Fri Sep 11, 2026 | 07:31 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

डायबिटीज वजाइन हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है? डॉक्टर से जानें जरूरी बातें

डायबिटीज के कारण महिलाओं को यीस्ट इंफेक्शन, वजाइनल ड्राईनेस और यूटीआई की समस्या हो सकती है। इस लेख में जानें डायबिटीज का महिलाओं की इंटीमेट हेल्थ पर असर।

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डायबिटीज सिर्फ एक ब्लड शुगर से जुड़ी प्रॉब्लम नहीं है। यह शरीर के हर हिस्से को प्रभावित करती है। महिलाओं के लिए, अनियंत्रित मधुमेह का सीधा असर उनकी वजाइनल हेल्थ पर पड़ता है, जिसे अक्सर जानकारी के अभाव में महिलाएं नजरअंदाज कर बैठती हैं। ब्लड में ग्लूकोज की अधिकता योनि के pH बैलेंस को बिगाड़ सकती है, जिससे यीस्ट इंफेक्शन, ड्राईनेस और बार-बार होने वाले यूटीआई जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। इस लेख में दिए गए सभी तथ्यों की पुष्टि खुद Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ताने की है। वह इस स्थिति को मैनेज करने के लिए कुछ जरूरी टिप्स भी दे रही हैं।

डायबिटीज वजाइनल हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है?

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जब बॉडी में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है, तो इसका असर ओवरऑल बॉडी पर पड़ता है। इसका प्रभाव योनि पर भी दिखता है, जैसे-

ग्लाइकोजन का स्तर बढ़ना

ग्लाइकोजन शरीर में ग्लूकोज का संग्रहित यानी स्टोर्ड रूप है, जो मुख्य रूप से लिवर और मांसपेशियों में जमा होता है। जब किसी महिला को डायबिटीज की समस्या होती है, तो वजाइनल सेल्स में अतिरिक्त शुगर यीस्ट और हानिकारक बैक्टीरिया के पनपने के लिए बेहतर वातावरण तैयार करता है। असल में शुगर यीस्ट और बैड बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है, जिस वजह से योनि में ग्लाइकोजन (Glycogen) का स्तर बढ़ जाता है।

पीएच संतुलन में बदलाव

डायबिटीज के कारण ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित रहता है, जिससे योनि में पीएच (pH) एसिडिक हो जाता है। 2021 में MDPI में प्रकाशित जर्नल के अनुसार बच्चे पैदा करने की उम्र वाली महिलाओं के लिए सामान्य योनि पीएच का सामान्य स्तर 3.8 से 5.0 के बीच होता है, जो कि मॉडरेट एसिडिक है। डायबिटीज पीएच लेवल बिगाड़ देता है, जिससे योनि का सुरक्षा कवच कमजोर हो जाता है।

डायबिटीज के कारण योनि में होने वाली समस्याएं

यीस्ट इंफेक्शन

डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में योनि कैंडिडिआसिस की समस्या सबसे आम देखी जा सकती है। 2021 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार डायबिटीज के कारण यीस्ट इंफेक्शन (मुख्य रूप से कैंडिडा एल्बिकैंस) होता है, क्योंकि हाई ब्लड शुगर फंगी के पनपने के लिए एक उपयुक्त एनवायरनमेंट तैयार करता है। बढ़ा हुआ ग्लूकोज पसीने, पेशाब और वजाइनल डिस्चार्ज में घुल जाता है, जो कि तेजी से यीस्ट के बढ़ने को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, डायबिटीज के मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिस वजह से उनमें इंफेक्शन होने का रिस्क बढ़ जाता है।

बैक्टीरियल वेजिनोसिस

हाई ब्लड शुगर के कारण वजाइना में गुड बैक्टीरिया की संख्या में कमी आने लगती है। असल में, वजाइनल फ्लूइड में ग्लूकोज का उच्च स्तर बैड बैक्टीरिया और यीस्ट, दोनों के पनपने के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करता है, जिससे सुरक्षात्मक लैक्टोबैसिलस प्रजातियों में कमी आती है यानी गुड बैक्टीरिया का स्तर कम हो जाता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। इस स्थिति में योनि से मछली जैसी गंध आने लगती है।

योनि में ड्राईनेस

NIH: National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases के अनुसार डायबिटीज के कारण महिलाओं को वजाइनल ड्राईनेस की समस्या हो जाती है। Endotext ऑनलाइन मेडिकल बुक के अनुसार  डायबिटीज के कारण ब्लड वेसल्स और नर्व्स नुकसान पहुंचता है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। इसकी वजह से वजाइनल में भी ब्लड फ्लो बाधित हो जाता या कम होता है। ब्लड फ्लो की कमी की वजह से महिलाओं की योनि में नेचुरल लुब्रिकेशन में कमी आने लगती है, जिससे ड्राईनेस बढ़ जाती है और बार-बार इंफेक्शन का रिस्क भी बढ़ जाता है। इस स्थिति में महिलाओं को यौन संबंध बनाने में भी तकलीफ होती है।

यूटीआई का रिस्क

डायबिटीज के मरीजों में यूटीआई का जोखिम भी बहुत ज्यादा होता है। 2015 में Metabolic Syndrome and Obesity में प्रकाशित टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों में यूटीआई होना आम बात है। इन रोगियों में, यूटीआई अधिक गंभीर होता है, जो अधिक रेजिस्टेंस पैथोजन्स (वे कीटाणु जिन पर दवाएं असर करना बंद कर देती हैं) के कारण होता है और मधुमेह रहित रोगियों की तुलना में इसके परिणाम काफी खराब होते हैं।

यौन स्वास्थ्य पर असर

American Medical Association के अनुसार जिन महिलाओं को डायबिटीज होता है, लिबिडो की कमी और सेक्सुअल डिजायर भी कम हो जाता है। ऐसे में उन्हें यौन संबंध बनाने में भी दिक्कतें आती हैं। डॉ. शोभा गुप्ता सलाह देती हैं कि जिन महिलाओं में ब्लड ग्लूकोज का स्तर असंतुलित होता है, उन्हें इसे मैनेज करने की कोशिश करनी चाहिए। इससे उनका लिबिडो बेहतर होता है और यौन संबंध में दिक्कतें नहीं आती हैं। कई बार लिबिडो पर बुरा असर वजाइनल ड्राईनेस से भी होता है।’

क्या प्रेग्नेंसी और डायबिटीज का योनि स्वास्थ्य पर असर पड़ता है?

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डॉ. शोभा गुप्ता की मानें तो गर्भावस्था में डायबिटीज होने पर वजाइनल हेल्थ पर बहुत ज्यादा नेगेटिव असर पड़ सकता है। दरअसल गर्भावस्था के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है, जिससे वजाइनल ट्रैक में ग्लाइकोजन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है। अगर महिला पहले से ही डायबिटिक है या उसे गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes) हो जाता है, तो ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर इस स्थिति को और गंभीर बना देता है। यह अतिरिक्त शुगर योनि के पीएच (pH) संतुलन को बिगाड़ देती है और कैंडिडा जैसी कंडीशन पैदा हो जाती और ट्रीटमेंट के बाद भी इसके होने का रिस्क बार-बार बना रहता है। ऐसे में यीस्ट इंफेक्शन और यूटीआई (UTI) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह कंडीशन ने सिर्फ प्रेग्नेंट महिला के लिए असहजता और खुजली पैदा करती है, बल्कि समय से पहले प्रसव (Preterm labor) जैसी जटिलताओं का जोखिम भी बढ़ा सकती है।

डायबिटीज में वजाइनल हेल्थ में कैसे सुधार करें?

why is hygiene important during menstruation 02 (2)

हाइजीन का ध्यान रखें

डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है कि वे नियमित रूप से इंटरनल हाइजीन का पूरा ध्यान रखें। डॉ. शोभा गुप्ता सलाह देती हैं कि योनि सेल्फ क्लीनिंग ऑर्गन है। इसलिए, क्लीनिंग के लिए सादे पानी का ही उपयोग करें। किसी भी तरह का केमिकल युक्त प्रोडक्ट यूज न करें।

सूती के कपड़े पहनें

स्वच्छता का ध्यान रखते हुए डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को हमेशा सूती के अंडरवियर पहनने चाहिए। सूती के कपड़े पसीने को सोखते हैं, जिससे बैक्टीरिया के पनपने का रिस्क कम हो जाता है।

आहार में बदलाव करें

डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है कि वे लो ग्लाइसेमिक डाइट को ही फॉलो करें। इसका मतलब है कि खाने में ऐसी चीजों को शामिल करें, जिसका सेवन करने से ब्लड शुगर का स्तर तेजी से हाइक नहीं करता है।  इसके अलावा, वजाइनल हेल्थ के लिए दही का सेवन करना सही होता है। इसमें ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो वजाइनल बैक्टीरिया को सपोर्ट करते हैं। 

हाइड्रेट रहें

डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को अच्छी मात्रा में रोजाना पानी पीना चाहिए। इससे बॉडी के टॉक्सिंस बाहर आ जाते हैं और ब्लड शुगर की अतिरिक्त मात्रा भी कम होती है और वजाइनल हेल्थ के लिए भी पानी पीना अच्छा होता है। असल में, पानी कम पीने की वजह से योनि में ड्राईनेस हो सकती है, जिससे योनि का इकोसिस्टम बिगड़ सकता है।’ डायबिटीज के मरीजों में यह समस्या अधिक होती है। 

डॉक्टर को कब दिखाएं?

डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को अपनी वजाइनल हेल्थ को जरा भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। इसका उनकी सेक्सुअल लाइफ पर भी बुरा असर पड़ सकता है। कई बार महिलाएं कंफ्यूज होती हैं कि वजाइनल हेल्थ खराब होने पर डॉक्टर के पास जाने का सही समय कौन-सा हो सकता है? यहां हम आपको कुछ संकेत बता रहे हैं, उन पर ध्यान जरूर दें-

  • योनि क्षेत्र में लगातार खुजली या रेडनेस
  • योनि से असामान्य गंध आना
  • योनि स्राव का रंग बदलना
  • पेशाब करते समय जलन या बार-बार पेशाब आना
  • संभोग के दौरान अत्यधिक दर्द

निष्कर्ष

डायबिटीज सिर्फ स्वास्थ्य के किसी एक हिस्से को प्रभावित नहीं करती है। यह संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर डालती है, जैसे डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं की वजाइनल हेल्थ पर। ऐसी डायबिटिक महिलाओं को चाहिए कि वे अपनी वजाइनल हेल्थ को लेकर सतर्क रहें, योनि की स्वच्छता का ध्यान रखें। कभी भी जलन या पेशाब के दौरान दर्द का एहसास हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और अपना ट्रीटमेंट करवाएं।

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FAQ

  • क्या डायबिटीज के कारण योनि में खुजली हो सकती है?

    हां, डायबिटीज के कारण ब्लड फ्लो बाधित होता है और ब्लड शुगर का स्तर हाई होने के कारण यीस्ट संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में योनि में खुजली और जलन की समस्या हो सकती है।
  • डायबिटीज में योनि संक्रमण से कैसे बचें?

    डायबिटीज में योनि संक्रमण से बचने के लिए सबसे पहले शुगर को कंट्रोल करें और हाइजीन का ध्यान रखें। इसके अलावा, डाइट और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करें।
  • क्या शुगर लेवल ठीक होने पर संक्रमण अपने आप ठीक हो जाता है?

    शुगर लेवल ठीक होने के बावजूद संक्रमण हो गया है, तो उसका इलाज किया जाना जरूरी है। डॉक्टर ट्रीटमेंट के तौर पर एंटी-फंगल दवाएं दे सकते हैं।
  • क्या हाई शुगर सेक्स लाइफ को प्रभावित करती है?

    डॉ. शोभा गुप्ता की मानें, तो हाई शुगर के कारण वजाइनल ड्राईनेस की दिक्कतें आ सकती हैं।
  • डायबिटीज में बार-बार यूरिन इंफेक्शन क्यों होता है?

    पेशाब में अतिरिक्त शुगर बैक्टीरिया के पनपने के लिए भोजन का काम करती हैं। इसलिए, डायबिटीज होने पर महिलाओं को बार-बार यूरिन इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    May 02, 2026 19:40 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • May 02, 2026 19:40 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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