्ट से जानें

अगर आप खाने को अच्‍छी तरह से चबा-चबाकर खाएं, तो क्‍या ओवरईट‍िंग से बच सकते हैं? लोग कहते हैं खाने को 32 बार चबाकर खाना चाह‍िए, इस तरह पाचन अच्‍छा होता और आप ज्‍यादा नहींं खाते। जानें इसमें क‍ितनी सच्‍चाई है?
क्या दादा-दादी का '32 बार चबाकर' खाने का नियम सच में ओवरईटिंग से बचाता है? एक्‍सपर्ट से जानेंक्या दादा-दादी का '32 बार चबाकर' खाने का नियम सच में ओवरईटिंग से बचाता है? एक्‍सपर्ट से जानें

आजकल लोगों के पास खाने तक का समय नहीं है। जल्‍दी-जल्‍दी खाने के चक्‍कर में न स्‍वाद का मजा ले पाते हैं और न ही जल्‍दी-जल्‍दी खाने का कुछ अच्‍छा असर शरीर पर होता है। भागदौड़ भरी ज‍िंदगी में लोग जल्‍दी-जल्‍दी खाना खत्‍म करके अपने काम में लग जाते हैं। खाना सुकून नहीं, जरूरत बन गया है। पुराने जमाने में दादा-दादी खाने को 32 बार चबाकर खाने की सलाह देते थे ताक‍ि खाना आसानी से पच जाए, लेक‍िन अब क‍िसी के पास इतना समय नहीं होता और समय की कमी के चक्‍कर में लोग अक्‍सर सेहत खराब कर लेते हैं। कुछ लोग मानते हैं क‍ि खाने को 32 बार चबाने से ओवरईट‍िंग से बचाव होता है। इस बात में क‍ितनी सच्‍चाई है यह जानने के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

32 बार खाने को चबाकर खाने का न‍ियम क्‍या है?

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पुराने जमाने के लोग और और आज के मॉर्डन डॉक्‍टर भी यह मानते हैं क‍ि खाने को 32 बार चबाकर खाना चाह‍िए। इस तरह खाना अच्‍छी तरह से डाइजेस्‍ट हो जाता है। हर न‍िवाले को खाने से पहले 32 बार चबाने से खाना छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है और इससे पाचन तंंत्र का काम कम हो जाता है और डाइजेशन एक्‍ट‍िव रहता है।

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32 बार चबाकर खाएंगे तो ओवरईट‍िंग से बच सकते हैं

धीरे-धीरे और 32 बार चबाकर खाने से ओवरईट‍िंग की संभावना कम हो सकती है। आयुर्वेदाचार्य Dr. Shrey Sharma ने बताया क‍ि जब हम खाना खाते हैं, तो द‍िमाग को कुछ समय बाद पेट भर जाने का संकेत म‍िलता है, लेक‍िन अगर व्‍यक्‍त‍ि बहुत जल्‍दी खाना खा लेगा, तो द‍िमाग तक पेट भर जाने का संकेत पहुंचेगा ही नहीं और उसे दोबारा भूख लगेगी। आराम से चबा-चबाकर खाएंगे, तो पाचन भी अच्‍छा रहेगा, पेट लंबे समय तक भरा रहेगा और ओवरईट‍िंग की संभावना कम हो सकती है। वहीं जो लोग जल्‍दी-जल्‍दी खाते हैं उनमें गैस, अपच, पेट फूलना, भारीपन जैसी समस्‍याएं देखने को म‍िल सकती हैं।

साल 2014 में Journal Of The Academy Of Nutrition And Dietetics नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, मोटापे से पीड़ि‍त लोगों को न‍िवाले को अच्‍छी तरह से चबाकर खाने के ल‍िए कहा गया। शोधकर्ताओं ने पाया क‍ि ऐसा करने से लोगों में ओवरईट‍िंग कम हुई। संख्‍या में बात करें, तो ओवरईट‍िंग की आदत में 9.5 से 14.8 % तक कमी देखी गई।

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हर न‍िवाले को 32 बार चबाकर खाना जरूरी है?

हर न‍िवाले को 32 बार चबाना संभव नहीं है। नर्म चीजें जैसे दही, ख‍िचड़ी वगैरह को चबाने के बजाय न‍िगल सकते हैं। वहीं ड्राई फ्रूट्स, सलाद या रोटी जैसे मोटे आहार को अच्‍छी तरह से चबाकर खाना चाह‍िए। 32 बार चबाकर खाने से ज्‍यादा जरूरी है क‍ि आप इस बात पर फोकस करें क‍ि खाने को अच्‍छी तरह और धीरे-धीरे खाया जाए। अगर भोजन न‍िगलने से पहले मुलायम हो जाए, तो समझ लें क‍ि आप सही ढंग से खा रहे हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

खाने को 32 बार चबाकर खाएंगे, तो ओवरईट‍िंग की संभावना कम हो सकती है। 32 बार चबाने से खाना अच्‍छी तरह से मुलायम हो जाएगा और पचाने में आसानी होगी। हालांक‍ि 32 बार की ग‍िनती करके खाने से ज्‍यादा जरूरी है खाने को धीरे-धीरे और आराम से खाना ताक‍ि पाचन बेहतर रहे और पेट लंबे समय तक भरा रहे।

FAQ

  • ओवरईट‍िंग से कैसे बचें?

    खाने को धीरे-धीरे खाएं, न‍िगलने के बजाय चबाकर खाएं, खाने की मात्रा पर गौर करें और खाते समय टीवी या मोबाइल न देखें।
  • ओवरईट‍िंग के नुकसान क्‍या हैं?

    ओवरईट‍िंग से मोटापा बढ़ जाता है और व्‍यक्‍त‍ि डायब‍िटीज और टाइप 2 डायब‍िटीज जैसी बीमार‍ियों का श‍िकार हो सकता है। 

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Yashaswi Mathur

Health Journalist

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।

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    Jun 19, 2026 18:26 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 19, 2026 18:26 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma