Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

कमजोर हड्डियों से लेकर धीमे मेटाबोलिज्म तक, मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में हो सकते हैं ये 7 बदलाव

मेनोपॉज के बाद शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिनकी जानकारी महिलाओं को कम ही होती है। अगर आप भी इन बदलावों के बारे में नहीं जानती हैं, तो इस लेख को जरूर पढ़ें।

मेनोपॉज हर महिला के जीवन का एक स्वाभाविक चरण है, लेकिन इसके बाद शरीर में होने वाले बदलाव कई बार महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान कर सकते हैं। मासिक धर्म बंद होने के साथ ही एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से कम होने लगता है, जिसका असर केवल प्रजनन क्षमता पर ही नहीं बल्कि पूरे शरीर पर पड़ता है। इसकी वजह से कई तरह के शारीरिक बदलाव होते हैं। आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से। 

1. हड्डियां कमजोर होने लगती हैं

physical changes after menopause 01 (23)

साल 2022 में Endocrine Society में प्रकाशित Menopause and Bone Loss लेख के अनुसार, मेनोपॉज के एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है, जिसकी वजह से हड्डियां कमजोत होने लगती हैं। मेनोपॉज के बाद सबसे बड़ा असर हड्डियों पर दिखाई देता है। एस्ट्रोजन हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके कम होने से बोन डेंसिटी तेजी से घटने लगती है, जिससे ऑस्टियोपीनिया और आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर होने की संभावना अधिक हो जाती है।

क्या करें: इसलिए 50 वर्ष की उम्र के बाद नियमित बोन डेंसिटी टेस्ट, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन, धूप में समय बिताना और वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है।

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2. मेटाबोलिज्म धीमा पड़ जाता है

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कई महिलाएं मेनोपॉज के बाद शिकायत करती हैं कि पहले जितना खाने पर भी वजन नियंत्रित रहता था, अब तेजी से बढ़ने लगा है। इसका कारण केवल उम्र नहीं, बल्कि हार्मोनल बदलाव और मेटाबोलिज्म का धीमा होना भी है। शरीर की कैलोरी जलाने की क्षमता कम हो जाती है और पेट के आसपास चर्बी जमा होने लगती है। साल 2023 में British Menopause Society - BMS में प्रकाशित रिपोर्ट के से भी इस बात की पुष्टि होती है कि एस्ट्रोजन कम होने के कारण वजह पर असर पड़ता है और मेटाबोलिज्म भी प्रभावित होता है।

क्या करें: ऐसे में संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, नियमित व्यायाम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग वजन नियंत्रित रखने में मदद करती है।

3. मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं

मेनोपॉज के बाद धीरे-धीरे मसल मास कम होने लगता है। इससे शरीर की ताकत घटती है, थकान जल्दी महसूस होती है और रोजमर्रा के काम भी पहले की तुलना में अधिक कठिन लग सकते हैं। यही नहीं, कई महिलाओं को मेनोपॉज के बाद घुटनों, कंधों, हाथों और कमर में दर्द या जकड़न महसूस होती है। यह हार्मोनल बदलाव, उम्र बढ़ने और मांसपेशियों की कमजोरी का संयुक्त प्रभाव हो सकता है।

क्या करें: पर्याप्त प्रोटीन, रेजिस्टेंस एक्सरसाइज और सक्रिय जीवनशैली मांसपेशियों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, ‘मेनोपॉज के बाद केवल हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। सही खान-पान, नियमित रूप से एक्सरसाइज, अच्छी नींद और समय-समय पर हेल्थ चेकअप महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य की नींव बनते हैं।’ इसके अलावा, हल्का व्यायाम, स्ट्रेचिंग, वजन नियंत्रित रखना और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन जोड़ों की सेहत के लिए लाभकारी होता है।

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4. त्वचा और बालों में बदलाव

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एस्ट्रोजन कम होने से त्वचा की नमी और कोलेजन दोनों घटने लगते हैं। परिणामस्वरूप त्वचा पतली, रूखी और झुर्रियों वाली दिखाई देने लगती है। कई महिलाओं में बाल झड़ने या पतले होने की समस्या भी बढ़ सकती है।

क्या करें: पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक भोजन, सनस्क्रीन का नियमित उपयोग और त्वचा की उचित देखभाल इन समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकती है।

5. दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है

एस्ट्रोजन हृदय की सुरक्षा करने वाले हार्मोन के रूप में भी काम करता है। इसके कम होने के बाद हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

क्या करें: इसलिए नियमित ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल की जांच कराना तथा धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचना जरूरी है।

6. नींद और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है

डॉ.  शोभा गुप्ता कहती हैं, " मेनोपॉज के दौरान और उसके बाद कई महिलाओं को अनिद्रा, रात में बार-बार जागना, मूड स्विंग्स, चिंता और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। लगातार खराब नींद शरीर के अन्य कार्यों पर भी असर डालती है।"

क्या करें: योग, ध्यान, नियमित दिनचर्या, कैफीन का सीमित सेवन और तनाव प्रबंधन इन समस्याओं को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। यदि लक्षण गंभीर हों तो विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए।

7. योनि और मूत्र संबंधी समस्याएं

डॉ.  शोभा गुप्ता बताती हैं, "एस्ट्रोजन की कमी के कारण योनि में सूखापन, जलन, संभोग के दौरान दर्द तथा बार-बार यूरिन इंफेक्शन या पेशाब से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। कई महिलाएं संकोच के कारण इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि इनका प्रभावी इलाज उपलब्ध है।"

क्या करें: ऐसे किसी भी लक्षण को सामान्य मानकर सहन करने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

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किन बातों का रखें विशेष ध्यान?

  • कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर संतुलित आहार लें।
  • सप्ताह में कम से कम 150 मिनट शारीरिक गतिविधि करें।
  • नियमित बोन डेंसिटी, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं।
  • पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित रखें।
  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
  • किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।

निष्कर्ष

मेनोपॉज के बाद शरीर में बदलाव आना पूरी तरह सामान्य है, लेकिन इन्हें अनदेखा करना सही नहीं है। समय रहते सही जीवनशैली अपनाकर, नियमित स्वास्थ्य जांच कराकर और विशेषज्ञ की सलाह लेकर महिलाएं हड्डियों की मजबूती बनाए रख सकती हैं, वजन नियंत्रित रख सकती हैं और हृदय सहित पूरे शरीर को स्वस्थ रख सकती हैं। ध्यान रखें कि मेनोपॉज के बाद जीवन रुकता नहीं, बल्कि एक नया अध्याय शुरू होता है। सही जानकारी, नियमित स्वास्थ्य जांच और सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर महिलाएं इस दौर को आत्मविश्वास और बेहतर स्वास्थ्य के साथ जी सकती हैं।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • मेनोपॉज के बाद हॉट फ्लैशेज से राहत पाने के लिए कौन सी हर्बल टी फायदेमंद है?

    मेनोपॉज के बाद हॉट फ्लैशेज से राहत पाने के लिए कौन सी हर्बल टी पीनी चाहिए इस बारे में डॉक्टर से सलाह लें। वैसे, कैमोमाइल टी जैसे प्राकृतिक उत्पाद शरीर में एस्ट्रोजन के प्रभाव को थोड़ा संतुलित करके हॉट फ्लैशेज को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • मेनोपॉज के बाद पेल्विक फ्लोर मसल्स को मजबूत करने के लिए कौन सी एक्सरसाइज करें?

    कीगल एक्सरसाइज की मदद से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 30, 2026 09:17 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jul 30, 2026 09:17 IST

    Published By : Meera Tagore
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