शायद ही कभी कोई मस्सों को लेकर चिंतित होता है। हमें लगता है कि मस्सों का होना पूरी तरह प्राकृतिक है और यह किसी समस्या का संकेत नहीं है। हालांकि, कई बार मस्सों को इंसुलिन रेजिस्टेंस से जोड़कर देखा जाता है। चूंकि, मस्सों को लेकर दो तरह की राय है, इसलिए यह जानना जरूरी है कि मस्से आखिर होते क्यों हैं और क्या वाकई इसका इंसुलिन रेजिस्टेंस से कोई संबंध है? इस बारे में जानने के लिए हमने राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से बात की।
मस्से और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच कनेक्शन
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भले ही मस्से प्राकृतिक महसूस हों, लेकिन अगर किसी को अचानक मस्से हो जाते हैं और बार-बार होते हैं, तो इसे सामान्य नहीं समझना चाहिए। इसका सीधा-सीधा संबंध इंसुलिन रेजिस्टेंस से है। डॉ. करुणा मल्होत्रा इसे अपने शब्दों में समझाती हैं, "आमतौर पर मस्से गर्दन, बगल या पलकों के आसपास होते हैं। लोगों के अनुसार यह महज कॉस्मेटिक समस्या होती है, जबकि यह सच नहीं है। मस्से और इंसुलिन रेजिस्टेंस आपस में कनेक्टेड हैं। दरअसल, जब बॉडी सेल्स इंसुलिन के प्रति सही तरह से प्रतिक्रिया नहीं देती हैं, तो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए पैनक्रियाज अधिक मात्रा में इंसुलिन प्रोड्यूस करता है। ऐसे में ब्लड में इंसुलिन की मात्रा बढ़ जाता है, जो कि मस्से के होने के पीछे का मुख्य कारण बनता है।" डॉ. करुणा मल्होत्रा आगे बताती हैं कि अगर किसी को बार-बार मस्से होने की समस्या नजर आए, तो इसे हल्के में न लें। संभवतः आपकी बॉडी में इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत हो रही है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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मस्सों के लिए कब जाएं डॉक्टर के पास?
वैसे तो मस्से होने का कोई विशेष नुकसान नहीं है। हालांकि, ये दिखने में बुरे नजर आते हैं, इसलिए कई लोग काॅस्मेटिक सर्जरी के जरिए मस्से निकलवा देते हैं। बहरहाल, सवाल यह है कि मस्सों के लिए डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? American Academy of Dermatology Association के अनुसार, मस्से किसी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और यह हमारी स्किन के कलर के ही नजर आते हैं। हालांकि, कुछ लोगों में यह अधिक डार्क होता है और कुछ लोगों में इसका रंग लाल नजर आता है। बहरहाल, अगर मस्से से खून आने लगे, उसमें जलन और दर्द हो, आंखों के आसपास मस्से होने लगे और अचानक उन्हें छूने पर असहनीय तकलीफ हो, तो इन स्थितियों को इग्नोर न करें। ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर मस्सों को रिमूव किया जा सकता है।
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डॉक्टर की सलाह
इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्या अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, सिर्फ मस्सों को इस समस्या का संकेत समझने के बजाय त्वचा पर नजर आ रहे अन्य संकेतों पर भी गौर करें, जैसे गर्दन या बगल की त्वचा का काला, पेट के आसपास जिद्दी फैट का जमा होना और बार-बार मीठा खाने की क्रेविंग होना। ये सब इंसुलिन रेजिस्टेंस होने का संकेत हैं। बहरहाल, स्किन से जुड़ी कोई भी प्रॉब्लम हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें।
निष्कर्ष
इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या में मस्से हो सकते हैं। हालांकि, अन्य लक्षण भी नजर आते हैं। अगर आपके साथ ऐसा है, तो खुद से किसी नतीजे पर न पहुंचे। बेहतर होगा कि आप डॉक्टर के पास जाएं और अपनी संपूर्ण जांच करवाएं। अगर मस्से रिमूव करवाने हैं, तो भी डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
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FAQ
क्या सभी तरह के मस्से डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हैं?
नहीं, यह कहना पूरी तरह गलत होगा कि मस्से डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या को कंफर्म करने के लिए डॉक्टर के पास जाएं और अपनी जांच करवाएं।इंसुलिन ठीक होने पर क्या मस्से गायब हो जाते हैं?
नहीं, इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या से रिकवरी के बावजूद मस्से पूरी तरह गायब नहीं होते हैं। हालांकि, उनका आकार छोटा हो जाता है और नए मस्से बनना बंद हो जाते हैं।
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Jun 26, 2026 11:16 IST
Modified By : Meera Tagore Jun 26, 2026 11:16 IST
Modified By : Meera TagoreJun 26, 2026 11:16 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra