आज के समय में तनाव, अनहेल्दी खानपान, लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण कमर के आसपास चर्बी तेजी से बढ़ रही है। इसे सिर्फ मोटापा या खराब फिटनेस का संकेत मानना गलत है, क्योंकि यह शरीर में कई मेटाबॉलिक समस्याओं को जन्म दे सकती है। खासतौर पर कमर की चर्बी यानी विसरल फैट, शरीर में यूरिक एसिड के लेवल को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। जब शरीर में फैट ज्यादा जमा होता है, तो मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और किडनी की यूरिक एसिड को बाहर निकालने की क्षमता भी प्रभावित होती है। इससे खून में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने लगता है, जो आगे चलकर गठिया, जोड़ों में दर्द और किडनी से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। इस लेख में VNA Hospital के यूरोलॉजी, सेक्सोलॉजी और इनफर्टिलिटी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. विनीत मल्होत्रा से जानिए, कमर की चर्बी कैसे यूरिक एसिड के खतरे को बढ़ाती है और इससे बचाव के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।
कमर की चर्बी कैसे यूरिक एसिड का खतरा बढ़ाती है?
डॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि विसरल फैट वह फैट होता है जो स्किन के नीचे नहीं बल्कि लिवर, किडनी और आंतों जैसे अंगों के आसपास जमा होता है। यह फैट सिर्फ शरीर का वजन नहीं बढ़ाता, बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित करता है। खासतौर पर इसका सीधा असर शरीर में बनने वाले यूरिक एसिड पर पड़ता है। यूरिक एसिड एक वेस्ट प्रोडक्ट होता है, जो शरीर में प्यूरीन नामक तत्व के टूटने से बनता है और सामान्य स्थिति में किडनी के जरिए बाहर निकल जाता है लेकिन जब शरीर में विसरल फैट ज्यादा हो जाता है, तो यह प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है।
डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, कमर की चर्बी का सबसे बड़ा असर इंसुलिन रेजिस्टेंस पर पड़ता है। जब शरीर में ज्यादा फैट जमा होता है, तो इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता। इंसुलिन रेजिस्टेंस होने पर न सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ता है, बल्कि किडनी फंक्शन भी प्रभावित होता है। इसका सीधा असर यूरिक एसिड के लेवल पर पड़ता है, क्योंकि किडनी यूरिक एसिड को सही तरीके से फिल्टर कर बाहर नहीं निकाल पाती। इससे खून में यूरिक एसिड जमा होने लगता है, जिसे हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है। यही स्थिति आगे चलकर गाउट, जोड़ों में दर्द और किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है।
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यह प्रक्रिया एक चेन रिएक्शन की तरह काम करती है।
- पहले कमर के आसपास फैट जमा होता है।
- फिर इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है।
- इसके बाद किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
- और अंत में यूरिक एसिड बढ़ सकता है।
साल 2022 में Frontiers in Endocrinology में प्रकाशित स्टडी में पाया गया कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में जैसे-जैसे शरीर के फैट का लेवल बढ़ता है, यूरिक एसिड बढ़ने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। जिन लोगों में विसरल एडिपोसिटी इंडेक्स (VAI) का लेवल सबसे अधिक था, उनमें यूरिक एसिड की समस्या होने का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा देखा गया। यह स्टडी स्पष्ट करती है कि पुरुषों में औसतन यूरिक एसिड का लेवल महिलाओं की तुलना में ज्यादा होता है। यह रिसर्च यह सुझाव देती है कि यदि हम अपने शरीर की आंतरिक चर्बी यानी इंटरनल फैट और मोटापे पर कंट्रोल रखें, तो यूरिक एसिड के लेवल को बढ़ने से रोका जा सकता है।
साल 2021 में Lipids in Health and Disease जर्नल में प्रकाशित हुई स्टडी के अनुसार, कमर की परिधि (Waist Circumference) और यूरिक एसिड (UA) दोनों ही भविष्य में इंसुलिन रेजिस्टेंस के जोखिम से जुड़े हैं। इस स्टडी में पाया गया कि शरीर में चर्बी का जमाव यूरिक एसिड के लेवल में बढ़ोतरी से पहले होता है। महिलाओं में यूरिक एसिड, कमर की परिधि और ट्राइग्लिसराइड ग्लूकोज इंडेक्स के बीच एक मध्यस्थ के रूप में काम करता है।
प्राथमिक चिकित्सा में कमर की परिधि (Waist Circumference) की नियमित जांच से उन संभावित रोगियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है जिन्हें आगे ब्लड टेस्ट और मेटाबॉलिक टेस्ट की जरूरत है।
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यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण
यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या हमेशा शुरुआती स्टेज में स्पष्ट लक्षण नहीं देती, लेकिन जब इसका लेवल ज्यादा बढ़ जाता है, तो शरीर संकेत देने लगता है। सबसे आम लक्षण जोड़ों में दर्द है, खासकर पैर के अंगूठे में। यह दर्द अचानक शुरू हो सकता है और काफी तेज होता है।
- घुटनों, टखनों, उंगलियों और कलाई में सूजन और गर्माहट महसूस होना भी यूरिक एसिड बढ़ने के आम संकेत हैं।
- कई लोगों को सुबह उठते समय जोड़ों में जकड़न महसूस होती है, जो धीरे-धीरे कम होती है। कुछ मामलों में रात के समय अचानक तेज दर्द शुरू हो जाता है, जिससे नींद में भी समस्या होती है।
- यूरिक एसिड बढ़ने पर शरीर में थकान, भारीपन और कमजोरी भी महसूस हो सकती है।
- अगर यह लंबे समय तक यूरिक एसिड अनियंत्रित रहे, तो किडनी पर असर पड़ सकता है और किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है। इसके लक्षणों में पेशाब में जलन, कमर के निचले हिस्से में दर्द और बार-बार पेशाब आना शामिल हैं।
- अगर आपको बार-बार जोड़ों में दर्द, सूजन या अचानक तेज दर्द की समस्या हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें और समय पर डॉक्टर से सलाह लें।
यूरिक एसिड कम करने के लिए कितना पानी पिएं?
यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में पानी की भूमिका बेहद अहम होती है, क्योंकि यह शरीर से विषैले तत्व और अतिरिक्त यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से किडनी बेहतर तरीके से काम करती है और यूरिक एसिड का निष्कासन आसान हो जाता है।
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- एक हेल्दी व्यक्ति को दिनभर में लगभग 2.5 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए। हालांकि यह मात्रा व्यक्ति के वजन, मौसम, फिजिकल एक्टिविटी के अनुसार बदल सकती है।
- गर्मी के मौसम या ज्यादा पसीना आने की स्थिति में पानी की जरूरत और बढ़ जाती है।
- अगर आपका यूरिक एसिड लेवल बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर ज्यादा पानी पीने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर में यूरिक एसिड जमा न हो।
- पानी को एक साथ ज्यादा मात्रा में पीने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पीना ज्यादा फायदेमंद होता है। सुबह उठकर खाली पेट 1-2 गिलास पानी पीना भी किडनी को एक्टिव करने में मदद करता है।
- सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे हेल्दी ड्रिंक्स भी फायदेमंद हो सकते हैं। ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में सहायक होते हैं।
अगर वजन कम हो जाए तो क्या यूरिक एसिड कम हो जाएगा?
वजन और यूरिक एसिड के लेवल के बीच गहरा संबंध माना जाता है। डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, शरीर में ज्यादा वजन या मोटापा यूरिक एसिड बढ़ने का एक प्रमुख कारण हो सकता है। जब शरीर में फैट ज्यादा होता है, तो यह मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है, जिससे यूरिक एसिड का प्रोडक्शन बढ़ सकता है और उसका निष्कासन (excretion) कम हो जाता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से वजन कम करता है, तो इससे यूरिक एसिड के लेवल में कमी आ सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वजन कम होने से इंसुलिन रेजिस्टेंस घटता है, जिससे किडनी बेहतर तरीके से यूरिक एसिड को बाहर निकाल पाती है।
डॉ. मल्होत्रा यह भी बताते हैं कि अचानक या बहुत तेजी से वजन कम करना भी नुकसानदायक हो सकता है। क्रैश डाइट या लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में यूरिक एसिड अस्थायी रूप से बढ़ सकता है, इसलिए वजन घटाने का तरीका बैलेंस्ड और डॉक्टर की सलाह के अनुसार होना चाहिए।

यूरिक एसिड का सामान्य लेवल क्या होता है?
डॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि शरीर में यूरिक एसिड का एक सामान्य लेवल होता है, जिसे बनाए रखना जरूरी है ताकि गाउट या किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा न बढ़े। डॉ. विनीत मल्होत्रा जानकारी देते हैं, ''पुरुषों में यूरिक एसिड का सामान्य लेवल लगभग 3.4 से 7.0 mg/dL के बीच माना जाता है, जबकि महिलाओं में यह थोड़ा कम होता है, यानी 2.4 से 6.0 mg/dL के बीच। बच्चों में यह लेवल उम्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।''
जब शरीर में यूरिक एसिड का लेवल इस सामान्य सीमा से ऊपर चला जाता है, तो इस स्थिति में यूरिक एसिड खून में जमा होने लगता है और क्रिस्टल के रूप में जोड़ों में जमा होकर दर्द और सूजन पैदा कर सकता है, जिसे आम भाषा में गाउट कहा जाता है। हालांकि, सिर्फ बढ़ा हुआ यूरिक एसिड हमेशा लक्षण नहीं देता। कई लोगों में इसका लेवल ज्यादा होने के बावजूद कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह सुरक्षित है। इसलिए, अगर आपकी रिपोर्ट में यूरिक एसिड का लेवल ज्यादा आता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यूरिक एसिड की नियमित जांच करवाना भी जरूरी है, खासकर अगर आपको मोटापा, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं।
डॉक्टर से कब मिलें
डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, कई लोग यूरिक एसिड बढ़ने के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। अगर आपको बार-बार जोड़ों में दर्द, पैर के अंगूठे में दर्द, घुटनों या टखनों में सूजन और तेज दर्द महसूस होता है, तो यह हाई यूरिक एसिड का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, अगर आपको सुबह उठते समय जोड़ों में जकड़न महसूस होती है या अचानक रात में तेज दर्द शुरू हो जाता है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉ. विनीत मल्होत्रा सलाह देते हैं कि जिन लोगों का वजन ज्यादा है, कमर के आसपास चर्बी अधिक है या जिन्हें पहले से टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें नियमित रूप से यूरिक एसिड की जांच करानी चाहिए। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि इन स्थितियों में यूरिक एसिड बढ़ने का खतरा ज्यादा होता है।

निष्कर्ष
डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, पेट के आसपास जमा होने वाला विसरल फैट शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ सकता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और धीरे-धीरे यूरिक एसिड का लेवल भी बढ़ सकता है। इस पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है क्योंकि यह एक चेन रिएक्शन की तरह काम करती है, पहले वजन बढ़ता है, फिर इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है, उसके बाद किडनी प्रभावित होती है और अंत में यूरिक एसिड बढ़ सकता है। नियमित एक्सरसाइज, बैलेंस डाइट, पर्याप्त पानी पीना और वजन को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। साथ ही, तेजी से वजन घटाने के बजाय धीरे-धीरे और हेल्दी तरीके से वजन कम करना ज्यादा फायदेमंद होता है।
FAQ
बॉडी में यूरिक एसिड बढ़ने के क्या लक्षण हैं?
जब किसी व्यक्ति के शरीर में यूरिक एसिड बढ़ता है तो शुरुआत में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन धीरे-धीरे परेशानी बढ़ सकती है। यूरिक एसिड ज्यादा बढ़ने पर व्यक्ति को जोड़ों में दर्द, खासकर पैरों के अंगूठे, घुटनों और टखनों में महसूस हो सकता है। इसके अलावा सूजन और जलन भी महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में लोगों को बार-बार पेशाब आना या पेशाब में जलन भी हो सकती है।यूरिक एसिड बढ़ने से शरीर में क्या परेशानी होती है?
यूरिक एसिड बढ़ने से शरीर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि गाउट, जिसमें जोड़ों में तेज दर्द और सूजन होती है। इसके अलावा किडनी स्टोन बनने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे पेशाब करते समय जलन या दर्द हो सकता है। लंबे समय तक हाई यूरिक एसिड रहने से शरीर में सूजन, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।यूरिक एसिड को ठीक करने का तरीका क्या है?
यूरिक एसिड को जल्दी कम करने के लिए सबसे पहले फिटनेस पर ध्यान देना जरूरी है और खानपान में भी सुधार करना चाहिए। प्रोटीन में हाई प्यूरीन वाले फूड्स का सेवन कम करें। हरी सब्जियां, फल और लो-फैट डेयरी को रोजाना की डाइट में शामिल करें। डॉक्टर की सलाह से दवाएं भी ली जा सकती हैं।कमर की चर्बी कम करने के लिए क्या करना चाहिए?
कमर की चर्बी कम करने के लिए बैलेंस डाइट के साथ रोजाना 30-40 मिनट तक कार्डियो एक्सरसाइज करना सबसे जरूरी है, जैसे तेज चलना, दौड़ना या साइकिलिंग करें। पेट की चर्बी घटाने के लिए प्लैंक और योगासन भी फायदेमंद होते हैं। जंक फूड, मीठा और तली-भुनी चीजें कम करें।मोटापा बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
मोटापा बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें ज्यादा कैलोरी वाला भोजन और फिजिकली एक्टिव न रहना इसका प्रमुख कारण है। जंक फूड, शुगर ड्रिंक्स और तली-भुनी चीजों का रोजाना ज्यादा सेवन वजन बढ़ाता है। इसके अलावा पर्याप्त नींद न लेना और ज्यादा तनाव भी हार्मोनल असंतुलन पैदा करते हैं, जिससे वजन बढ़ता है।
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Apr 17, 2026 13:04 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Apr 17, 2026 13:04 IST
Modified By : Akanksha TiwariApr 17, 2026 13:04 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra