Fri Sep 11, 2026 | 05:59 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kapil Sharma , Group Director - Gastroenterology & Advanced Endoscopy

क्या जल्दी-जल्दी खाना खाने से भी वजन बढ़ सकता है? डॉक्‍टर से जानें

वजन बढ़ने के पीछे कम एक्‍सरसाइज, फास्‍ट फूड का सेवन ही नहीं बल्‍क‍ि जल्‍दी-जल्‍दी खाने की आदत भी हो सकती है। डॉक्‍टर से जानें क्‍या वाकई इनका संबंध है?

कई लोग ऐसा मानते हैं क‍ि जल्‍दी-जल्‍दी खाने के कारण वजन बढ़ने लगता है। बचपन में जब जल्‍दी-जल्‍दी नाश्‍ता करके स्‍कूल जाया करते थे, तब दादी-नानी टोककर कहती थीं क‍ि आराम से बैठकर नाश्‍ता करो। खाते समय हड़बड़ी नहीं करनी चाह‍िए। आजकल लाइफस्‍टाइल इतनी तेज हो गई है क‍ि लोगों के पास आराम से बैठकर खाने का समय ही कहां रहता है। कई लोग खाते-खाते पेंड‍िंग कामों की ल‍िस्‍ट द‍िमाग में बना रहे होते हैं, तो कई खाते-खाते फोन पर बात कर रहे होते हैं। अगर आप भी आस-पास बैठे लोगों की तुलना में जल्‍दी खाना खत्‍म कर लेते हैं, भोजन के बाद पेट फूलने लगता है, भोजन के बाद पेट ज्‍यादा भरा हुआ महसूस होता है, तो यह संकेत हो सकता है क‍ि आप तेजी से भोजन खत्‍म कर लेते हैं। आइए जानते हैं क‍ि जल्‍दी खाने की आदत का संबंध वजन बढ़ने के साथ है या नहीं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Kapil Sharma, Gastroenterologist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

जल्‍दी खाने से बढ़ सकती है ओवरईट‍िंग की संभावना

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अगर जल्‍दी-जल्‍दी भोजन करते हैं, तो ओवरईट‍िंग की संभावना बढ़ सकती है। ऐसा इसल‍िए होता है क्‍योंक‍ि पेट भरने का सिग्नल द‍िमाग तक पहुंचने में कुछ वक्‍त लगता है इसल‍िए तेजी से खाने के कारण आप पेट भरने का संकेत द‍िमाग तक पहुंचने से पहले ही अध‍िक खा चुके होते हैं। ओवरईट‍िंग के कारण वजन बढ़ सकता है। जो लोग जल्‍दी-जल्‍दी खाते हैं, वे खाने को ठीक तरह से चबा भी नहीं पाते हैं। खाना ठीक से न चबा पाने के कारण पाचन संबंधि‍त समस्‍याएं भी बढ़ सकती हैं। इसल‍िए भले ही मोटापे का जल्‍दी खाने से सीधा संबंध न हो, लेक‍िन ये आद वजन बढ़ने का कारण बन सकती है।

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स्‍टडीज में जल्‍दी खाने और मोटापे का संबंध म‍िला

साल 2020 में Nutrients में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, खाने की रफ्तार (Eating Rate) और कैलोरी इंटेक का संबंध हो सकता है। जो लोग जल्दी खाते हैं, वे एक ही मील में धीरे खाने वालों की तुलना में ज्यादा खाना खा सकते हैं। जल्दी खाने से उस दौरान पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है।

साल 2006 में Journal Of Epidemiology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी में 4742 कर्मचारियों को शामिल किया गया।अध्ययन में पाया गया कि जितनी तेजी से लोग खाना खाते थे, उनका BMI उतना अधिक था। स्‍टडी में जल्‍दी-जल्‍दी खाने का संबंध मोटापे के साथ देखा गया है।

जल्‍दी-जल्‍दी खाना सेहत के ल‍िए क्‍यों नुकसानदायक है?

  • जो लोग जल्‍दी-जल्‍दी खाते हैं उन्‍हें अपच हो सकती है। जल्‍दी खाने के कारण भोजन ठीक ढंग से पच नहीं पाता है।
  • तेजी से खाने के कारण पेट फूलने की समस्‍या हो सकती है और पेट में गैस भी हो सकती है।
  • जल्‍दी खाने के कारण व्‍यक्‍त‍ि को तुरंत, तो पेट भरने का एहसास होता है, लेक‍िन कुछ समय के बाद दोबारा भूख लग सकती है इसल‍िए जल्‍दी-जल्‍दी खाने से बचना चाह‍िए।
  • जल्‍दी-जल्‍दी भोजन करने से टाइप 2 डायब‍िटीज, इंसुलि‍न रेज‍िस्‍टेंस, मेटाबोल‍िक स‍िंड्रोम का खतरा भी बढ़ सकता है।

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माइंडफुल ईट‍िंग अपनाएं

माइंडफुल ईट‍िंग का मतलब है सजग होकर खाना। यह तरीका मोटापे से बचाएगा, भोजन ठीक से पचेगा और जल्‍दी-जल्‍दी खाने की आदत पर भी लगाम लगेगा। भोजन को केवल खाएं नहीं, बल्‍क‍ि उसका अनुभव भी लें। खाने के स्‍वाद, बनावट, महक वगैरह पर गौर करें। माइंडफुल ईटिंग का मतलब है यह ध्यान देना कि आपका मन कब भटक रहा है और धीरे से अपना ध्यान दोबारा अपने सामने रखे खाने पर लाना।

भोजन को 20 से 30 बार चबाकर खाएं

क‍िसी भी भोजन को न‍िगलने से पहले 20 से 30 बार अच्‍छी तरह से चबाकर खाएं। साथ ही, छोटे न‍िवाले लें क्‍योंक‍ि उसे आसानी से धीरे-धीरे खाया जा सकता है और ये आसानी से पच भी जाते हैं।

स्‍क्रीन के सामने बैठकर भोजन न करें

अक्‍सर लोग टीवी, लैपटॉप या फोन देखकर खाते हैं, लेक‍िन इस वजह से व्‍यक्‍त‍ि अध‍िक खाने लगता है या तेजी से भोजन करने लगता है। हर न‍िवाले को महसूस करके खाएं, ताक‍ि ओवरईट‍िंग से बचाव हो सके।

ज्‍यादा देर भूखे न रहें

अगर व्‍यक्‍त‍ि ज्‍यादा देर भूखा रहेगा, तो वह जरूरत से ज्‍यादा खा लेगा और जल्‍दी-जल्‍दी भोजन करेगा। मील टाइम फ‍िक्‍स करें, भोजन करने की जगह तय करें और एक तय समय पर भोजन करने का प्रयास करें। इस तरह भोजन का सही रूटीन बनाने में मदद म‍िलेगी।

न‍िष्‍कर्ष:

जल्‍दी-जल्‍दी खाने से ओवरईट‍िंग की संभावना बढ़ सकती है और वजन भी बढ़ सकता है। द‍िमाग को पेट भरे होने का संकेत म‍िलने में थोड़ा समय लगता है और इस दौरान ओवरईट‍िंग कर लेने से वजन बढ़ सकता है। जल्‍दी-जल्‍दी खाने से पाचन भी खराब हो सकता है, अपच और गैस हो सकती है, पेट फूलने की समस्‍या हो सकती है। साथ ही, टाइप 2 डायब‍िटीज, इंसुलि‍न रेज‍िस्‍टेंस, मेटाबोल‍िक स‍िंड्रोम का खतरा भी बढ़ सकता है। जल्‍दी-जल्‍दी खाने की आदत से बचने के ल‍िए माइंडफुल ईट‍िंग अपनाएं, खाने को अच्‍छी तरह से चबाकर खाएं, स्‍क्रीन के सामने बैठकर भोजन न करें और ज्‍यादा देर तक भूखे रहने से बचें।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या धीरे-धीरे खाना वजन घटाने में मदद करता है?

    धीरे खाने से कैलोरी इंटेक घटाने में मदद मिल सकती है, लेकिन इस तरीके को वेट लॉस उपाय समझना सही नहीं है।  
  • भोजन धीरे खाने की आदत कैसे डालें?

    हर निवाले को आराम से चबाएं, भोजन के बीच थोड़ा रुकें और खाने के दौरान मोबाइल या टीवी जैसी चीजों से ध्यान हटाकर भोजन पर ध्यान दें।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Sep 10, 2026 18:12 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Kapil Sharma

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