स्ट्रोक के बाद अगर किसी व्यक्ति के हाथ-पैर काम करना बंद कर दें, शरीर के एक तरफ कमजोरी आ जाए या वह चलने-फिरने में असमर्थ हो जाए, तो परिवार के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या मरीज पहले की तरह सामान्य जिंदगी जी पाएगा? World Stroke Day 2026 के मौके पर यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि स्ट्रोक के बाद दोबारा चल पाना संभव हो सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि मस्तिष्क को कितना नुकसान पहुंचा है, मरीज का इलाज कितनी जल्दी शुरू हुआ और उसे किस तरह का रिहैबिलिटेशन मिल रहा है। आइए डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी से विस्तार से समझते हैं कि स्ट्रोक के बाद चलने-फिरने की क्षमता वापस पाने में किन बातों की भूमिका होती है।
क्या स्ट्रोक के बाद दोबारा चलना संभव है?
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, मस्तिष्क यानी दिमाग शरीर की सभी एक्टिविटीज को कंट्रोल करता है। चलना, हाथ उठाना, चीजों को पकड़ना और बैलेंस बनाए रखना जैसी एक्टिविटीज के लिए दिमाग और शरीर के बीच सही तालमेल जरूरी है। जब स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क के उन हिस्सों को नुकसान पहुंचता है, जो मसल्स की एक्टिविटीज को कंट्रोल करते हैं, तो व्यक्ति को हाथ-पैर हिलाने में परेशानी हो सकती है। कई मरीजों में शरीर के एक तरफ कमजोरी या लकवे जैसी स्थिति हो जाती है।
- स्ट्रोक के बाद मरीज का दोबारा चल पाना संभव है लेकिन हर मरीज की रिकवरी एक जैसी नहीं होती। कुछ लोग इलाज और नियमित रिहैबिलिटेशन की मदद से धीरे-धीरे चलने लगते हैं, जबकि कुछ मरीजों को चलने के लिए लंबे समय तक सहारे या खास उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है।
- रिकवरी इस बात पर निर्भर करती है कि स्ट्रोक कितना गंभीर था, मस्तिष्क का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ, इलाज कितनी जल्दी मिला और मरीज की हेल्थ कंडीशन कैसी है। उम्र, पहले से मौजूद बीमारियां और रिहैबिलिटेशन भी रिकवरी को प्रभावित कर सकती हैं।
- स्ट्रोक के बाद रिकवरी का समय हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। कई मरीजों में पहले कुछ हफ्तों और महीनों के दौरान तेजी से सुधार दिखाई देता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इसके बाद रिकवरी रुक जाती है। सही ट्रेनिंग और नियमित अभ्यास से लंबे समय तक भी सुधार हो सकता है।
- शुरुआत में यदि मरीज अपने हाथ-पैर बहुत कम हिला पा रहा है, तो भी उसकी रिकवरी की संभावना का आकलन केवल इसी एक लक्षण से नहीं किया जा सकता। इसलिए नियमित फॉलो-अप प्लान जरूरी है।
साल 2023 में Life जर्नल में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, स्ट्रोक से उबरना एक लंबी प्रोसेस है। हालांकि शुरुआती महीनों में नेचुरल सुधार होता है, लेकिन सही समय पर सही इलाज और थेरेपी लेकर मरीज इस अवधि के बाद भी अपनी मोटर क्षमता में सुधार कर सकते हैं। इस सफर में सेहत की देखभाल, समय पर इलाज, परिवार और देखभाल करने वालों का साथ और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बहुत जरूरी है।
Walk Again After Stroke
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स्ट्रोक के बाद रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि स्ट्रोक के बाद चलने-फिरने की क्षमता बेहतर करने में फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन की अहम भूमिका होती है। फिजियोथेरेपिस्ट मरीज की स्थिति के अनुसार ऐसे अभ्यास करवाते हैं, जिनसे मसल्स की ताकत, बैलेंस और शरीर के तालमेल को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
शुरुआत में मरीज को बिस्तर पर बैठने, शरीर का बैलेंस बनाए रखने और हाथ-पैरों को कंट्रोल तरीके से हिलाने का अभ्यास कराया जा सकता है। इसके बाद मरीज की क्षमता के अनुसार खड़े होने, सहारे से कदम उठाने और धीरे-धीरे चलने की ट्रेनिंग दी जाती है। कुछ मरीजों को चलने के लिए वॉकर, छड़ी की जरूरत पड़ सकती है। इनका इस्तेमाल एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार करना चाहिए। मरीज को जबरदस्ती चलाने या बिना सहारे खड़ा करने से गिरने और चोट लगने का खतरा हो सकता है।
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निष्कर्ष
स्ट्रोक के बाद हाथ-पैर काम करना बंद कर दें, तो भी कुछ मरीजों में दोबारा चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता वापस आ सकती है। हालांकि, रिकवरी इस बात पर निर्भर करती है कि मस्तिष्क यानी दिमाग को कितना नुकसान हुआ है और मरीज को समय पर इलाज के साथ कितना प्रभावी रिहैबिलिटेशन मिल रहा है। इसलिए स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें और इलाज में देरी न करें। इसके बाद डॉक्टर की निगरानी में फिजियोथेरेपी, नियमित अभ्यास और परिवार का सहयोग मरीज की रिकवरी में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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FAQ
क्या स्ट्रोक के बाद मरीज को दोबारा स्ट्रोक हो सकता है?
स्ट्रोक के बाद दोबारा स्ट्रोक होने का जोखिम बना रह सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज कंट्रोल रखना तथा नियमित फॉलो-अप कराना जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।क्या स्ट्रोक के बाद बोलने में परेशानी होने पर मरीज फिर से बोलना सीख सकता है?
कुछ मरीजों की बोलने और भाषा समझने की क्षमता में सुधार हो सकता है। इसके लिए स्पीच और लैंग्वेज थेरेपी मददगार हो सकती है।
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Oct 28, 2026 18:16 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti
