Placental Insufficiency: प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भनाल का बहुत अहम योगदान होता है। यही एकमात्र जरिया होता है, जो गर्भ में शिशु को मां से जोड़कर रखता है। हालांकि, कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं, जब गर्भनाल कमजोर हो जाती है, जिससे महिला को प्लेसेंटल इंसफिशिएंसी की समस्या हो जाती है। यहां सवाल उठता है कि प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटल इंसफिशिएंसी की समस्या क्यों हो जाती है? यहां वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता आपको बता रहे हैं इससे जुड़े कारणों के बारे में।
प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटल इंसफिशिएंसी के कारण
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प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटल इंसफिशिएंसी के कई कारण हो सकते हैं। उन्हें जानकार आप समय पर अपना इलाज करवा सकते हैं। इन कारणों में शामिल हैं-
ब्लड डिसऑर्डर
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में नॉर्मल ब्लड फ्लो होना बहुत जरूरी है। तभी शिशु तक प्लेसेंटा के जरिए ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंच सकते हैं। लेकिन, जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी में ब्लड डिसऑर्डर हो जाता है, इसकी वजह से प्लेसेंटा में कमजोरी आ सकत है। इस संबंध में डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "हाई ब्लड प्रेशर या प्री-एक्लैम्पसिया जैसी बीमारियों के कारण गर्भाशय की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। ऐसे में गर्भनाल तक पर्याप्त खून नहीं पहुंचता है। इसी तरह, ब्लड डिसऑर्डर या खून के थक्के जमने की बीमारियां, जैसे एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम भी नसों में छोटे-छोटे थक्के बना सकती हैं, जो जरूरी रक्त प्रवाह में अवरोध पैदा करती हैं। इससे प्लेसेंटा में कमजोरी आ सकती है।"
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मानसिक स्वास्थ्य
गर्भावस्था में गर्भनाल सही हो, उसमें सही ब्लड फ्लो हो, इसके लिए मां का स्वस्थ होना भी जरूरी है। यहां तक कि उनकी मेंटल हेल्थ भी बहुत ज्यादा मायने रखती है। साल 2023 में Molecular And Cellular Endocrinology में प्रकाशित रिसर्च से पता चलता है कि अगर गर्भावस्था के दौरान महिला मेंटली फिट नहीं है, तो इसकी वजह से गर्भनाल का कामकाज प्रभावित हो सकता है। इसका सीधा असर होने वाले बच्चे के विकास पर पड़ता है, जिससे जन्म के बाद बड़े होने पर उसकी फैट सेल्स और लिवर के काम करने की क्षमता में बदलाव आ जाता है।
नशीले पदार्थों का सेवन
गर्भावस्था में महिलाओं को नशीले पदार्थों का सेवन किसी भी मायने में नहीं करना चाहिए। अगर वे ऐसा करती हैं, तो इसका असर सीधे-सीधे शिशु के विकास पर पड़ता है। यहां तक कि प्लेसेंटा कमजोर हो जाता है, जिससे शिशु तक पर्याप्त पोषण और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है। साल 2010 में Gynecologic And Obstetric Investigation में प्रकाशित रिसर्च पेपर के अनुसार, सिगरेट में निकोटिन और कार्बन मोनोऑक्साइड (Carbon Monoxide) जैसे तत्व होते हैं, जो कि गर्भनाल की ब्लड वेसल्स को संकुचित कर देते हैं। इससे शिशु को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता है। इसी तरह, शराब एक टॉक्सिन की तरह काम करती है, जो गर्भनाल को बनाने वाले सेल्स को नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में शिशु का वजन कम हो सकता है और नसों की बनावट भी बिगड़ सकती है।
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ऑटोइम्यून कंडीशन
अगर किसी महिला को ऑटोइम्यून बीमारियां हैं, तो उन्हें भी प्लेसेंटा से जुड़ी समस्या हो सकती है। American College of Rheumatology (ACR) के अनुसार, दरअसल, ऑटोइम्यून डिजीज के कारण शरीर में सूजन आ जाती है, जिससे नसों को नुकसान होने लगता है। ऐसे में गर्भनाल कमजोर हो जाती है। यहां तक कि ऑटोइम्यून कंडीशन की वजह से नसों का सही विकास रुक जाता है, खून के थक्के जमने लगते हैं और टिश्यूज खराब हो जाते हैं, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की सप्लाई बहुत कम हो जाती है।
गर्भकालीन मधुमेह
अगर किसी महिला को गर्भकालीन मधुमेह है, तो उन्हें भी प्लेसेंटल इंसफिशिएंसी की समस्या हो सकती है। डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "गर्भावस्था में डायबिटीज के कारण ब्लड शुगर का स्तर स्थिर नहीं रहता है, जिससे नसों को नुकसान हो सकता है। ऐसे में नसों के जरिए गर्भनाल तक पर्याप्त ब्लड सप्लाई नहीं हो पाती है। निश्चित रूप से ऐसा होने पर शिशु को ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगा, जिससे उनके ग्रोथ पर असर नजर आता है।"
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प्लेसेंटल इंसफिशिएंसी से संबंधित टेस्ट
- ग्रोथ अल्ट्रासाउंडः इसके जरिए सिर्फ शिशु के वजन, आकार आदि का ही नहीं पता चलता है, बल्कि गर्भनाल और एमनियोटिक लिक्विड (Amniotic Fluid) की भी पूरी जानकारी मिलती है।
- डॉपलर अल्ट्रासाउंडः बच्चे तक पर्याप्त ऑक्सीजन और खून पहुंच रहा है या नहीं, यही जानने के लिए डॉपलर अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
- फीटल नॉन-स्ट्रेस टेस्टः इस टेस्ट में बच्चे के दिल की धड़कन पर नजर रखी जाती है, ताकि यह जाना जा सके कि बच्चे को पर्याप्त आक्सीजन मिल रहा या नहीं।
निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी के दौरान हर महिला को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गर्भनाल से संबंधित कोई भी समस्या हो, इसको लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्भनाल अकेला ऐसा माध्यम है, जो कि शिशु तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की सप्लाई कर सकता है। विशेषकर, जिन महिलाओं को किसी न किसी तरह की मेडिकल कंडीशन, जैसे बीपी या डायबिटीज है, उन्हें इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए।
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FAQ
क्या ट्विन प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा की कमजोरी का खतरा ज्यादा होता है?
हां, जुड़वां बच्चों में सीमित जगह और एक ही प्लेसेंटा पर दोगुने पोषण का दबाव होता है। इसलिए उनमें इसका रिस्क भी अधिक होता है।क्या पहली प्रेग्नेंसी में यह समस्या होने पर दूसरी प्रेग्नेंसी में भी ऐसा होता है?
ऐसा पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता है। हलांकि, डॉक्टर अगली प्रेग्नेंसी की शुरुआत से ही नियमित डॉपलर स्कैन जरिए इसकी निगरानी करते हैं।
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Jul 17, 2026 17:34 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta