Tue Nov 3, 2026 | 05:59 PM IST

Medically Reviewed by Dr Abhinav Gupta , Consultant Neurologist & Director - Neurology Bhav Neuro Centre, Ghaziabad

क्या कम उम्र में भी स्ट्रोक आ सकता है? इन जोखिम कारकों को न करें नजरअंदाज

कम उम्र में भी स्ट्रोक आ सकता है, इसलिए इसके प्रति लापरवाही न करें। विशेषकर, जो लोग डेस्क जॉब करते हैं, वे अधिक सावधान हो जाएं। इस लेख में हम आपको स्ट्रोक के कारणों के बारे में बता रहे हैं। जानें, विस्तार से।
क्या कम उम्र में भी स्ट्रोक आ सकता है? इन जोखिम कारकों को न करें नजरअंदाजक्या कम उम्र में भी स्ट्रोक आ सकता है? इन जोखिम कारकों को न करें नजरअंदाज

एक समय तक यही माना जाता था कि स्ट्रोक सिर्फ बुजुर्गों में होने वाली समस्या है, लेकिन हाल के सालों में युवाओं में स्ट्रोक के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं। सवाल है, ऐसा क्यों हो रहा है? अधिकतर मामलों में यह माना जाता है कि खराब जीवनशैली और खान-पान की बुरी आदतें इसमें इजाफा कर रही हैं।

इस बारे में ग्रेटर नोएडा स्थित सर्वोदय अस्पताल में Director-Neurology डॉ. अभिनव गुप्ता बताते हैं, "हाल के सालों में युवाओं, खासकर 18 से 50 साल की उम्र के बीच लोगों की जीवनशैली बहुत खराब हो चुकी है। ये फिजिकल वर्कआउट बिल्कुल नहीं करते हैं, लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहते हैं और प्रोसेस्ड फूड का सेवन अधिक करते हैं। इस तरह की तमाम चीजें स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाती हैं।"

क्या कहती है स्टडी?

साल 2023 में Journal of Clinical Medicine में प्रकाशित एक रिव्यू आर्टिकल के अनुसार, स्ट्रोक अब केवल वृद्धों की बीमारी नहीं रही। युवाओं (विशेष रूप से 18 से 45 वर्ष) में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो कुल स्ट्रोक के लगभग 10 फीसदी से 14 फीसदी तक हैं। इस रिव्यू आर्टिकल में आगे बताया गया है, 35 वर्ष से कम आयु वर्ग में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस्केमिक स्ट्रोक का जोखिम काफी अधिक देखा गया है, जिसका मुख्य संबंध हार्मोनल कारणों, गर्भावस्था और माइग्रेन से है।

कम उम्र में स्ट्रोक आने के जोखिम कारक

Risk Factors Of Stroke At Young AdultsRisk Factors Of Stroke At Young Adults

मेटाबोलिक जोखिम कारकों में बढ़ोतरी

डॉ. अभिनव गुप्ता बताते हैं, "हाई ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और मोटापा जैसी समस्याएं (जो पहले केवल अधिक उम्र में देखी जाती थीं), अब युवाओं में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जर्नल Stroke के अनुसार, मेटाबोलिक समस्याओं के बढ़ने के कारण युवाओं में स्ट्रोक का जोखिम बढ़ रहा है। दरअसल, मेटाबोलिक समस्याओं के कारण ब्लड वैसल्स डैमेज हो जाती हैं, और ब्लड क्लॉट्स बनने का रिस्क बढ़ जाता है। ये स्ट्रोक का कारण भी बनते हैं।"

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सुस्त जीवनशैली

डॉ. अभिनव गुप्ता के अनुसार, "डेस्क जॉब के बढ़ने के कारण युवाओं में फिजिकल एक्टिविटी पूरी तरह खत्म या कम हो गई है। डेस्क जॉब का मतलब है कि एक दिन में 8 से 10 घंटे एक ही जगह पर बैठे रहना। जब आप शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहते हैं, डेस्क पर बैठे-बैठे प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, तो इसकी वजह से मोटापा बढ़ता है। यह आपकी ब्लड वेसल्स को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जो कि स्ट्रोक का एक कारण बनकर उभरता है।"

नशीले पदार्थों का सेवन और धूम्रपान

डॉ. अभिनव गुप्ता बताते हैं, "वर्किंग युवा ग्रुप में ऐसे लोगों की संख्या भी बहुत ज्यादा है, जो नशीले पदार्थों जैसे तंबाकू, निकोटीन वेपिंग, अत्यधिक शराब का सेवन करते हैं। इनका सेवन करना संपूर्ण स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। इससे धमनियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, रक्त के थक्के जमने का जोखिम तेज हो जाता है। नतीजतन, स्ट्रोक के रिस्क में भी इजाफा देखने को मिलता है।"

बढ़ता तनाव और नींद की कमी

Risk Factors Of Stroke At Young AgeRisk Factors Of Stroke At Young Age

कहने की जरूरत नहीं है कि हाल के सालों में किस तरह लोगों की जीवनशैली में नींद कम और तनाव बढ़ गया है। इस बारे में डॉ. अभिनव गुप्ता कहते हैं, "अक्सर लोग अब सोने से पहले फोन स्क्रॉल करते हैं, जिससे उन्हें समय पर नींद नहीं आती है। रात भर जगे रहते हैं और सुबह के समय हल्की झपकी लगती है। इस तरह, उनकी नींद पूरी नहीं होती है। नतीजतन, तनाव का स्तर बढ़ता है, जिससे प्रोडक्टिविटी में भी कमी आती है। इस तरह की जीवनशैली भी ब्लड फ्लो को बाधित करती है और स्ट्रोक के रिस्क को बढ़ाती है।"

वैस्कुलर संबंधी समस्या

सर्वाइकल आर्टरी डिसेक्शन (गर्दन की धमनियों में खिंचाव या फटना), पेटेंट फोरामेन ओवेल (दिल में जन्मजात छेद) या रक्त के थक्के जमने से जुड़े दुर्लभ अनुवांशिक विकार। अगर किसी को इस तरह की कोई भी समस्या है, तो उन्हें भी स्ट्रोक का रिस्क रहता है। दरअसल, इन समस्याओं के कारण रक्त के थक्के जमना, आर्टरीज का संकुचित होना और ब्लड वेसल्स का डैमेज होना जैसी परेशानियां हो सकती हैं, जो कि अपने आप में स्ट्रोक का बड़ा कारण हैं।

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स्ट्रोक के रिस्क को कैसे कम करें?

क्रम क्या करें? फायदे
1. ब्लड शुगर मैनेज करें नियमित रूप से ब्लड शुगर को मॉनिटर करें और डॉक्टर की सलाह पर उसे मैनेज करने की कोशिश करें।
2. हेल्दी डाइट लें स्ट्रोक से बचने के लिए सही डाइट लेना जरूरी है। इसमें सब्जियां, फल आदि शामिल करें।
3. एक्सरसाइज करें स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए फिजिकल वर्कआउट करना जरूरी है। इससे ब्लड फ्लो में सुधार होता है।
4. नशीले पदार्थों से दूर रहें बेहतर ब्लड फ्लो के लिए नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहना चाहिए। खासकर, शराब का सेवन बिल्कुल न करें और धूम्रपान बंद कर दें।
5. नींद जरूर लें रोजाना 7-8 घंटे की नींद जरूर लें। इस दौरान यानी गहरी नींद में बॉडी खुद को रिपेयर करती है, जिससे स्ट्रोक का जोखिम कम होता है।

निष्कर्ष

युवाओं में स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके पीछे खराब जीवनशैली सबसे बड़ी वजह है। स्ट्रोक के रिस्क को कम करने के लिए अपनी जीवनशैली में सुधार करें, डाइट में बदलाव करें और वर्कआउट जरूर करें। हां, अगर परिवार की मेडिकल हिस्ट्री में स्ट्रोक का जोखिम है, तो नियमित रूप से अपनी जांच करवाएं। इससे समय पर समस्या का पता चल सकता है और डॉक्टर की देख-रेख में स्ट्रोक के जोखिम में कमी लाई जा सकती है।

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FAQ

  • स्ट्रोक का दौरा पड़ने पर मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए गोल्डन ऑवर का समय कितना माना जाता है?

    स्ट्रोक के लक्षण दिखने के शुरुआती 3 से 4.5 घंटे को गोल्डन ऑवर माना जाता है। इस दौरान मरीज को तुरंत थक्के घोलने वाला इंजेक्शन (tPA) देकर मस्तिष्क को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।
  • क्या महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों का लंबे समय तक सेवन स्ट्रोक के रिस्क को बढ़ाता है?

    हां, एस्ट्रोजन युक्त गर्भनिरोधक गोलियां रक्त के थक्के बनने के जोखिम को बढ़ा सकती हैं, खासकर उन महिलाओं में जो स्मोकिंग करती हैं।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Nov 03, 2026 16:40 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Abhinav Gupta