Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

मेनोपॉज के बाद किडनी और हार्ट हेल्थ पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत क्यों होती है? बता रही हैं डॉक्टर

मेनोपॉज के बाद किडनी और हार्ट हेल्थ गहराई से प्रभावित होती हैं। ऐसा हार्मोनल इंबैलेंस के कारण होता है। इसके कारणों को गहराई से समझना है, तो इस लेख को जरूर पढ़ें।

मेनोपॉज वह अवस्था होती है, जब महिलाओं के पीरियड्स पूरी तरह बंद हो जाते हैं। इसके बाद महिलाओं का रिप्रोडक्टिव ऑर्गन पूरी तरह काम करना बंद कर देता है यानी वे इस अवस्था के बाद दोबारा कभी भी प्रेग्नेंट नहीं हो सकती हैं। हालांकि, यह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे रोका नहीं जा सकता है, लेकिन माना जाता है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विशेषकर, उन्हें हार्ट और किडनी पर अधिक ध्यान देने की जरूरत होती है। यहां यह जान लेना बहुत जरूरी है कि मेनोपॉज के बाद किडनी और हार्ट हेल्थ पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत क्यों होती है? आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट एवं IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से।

मेनोपॉज के बाद किडनी-हार्ट हेल्थ पर ज्यादा ध्यान क्यों दें?

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मेनोपॉज के बाद न सिर्फ महिलाओं की प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है, बल्कि उनमें कई बड़े हार्मोनल बदलाव भी होते हैं। वैसे भी आमतौर पर 40-50 साल की उम्र के बाद मेनोपॉज होता है। इस उम्र तक आते-आते शरीर पहले से ही कमजोर हो जाता है। इसी वजह से मेनोपॉज के बाद महिलाओं में दिल और किडनी से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। डाॅ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "मेनोपॉज और अधिक उम्र के कारण महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी हो जाती है। यह हार्मोन ब्लड वेसल्स को लचीला बनाए रखने में मदद करता है और शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। इसकी कमी से धमनियां सख्त होने लगती हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।" वहीं British Heart Foundation की मानें, तो मेनोपॉज के बाद कार्डियोवास्कुलर हेल्थ पर असर पड़ता है।

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मेनोपॉज के बाद किडनी-हार्ट से जुड़े जोखिम क्यों बढ़ते हैं?

कार्यक्षमता पर असरः मेनोपॉज के बाद महिलाओं का शरीर पहले से ही एस्ट्रोजन का निर्माण काफी कम करता है, जिससे ब्लड वेसल्स सख्त होने लगती हैं। इससे ब्लड फ्लो पर नेगेटिव असर पड़ता है। वहीं, किडनी और हार्ट का आपस में गहरा संबंध है। मेनोपॉज के बाद हार्ट की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, जिससे ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ जाता है। यह स्थिति किडनी पर भी दबाव बनाती है, जिससे क्रोनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।

मेटाबॉलिज्म का धीमा होनाः डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "मेनोपॉज और अधिक उम्र के बाद महिलाओं में वजन तेजी से बढ़ता है, जिसे कम करना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। इसके अलावा, मेनोपॉज के बाद महिलाओं में डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी आम हो जाती हैं। ये सभी स्थितियां दिल की बीमारियों और किडनी फेलियर की सबसे बड़ी वजह मानी जाती हैं।"

ऑक्सीडेटिव स्ट्रेसः मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है, जो कि शरीर में एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट के रूप में काम करता है। मेनोपॉज के बाद इसके घटने से किडनी और हार्ट टिश्यूज में सूजन पैदा हो सकती है, जो कि बीमारियों का कारक बनता है।

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निष्कर्ष

मेनोपॉज के बाद महिलाओं को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। विशेषकर, हार्ट और किडनी को लेकर सजग रहना चाहिए। मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर काफी तेजी से गिरता है, जो कई तरह की बीमारियों की वजह बन सकता है। ऐसे में महिलाओं को चाहिए कि वे अपने खानपान को संतुलित रखें और नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। इससे हार्मोन को बैलेंस रखने में मदद मिलेगी।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • मेनोपॉज के बाद दिल की बीमारी का सबसे पहला संकेत क्या हो सकता है?

    मेनोपॉज के बाद बहुत ज्यादा थकान होना, सांस फूलना या छाती में हल्का भारीपन महसूस होना, दिल की बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
  • पोस्ट-मेनोपॉज में दिल और किडनी को स्वस्थ रखने के लिए कौन से टेस्ट जरूरी हैं?

    डॉक्टर की सलाह पर हर साल लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल टेस्ट), ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और सीरम क्रिएटिनिन (किडनी टेस्ट) जैसे टेस्ट करवाएं।

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jun 09, 2026 10:55 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jun 09, 2026 10:55 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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