Fri Sep 11, 2026 | 08:57 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या पीरियड्स के दौरान वजाइनल pH लेवल में बदलाव आता है? डॉक्टर से जानें सच्चाई

पीरियड्स के दौरान योनि के pH लेवल में बदलाव हो सकता है और इसकी वजह से कई तरह के इंफेक्शन का रिस्क भी बढ़ जाता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? जानने के लिए लेख को पूरा पढ़ें।

विशेषज्ञ बताते हैं कि एक स्वस्थ महिला की योनि का pH स्तर 3.8 से 4.2 के बीच रहता है। वजाइनल pH लेवल हेल्दी होना चाहिए, ताकि हानिकारक बैक्टीरिया या इंफेक्शन का खतरा न रहे। हालांकि, महिलाओं के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या पीरियड्स की वजह से वजाइनल pH लेवल बदल सकता है? यह सवाल इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि अक्सर यह देखने में आता है कि पीरियड के दिनों में महिलाओं को इंफेक्शन या यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं,वजाइनल pH बिगड़ने से यीस्ट इंफेक्शन और बैक्टीरियल वेजिनोसिस (BV) सीधे तौर पर होते हैं। तो आइए, जानते हैं कि Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से इस संबंध में जरूरी बातें।

क्या पीरियड्स वजाइनल pH लेवल को प्रभावित करते हैं?

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NCBI की वेबसाइट पर मौजूद StatPearls का एक मेडिकल लेख, जो वजिनाइटिस (योनि में सूजन या इंफेक्शन) से यह पता चलता है कि हेल्दी वजाइना का pH लेवल है 3.8 से 4.2 के बीच रहता है। हालांकि, यह सच है कि पीरियड्स के दौरान वजाइनल pH में बदलाव देखने को मिलते हैं। डाॅ. शोभा गुप्ता इसे सरल शब्दों में समझाती हैं, "योनि का अपना pH लेवल होता है, जिस पर पीरियड्स के दौरान गहरा असर देखने को मिलता है। दरअसल, पीरियड के दौरान हो रही ब्लीडिंग का भी अपना pH स्तर होता है, जो कि थोड़ा अल्कलाइन होता है। यही कारण है कि पीरियड के दौरान अस्थायी रूप से वजाइनल pH अपने आप बढ़ जाता है।"

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पीरियड के दौरान वजाइनल pH किस प्रकार प्रभावित होता है?

1. ब्लड कॉन्टैक्ट

कहने की जरूरत नहीं है कि पीरियड्स के दौरान योनि लगातार खून के संपर्क में रहती है। इसका प्रभाव योनि क्षेत्र पर पड़ता है। वैसे भी मासिक धर्म का ब्लड अधिक अल्कलाइन होता है, ऐसे में स्वाभाविक रूप से वजाइनल कैनाल का एसिडिक एन्वारयमेंट बदल जाता है।

2. पैड का उपयोग

पीरियड्स के दौरान पैड का यूज लंबे समय तथा कई दिनों तक होता है। पैड, पैंटी लाइनर या टैम्पोन आदि में लगा हुआ ब्लड वजाइनल वॉल (योनि की दीवार) के संपर्क में बना रहता है, जिससे लगातार pH स्तर बढ़ जाता है, जिससे दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं।

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3. हार्मोनल बदलाव

पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में हार्मोनल उतार-चढ़ाव भी काफी ज्यादा होते हैं। खासकर एस्ट्रोजन के स्तर में बदलाव काफी ज्यादा देखने को मिलता है। यह बदलाव वजाइना में सुरक्षात्मक लैक्टोबैसिली बैक्टीरिया को कम कर सकता है, जिससे pH और अधिक बदल जाता है। परिणामस्वरूप संक्रमण का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, कहने की बात यह है कि पीरियड्स के दौरान वजाइनल pH का बढ़ना एक सामान्य और प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। इसे लेकर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं होती है। इस दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, समय-समय पर पैड बदलते रहें, ताकि किसी भी तरह के संक्रमण का जोखिम न बढ़े। इसके अलावा, इस दौरान योनि में किसी भी तरह के केमिकल युक्त प्रोडक्ट का भी यूज न करें। यह भी सही नहीं है।

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FAQ

  • पीरियड्स के दौरान योनि का pH लेवल कितना हो सकता है?

    पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो से वजाइनल pH सामान्य से बढ़कर लगभग 5.3 से 6.6 के बीच पहुंच जाता है।
  • क्या पीरियड्स के बाद वजाइनल pH अपने आप सामान्य हो जाता है?

    हां, पीरियड्स खत्म होने के बाद जैसे ही एस्ट्रोजन का स्तर बदलता है, लैक्टोबैसिली बैक्टीरिया दोबारा pH को सामान्य यानी 3.8 - 4.5 के बीच ले आते हैं।
  • पीरियड्स के दौरान असंतुलित pH लेवल के कारण किस तरह के इंफेक्शन का जोखिम बढ़ता है?

    pH लेवल बढ़ने के कारण पीरियड्स के दौरान या इसके ठीक बाद बैक्टीरियल वेजिनोसिस होने का खतरा सबसे अधिक रहता है।

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Disclaimer

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    May 18, 2026 10:06 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • May 18, 2026 10:06 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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