Fri Sep 11, 2026 | 07:32 PM IST

Medically Reviewed by Archana Singhal , Counsellor & Family Therapist

Korean Culture की लत ने ली 3 सगी बहनों की जान - जानें अपने बच्चे में होने वाली किसी भी Addiction की कैसे करें पहचान

गाजियाबाद में तीन बहनों की आत्महत्या ने बच्चों में कोरियन कल्चर और स्क्रीन की लत को लेकर पेरेंट्स की चिंता काफी ज्यादा बढ़ा दी है। इसलिए, आइए आज के इस लेख में हम एक्सपर्ट से जानते हैं कि बच्चों में इन चीजों की लत की पहचान कैसे करें? 

दिल्ली-NCR के गाजियाबाद में एक साथ आत्महत्या करने वाली 3 सगी नाबालिग बहनों (Ghaziabad triple suicide case) की खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल चुकी है। कम उम्र में एक साथ सुसाइड करने के कारणों को जानने के बाद लोगों में आज की जनरेशन को लेकर चिंता काफी ज्यादा बढ़ गई है। न्यूज चैनल से लेकर सोशल मीडिया साइट्स हर जगह इन बहनों की मौत की खबर आग की तरह फैल गई है। उनके कमरे में मिली छोटी-सी डायरी इस बात की साफ गवाही दे रही है कि उनका लगाव कोरियन कल्चर (Korean culture addiction) से कितना ज्यादा जुड़ा हुआ था। कोरिया की रंगीन दुनिया के सपने, पसंदीदा कलाकार और वहां के लड़कों के लिए उनका लगाव साफ देखने को मिल रहा है। इस डायरी में इस बात को साफ लिखा है कि परिवार की ओर से उनकी इस ख्याली दुनिया और कोरियन कल्चर से दूरी बनाने के लिए मजबूर करने के कारण उन्होंने सुसाइड जैसे कदम उठाया है।

कोरियन कल्चर के कारण जान गवाने की इस खबर ने दुनियाभर में कई पेरेंट्स की चिंता बढ़ा दी है। वर्तमान समय में बच्चों में कई तरह के गेम्स और स्क्रीन की लत (Mobile addiction suicide case) को लेकर पेरेंट्स काफी परेशान रहते हैं। इतना ही नहीं, कई पेरेंट्स इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि वे अपने बच्चों में कोरियन कल्चर या अन्य लत जैसे स्क्रीन या किसी सेलेब को लेकर बढ़ते क्रेज को कैसे पहचानें, ताकि उनकी लत पर समय रहते काबू पा सकें और उन्हें वास्तविक दुनिया से रूबरू करवा सके। इसलिए आइए आज के इस लेख में हम माइंडवेल काउंसिल की फाउंडर, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल से जानते हैं कि बच्चों में लत की पहचान कैसे करें?

बच्चे में होने वाली किसी भी लत की पहचान कैसे करें?

एक्सपर्ट अर्चना सिंघल का कहना है कि, बच्चों में डिजिटल लत या किसी अन्य लत के जोखिम संकेतों को जल्दी पहचाना (digital addiction and mental health) जा सकता है और माता-पिता बच्चों की आदतों को हेल्दी आदतों में बदलने में उनकी मदद कर सकते हैं। इसलिए, अगर आपके बच्चों में ये आदतें दिखें तो समझ जाएं उन्हें भी डिजिटल लत लग चुकी है:

1. स्क्रीन से हटाने पर उनके मूड में बदलाव

बच्चों में लट के सबसे साफ संकेतों में से एक है स्क्रीन पर स्क्रीन पर इमोशनल तरीके से निर्भर रहना। इसका मतलब है कि जब आप अपने बच्चे को मोबाइल फोन, टैबलेट, कंप्यूटर या गेम्स तक सीमित एक्सेस मिलता है तो इसके कारण बच्चा बहुत चिड़चिड़ा, गुस्सा या बेचैन होने लगता है। उनके फोन लेने पर नखरे, मूड स्विंग्स या इमोशनल ब्रेकडाउन जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। यह स्थिति दिखाती है कि बच्चे बिना स्क्रीन के अपनी भावनाओं पर कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। यह लत आमतौर पर बच्चे में बात करने, खेलने या लिखने की स्थिति की जगह ले लेती है।

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2. बातचीत या खेलकूद में कम दिलचस्पी

ऑफलाइन एक्टिविटी में दिलचस्पी न होना या कम होना भी बच्चों में डिजिटल या स्क्रीन की लत को दिखाता है। जिन बच्चों को पहले घर के बाहर खेलने, पढ़ने, पेंटिंग करने और अपने दोस्तों या पेरेंट्स के साथ मिलने में मजा आता था, वे अब इन सभी चीजों से दूरी बनाने लगे हैं। वे दूसरे लोगों से मिलने-जुलने के स्थान पर अकेले अपने डिवाइस के साथ रहना पसंद करते हैं। ऐसे में बच्चों में अकेलेपन की आदत कम्युनिकेशन के लेवल को खराब कर सकती है।

3. नींद में कमी

बच्चे के नींद के पैटर्न में भी बदलाव आना उनमें स्क्रीन या गेम्स की लत का संकेत हो सकता है। स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल खासकर देर रात में बच्चे की नेचुरल नींद को खराब कर सकता है। पेरेंट्स अपने बच्चों में देख सकते हैं कि वे रात में देर से सोते हैं, उन्हें सुबह उठने में दिक्कत होती है या वे नींद में रहते हैं या फिर उनका दिमाग थका हुआ महसूस होता है। बच्चों में नींद की कमी का असर उनकी याददाश्त, इमोशनल स्टेबिलिटी और फोकस करने की स्थिति पर भी बुरी तरह पड़ता है, जिसके कारण बच्चों में चिड़चिड़ापन और बेचैनी हो सकती है।

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4. पढ़ाई में खराब परफॉर्मेंस

बच्चे के पढ़ाई में गिरावट भी उनमें स्क्रीन की लत का एक बड़ा संकेत है। जैसे-जैसे बच्चों में स्क्रीन की लत बढ़ती है, बच्चे पढ़ाई के दौरान डिस्ट्रैक्ट होने लगते हैं, होमवर्क पूरा नहीं करते या फिर सीखने में उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं रह जाती है। ऐसे में अक्सर टीचर बच्चों में फोकस की कमी, पढ़ाई में मन न लगना या खराब परफॉर्मेंस के बारे में बताना भी इस बात का संकेत है कि बच्चे को स्क्रीन की लत लग गई है।

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बच्चों के लिए ज्यादा स्क्रीन पर रहने के नुकसान

एक्सपर्ट के अनुसार, बच्चों में जो शारीरिक और व्यवहारिक बदलाव दिखते हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चों में कई तरह के नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

  • बच्चों में बार-बार सिरदर्द की समस्या
  • आंखों में जलन या पानी आना
  • बॉडी का खराब पोस्चर
  • शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण स्वास्थ्य समस्याएं

स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने के कारण बच्चे अपना ख्याल रखना या खानपान पर ध्यान देना बंद कर देते हैं, जिसके कारण उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

बच्चों में स्क्रीन लत कैसे कम करें?

बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:

  • बच्चों को सजा देने के स्थान पर खुलकर बात करें
  • इमोशनल ट्रिगर और रियलिस्टिक स्क्रीन बाउंड्री पर ध्यान दें
  • बच्चों के साथ इंडोर गेम्स, आउटडोर ट्रिप्स और फैमिली टाइम गुजारने की कोशिश करें
  • बच्चों में इमोशनल ट्रिगर नजर आने पर किसी प्रोफेशनल की मदद लें।

निष्कर्ष

पेरेंट्स को यह याद रखना बहुत जरूरी है कि बच्चों में कोई भी लत तुरंत नहीं लगती है। इसी तरह से किसी भी लत को तुरंत छुड़ाना भी मुश्किल हो सकता है। इसलिए, बच्चों में डिजिटल ओवरयूज की समस्या से निपटने के दौरान आप लगातार और अपनी भावनाओं पर कंट्रोल रखते हुए बच्चों की स्क्रीन की लत को कम करने की कोशिश में लगे रहें। बच्चों पर प्रेशर डालने के स्थान पर उन्हें स्क्रीन टाइम के नुकसान बताएं और उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं, ताकि इस लत को कम किया जा सके।
Image Credit: Freepik 

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Modified By : Katyayani Tiwari
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