मौजूदा समय में आप देख रहे होंगे कि महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है, जिसकी वजह से पीसीओएस, अनियमित पीरियड्स, अनचाहे बाल, अचानक वजन बढ़ना और मूड स्विंग्स बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर महिलाओं में हार्मोनल इंबैलेंस के लक्षण तेजी से क्यों नजर आ रहे हैं? क्या इसके पीछे कोई ठोस वजह है? आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से।
युवा महिलाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्मोनल असंतुलन के लक्षण
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मानसिक तनाव
हाल के सालों में महिलाओं में करियर और घर-बार की जिम्मेदारी दुगनी हुई है। वैसे भी सोशल मीडिया के इस दौर में जो भी युवा महिला खुद को अपडेटेड नहीं पाती है, उन्हें किसी न किसी बात का तनाव हो जाता है। लगातार तनाव में रहने की वजह से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन जैसे सेक्स हार्मोन्स के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देता है।
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खराब खानपान
एक समय हुआ करता था जब महिलाएं अधिकतर घर का बना ही खाना खाती थीं, लेकिन अब वर्क कल्चर बदलने के कारण वे रेडी-टू-ईट फूड, रिफाइंड फूड, जंक, मैदा, प्रोसेस्ड और बहुत ज्यादा चीनी युक्त चीजों का सेवन अधिक करने लगती हैं। इन तमाम चीजों का हार्मोनल संतुलन पर बुरा असर पड़ता है। दरअसल, प्रोसेस्ड चीजों का सेवन करने की वजह से इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या होने लगती है, जिससे आगे चलकर पीसीओएस और ओव्यूलेशन जैसी परेशानियां होने लगती हैं।
शारीरिक सक्रियता की कमी
मौजूदा समय में ऐसी महिलाओं की संख्या कम है, जो रेगुलर वर्कआउट करती हैं। असल में, घर और ऑफिस की जिम्मेदारी निभाने के चलते महिलाएं शारीरिक रूप से कम सक्रिय हो गई हैं। इस स्थिति वजन बढ़ जाता है। नतीजतन, फैट सेल्स एस्ट्रोजन हार्मोन का अधिक उत्पादन करने लगती हैं और हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है।
स्लीप साइकिल का बिगड़ना

वर्क कल्चर या लेट नाइट मोबाइल पर समय बिताना। आजकल कई लोग रात लेट नाइट जगते हैं। महिलाएं भी ऐसा करती हैं। इसकी वजह से उनका स्लीप साइकिल बिगड़ जाता है। देर रात तक जागना और सुबह देर से उठना सर्कैडियन साइकिल को बाधित करता है। नींद की कमी से मेलाटोनिन हार्मोन प्रभावित होता है, जिससे पीरियड्स को नियंत्रित करने वाले हार्मोंस का तालमेल बिगड़ जाता है।
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निष्कर्ष
युवा महिलाओं में हार्मोनल इंबैलेंस की समस्याएं अधिक देखने को मिल रही हैं। इसके पीछे उनकी खराब जीवनशैली, खानपान की बुरी आदतें, नींद की कमी और बढ़ता तनाव मुख्य कारण हैं। हार्मोनल इंबैलेंस कई तरह की परेशानियों को जन्म देता है। यदि इससे बचाव करना है, तो बेहतर है कि न्यूट्रिशन से भरपूर डाइट, नियमित एक्सरसाइज और रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। इससे हार्मोन को बैलेंस करने में मदद मिलती है।
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FAQ
हार्मोनल असंतुलन के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
चेहरे पर मुंहासे, पीरियड्स का अनियमित होना, अचानक वजन बढ़ना या कम होना और अत्यधिक थकान इसके शुरुआती लक्षण हैं।क्या हार्मोनल असंतुलन को बिना दवाइयों के ठीक किया जा सकता है?
हार्मोनल इंबैलेंस की समस्या क्यों हो रही है, यह जानना जरूरी है। हालांकि, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर हार्मोन को संतुलित किया जा सकता है।
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May 27, 2026 12:01 IST
Modified By : Meera Tagore May 27, 2026 12:01 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta