अचानक बोलने में परेशानी होने लगे, चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो जाए या हाथ-पैर में कमजोरी महसूस होने लगे, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। कई बार स्ट्रोक जैसे लक्षण अचानक दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ मिनटों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं। ऐसे में लोग अक्सर राहत की सांस लेकर डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं समझते। World Stroke Day 2026 के मौके पर यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि अगर अचानक बोलने, देखने, चलने या हाथ-पैर हिलाने में परेशानी हुई है, तो इसे सामान्य मानकर इंतजार करना सही नहीं है। समय पर जांच से स्ट्रोक के कारणों का पता लगाने और आगे के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
मिनी स्ट्रोक के बाद तुरंत क्या करें?
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, मिनी स्ट्रोक को ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) भी कहा जाता है। इसमें दिमाग के किसी हिस्से तक खून की आपूर्ति कुछ समय के लिए बाधित हो जाती है। इसके कारण स्ट्रोक जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन वे अक्सर कुछ मिनटों में ठीक हो जाते हैं। मिनी स्ट्रोक में आमतौर पर मस्तिष्क यानी दिमाग को स्थायी नुकसान नहीं होता, लेकिन इसके लक्षण वास्तविक स्ट्रोक जैसे हो सकते हैं। घर पर केवल लक्षणों के आधार पर दोनों के बीच अंतर करना संभव नहीं है। इसलिए लक्षण ठीक होने के बाद भी इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
- अगर किसी व्यक्ति को अचानक बोलने में परेशानी, चेहरे का एक तरफ झुकना, हाथ-पैर में कमजोरी या देखने में समस्या हो, तो तुरंत हॉस्पिटल में दिखाना चाहिए।
- लक्षण ठीक हो जाने पर भी अस्पताल जाना जरूरी है। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने के बजाय एंबुलेंस की मदद लेना बेहतर होता है।
- लक्षण शुरू होने का समय याद रखें और डॉक्टर को बताएं कि परेशानी कितनी देर तक रही। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दूसरी दवा न लें, क्योंकि दिमाग में ब्लीडिंग होने पर कुछ दवाएं नुकसान पहुंचा सकती हैं।
- डॉक्टर जरूरत के अनुसार न्यूरोलॉजिकल जांच, ब्रेन इमेजिंग, ब्लड टेस्ट और हार्ट या ब्लड वैसेल्स से संबंधित चेकअप करा सकते हैं।
साल 2026 में NIH की Bookshelf में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, TIA यानी मिनी स्ट्रोक के इलाज का मुख्य उद्देश्य भविष्य में होने वाले स्ट्रोक के खतरे को कम करना है। TIA के तुरंत बाद शुरुआती इलाज शुरू करने से भविष्य में स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है, क्योंकि शुरुआती दिनों में इसका जोखिम बहुत ज्यादा होता है। अस्पताल में तुरंत जांच करके खून की नसों की स्थिति का पता लगाना और एट्रियल फाइब्रिलेशन जैसी समस्याओं की समय पर पहचान करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, सही खान-पान, नियमित एक्सरसाइज, एंटीप्लेटलेट, स्टैटिन और ब्लड प्रेशर की दवाओं का एक साथ उपयोग करने से स्ट्रोक के खतरे को 80% से 90% तक घटाया जा सकता है।
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किन लोगों को मिनी स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है?
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और हार्ट की कुछ बीमारियां स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकती हैं। उम्र बढ़ने के साथ भी खतरा बढ़ता है, हालांकि कम उम्र के लोगों को भी स्ट्रोक हो सकता है। जिन लोगों को पहले ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक या स्ट्रोक हो चुका है, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए। नियमित हेल्थ चेकअप, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर कंट्रोल रखना, धूम्रपान छोड़ना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना खतरा कम करने में मदद कर सकता है।
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निष्कर्ष
स्ट्रोक जैसे लक्षण कुछ मिनटों में ठीक हो जाएं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह टल गया है। यह मिनी स्ट्रोक यानी TIA हो सकता है, जो भविष्य में गंभीर स्ट्रोक आने का संकेत देता है। चेहरे का अचानक झुकना, बोलने में परेशानी या हाथ-पैर में कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें, भले ही वे अपने आप ठीक हो जाएं।
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FAQ
क्या स्ट्रोक नींद के दौरान भी हो सकता है?
स्ट्रोक के लक्षण नींद के दौरान शुरू हो सकते हैं। जागने पर अचानक कमजोरी, बोलने में परेशानी या शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन महसूस हो, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें।क्या स्ट्रोक का खतरा परिवार में किसी को होने से बढ़ता है?
परिवार में स्ट्रोक का इतिहास जोखिम को प्रभावित कर सकता है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट संबंधी बीमारियां भी जोखिम बढ़ाती हैं।क्या स्ट्रोक होने पर व्यक्ति बेहोश हो जाता है?
आमतौर पर स्ट्रोल में व्यक्ति होश में रहता है, लेकिन हर स्थिति एक जैसी नहीं होती।
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Oct 29, 2026 11:02 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti
