Sun Oct 18, 2026 | 08:56 AM IST

Medically Reviewed by Dr Vineet Malhotra , Consultant Urologist, Andrologist & Microsurgeon

पुरुषों को फर्टिलिटी टेस्ट कब और कौन से कराने चाहिए? डॉक्टर ने दी पूरी जानकारी

जब कोई कपल बच्चे के लिए कोशिश करते हैं और एक साल के बाद भी बच्चा नहीं होता, तो पुरुषों को भी फर्टिलिटी टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। पुरुषों को फर्टिलिटी टेस्ट कब कराना चाहिए और कौन से टेस्ट होते हैं? यह जानने के लिए आप इस लेख को जरूर पढ़ें।
पुरुषों को फर्टिलिटी टेस्ट कब और कौन से कराने चाहिए? डॉक्टर ने दी पूरी जानकारी
पुरुषों को फर्टिलिटी टेस्ट कब और कौन से कराने चाहिए? डॉक्टर ने दी पूरी जानकारी

जब किसी दपंति को करीब एक साल तक कोशिश करने के बावजूद गर्भधारण नहीं होता, तो पति और पत्नी दोनों का फर्टिलिटी टेस्ट कराया जाता है। आमतौर पर माना जाता है कि गर्भधारण न होने का कारण महिलाएं ही होती है, लेकिन सच्चाई यह है कि पुरुषों की फर्टिलिटी भी गर्भधारण में बाधा बन सकती है। Lancet में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में करीब 100 में से 12 जोड़े इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे हैं। पुरुषों में बांझपन होने की समस्या 50 फीसदी तक होती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसमें जेनिटिकल समस्या, लाइफस्टाइल में बदलाव या सारे टेस्ट नॉर्मल आने के बाद भी सटीक कारण न पता चलना शामिल है। ऐसे में पुरुषों को फर्टिलिटी टेस्ट कब कराना चाहिए और कौन से टेस्ट होते हैं? इसकी जानकारी के लिए हमने Dr. Vineet Malhotra, Head of Urology, VNA Hospital, Delhi से बात की।

पुरुषों को फर्टिलिटी टेस्ट कब कराना चाहिए?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इनफर्टिलिटी पुरुष या महिलाओं के रिप्रोडेक्टिव सिस्टम से जुड़ी समस्या है। अगर किसी कपल को लगातार एक साल या इससे ज्यादा समय तक बिना किसी सुरक्षा या गर्भनिरोधक के रेगुलर संबंध बनाए जाताे है, लेकिन इसके बावजूद प्रेग्नेंसी नहीं होती, तो इस कंडीशन को बांझपन कहा जाता है।

इस बारे में Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “हालांकि, कुछ कंडीशन्स में पुरुषों को शुरुआत से ही फर्टिलिटी टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। जैसे कि अगर पहले अंडकोष की सर्जरी हुई हो, अंडकोष में चोट लगी हो, बचपन में अंडकोष नीचे न उतरा हो, वैरिकोसील की समस्या हो, कैंसर के इलाज के दौरान कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी करवाई हो या फिर इरेक्टाइल डिसफंक्शन और स्खलन से जुड़ी परेशानी हो। वैसे अच्छी बात यह है कि आजकल पुरुषों की रिप्रोडेक्टिव क्षमता को आंकने के लिए कई आधुनिक तरीके आ गए हैं। इसकी मदद से पता लगाया जाता है कि पुरुष में स्पर्म की संख्या, क्वालिटी, हार्मोन्स और लाइफस्टाइल में क्या बदलाव किए जा सकते हैं।”

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फर्टिलिटी टेस्ट कौन से होते हैं?

Dr. Vineet Malhotra के मुताबिक, “जो पुरुष बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, मोटापे से पीड़ित है, डायबिटीज, हार्मोनल असंतुलन, लंबे समय तक स्ट्रेस और कुछ दवाओं को लेने से प्रजनन क्षमता पर असर पड़ सकता है। अगर ऐसी कोई भी कंडीशन होती है, तो पुरुषों का फर्टिलिटी टेस्ट किया जाता है। मेरे पास कई पुरुष ऐसे आते हैं, जो सोचते हैं कि सिर्फ एक ब्लड टेस्ट से पूरी फर्टिलिटी का पता चल जाता है, लेकिन ऐसा नहीं होता। मैं पहले मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री चेक करता हूं। इसमें पुरानी बीमारियां, दवाइयां, लाइफस्टाइल, डाइट, स्मोकिंग, शराब, सेक्शुअल हेल्थ और फैमिली हिस्ट्री से जुड़ी बीमारियों की जानकारी लेता हूं। इसके बाद फिजिकल टेस्ट करता हूं। पुरुषों की फर्टिलिटी चेक करने के कई टेस्ट भी कराए जाते हैं।”

सीमन एनालिसिस

Dr. Vineet Malhotra के अनुसार, “पुरुषों की फर्टिलिटी जांच की शुरुआत आमतौर पर सीमन एनालिसिस से होती है। इसमें सीमन का सैंपल लेकर कई महत्वपूर्ण चीजों का एनालिसिस किया जाता है। इसमें स्पर्म काउंट, स्पर्म की गति, आकार, सीमन वॉल्यूम और स्पर्म की एक्टिविटी चेक की जाती है। हालांकि, सिर्फ एक रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं लिया जाता और इस वजह से अक्सर दो से तीन हफ्ते के अंतराल पर दो बार चेक किया जाता है, क्योंकि कई बार स्ट्रेस, दवाएं और बुखार से स्पर्म की क्वालिटी पर असर पड़ सकता है।”

हार्मोन टेस्ट

Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि अगर सीमन रिपोर्ट में स्पर्म की संख्या कम आती है या डॉक्टर को लगता है कि पुरुष में हार्मोन संबंधी समस्या है, तो कुछ ब्लड टेस्ट भी कराए जा सकते हैं। इसमें टेस्टोस्टेरोन, फोल्किल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) और LH टेस्ट शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर प्रोलैक्टिन और थायरॉयड हार्मोन की चेक भी कराई जा सकती है। हार्मोन टेस्ट से यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर स्पर्म बना रहा है या नहीं।

स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड

अगर अंडकोष में दर्द, सूजन, गांठ या वैरिकोसील जैसी समस्याएं होती है, तो स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जा सकती है। इस अल्ट्रासाउंड में अंडकोष और उसके आसपास की नसों की तस्वीर मिल जाती है, जिससे बीमारी का समय पर पता चल पाता है।

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जेनेटिक टेस्ट

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “हालांकि, इस जेनेटिक टेस्ट की जरूरत हर किसी को नहीं होती, लेकिन जिन पुरुषों के स्पर्म बिल्कुल नहीं बनते या उसकी संख्या बहुत ही ज्यादा कम होती है, तो कारयोटाइप या वाई क्रोमोजॉम माइक्रोडिलीशन टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है। इस टेस्ट से यह पता चलता है कि स्पर्म न बनने का कारण जेनेटिक तो नहीं है।”

स्पर्म डीएनए फ्रेगमिनटेशन टेस्ट

Dr. Vineet Malhotra के अनुसार, कई बार ऐसा होता है कि सीमन एनालिसिस सामान्य आता है, लेकिन फिर भी प्रेग्नेंसी नहीं हो पाती या बार-बार गर्भपात हो जाता है, तो ऐसे में डॉक्टर Sperm DNA Fragmentation Test कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे पता चलता है कि स्पर्म के डीएनए में किसी तरह का नुकसान तो नहीं हुआ है। हालांकि, इस टेस्ट की सलाह हर किसी को नहीं दी जाती, लेकिन कुछ खास मामलों में यह टेस्ट कराया जाता है।

फर्टिलिटी टेस्ट से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Dr. Vineet Malhotra के मुताबिक, जिन पुरुषों को सीमन एनालिसिस कराना होता है, उन्हें टेस्ट से दो से सात दिनों तक इजेक्शन नहीं करना चाहिए। इससे रिपोर्ट ज्यादा सटीक आती है। इसके अलावा, किसी भी टेस्ट को कराने से पहले दवाओं की जानकारी, सप्लीमेंट्स या बुखार, इंफेक्शन जैसी बीमारियों की जानकारी डॉक्टर को देनी चाहिए।

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निष्कर्ष
Dr. Vineet Malhotra पुरुषों को सलाह देते हैं कि फर्टिलिटी को बेहतर बनाने के लिए स्मोकिंग और शराब से परहेज करें। इसके अलावा, बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और नींद पूरी करें। अगर फिर भी फैमिली प्लानिंग करने में दिक्कत हो रही है, तो डॉक्टर से जरूर चेकअप कराना चाहिए, ताकि समय पर बीमारी की पहचान हो सके।

FAQ

  • शारीरिक कमियां पकड़ने के लिए कौन सा स्कैन किया जाता है?

    अगर अंडकोष के आसपास की नसों में सूजन आ जाए, तो उसे वेरिकोसील कहते हैं। यह पुरुषों में बांझपन का एक बहुत बड़ा कारण है। इसकी पहचान के लिए डॉक्टर अंडकोष का स्क्रोटल डॉपलर अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाते हैं, जिससे नसों में खून का बहाव देखा जाता है।
  • अगर पहली सीमेन रिपोर्ट खराब या असामान्य आए, तो क्या पुरुष को बांझ (Infertile) मान लेना चाहिए?

    बिल्कुल नहीं। पुरुषों के स्पर्म की क्वालिटी बुखार होने, अत्यधिक मानसिक तनाव, किसी दवा के सेवन या नींद पूरी न होने जैसी वजहों से हर हफ्ते बदल सकती है। इसलिए डॉक्टर कभी भी एक रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं लेते। सटीक नतीजे के लिए हमेशा चार से छह हफ्ते के गैप के बाद दोबारा सीमेन टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 10, 2026 19:27 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jul 10, 2026 19:27 IST

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