हार्मोन्स असंतुलन बन सकता है महिलाओं में कई परेशानियों का कारण, जानें किस तरह बैलेंस रखें अपना हार्मोन?

महिलाओं के शरीर में हार्मोन का बहुत ही अहम योगदान होता है। किशोरावस्था से लेकर बच्चे के जन्म तक हार्मोन की मुख्य भूमिका होती है।

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraUpdated at: Dec 15, 2020 13:39 IST
हार्मोन्स असंतुलन बन सकता है महिलाओं में कई परेशानियों का कारण, जानें किस तरह बैलेंस रखें अपना हार्मोन?

हार्मोन हमारे शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं के शरीर में हार्मोन की भूमिका को बहुत ही अहम माना जाता है। किशोरावस्था शुरू होने से लेकर बच्चे के जन्म तक महिलाओं के शरीर में हार्मोन की प्रक्रिया और कार्य बदलती रहती है। महिलाओं में हार्मोन का असंतुलन होना बहुत ही सामान्य है, क्योंकि यह कुछ समय बाद ठीक भी हो जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों के कारण कुछ महिलाओं का हार्मोन संतुलन होने में काफी वक्त लगता है। महिलाओं के शरीर में हार्मोन का उतार-चढ़ाव जिंदगीभर बना रहता है। इस वजह से कई लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

गाजियाबाद इंदिरापुरम की स्त्री और रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीरा सिंह कहती हैं कि जब हमारे शरीर के ब्लडस्ट्रीम में हार्मोन अधिक या कम हो जाए, तो इस स्थिति को हार्मोन असंतुलन कहते हैं। महिलाओं के शरीर में हार्मोंन का काफी अहम योगदान होता है। हल्का सा हार्मोन असंतुलित होने से पूरे शरीर पर इसका असर दिखता है। हार्मोन एक तरह से शरीर का केमिकल होता है. जो शरीर के अंतःस्रावी तंत्र की ग्रंथियों में बनते हैं। यह हार्मोंन ब्लडस्ट्रीम (bloodstream) के जरिए टिश्यूज (tissue) और विभिन्न अंगों में पहुंचते हैं। इसके साथ ही शारीरिक प्रक्रिया में भी इसका अहम योगदान माना जाता है।  

महिलाओं में हार्मोन अंसतुलन के लक्षण ( Symptoms of Hormonal Imbalance In Female)

महिलाओं में अचानक वजन बढ़ना और वजव घटना हार्मोन असंतुलन का कारण हो सकता है। इसके अलावा कई अन्य ऐसे लक्षण हैं। आइए जानते हैं इन लक्षणों के बारे में-

  • थकान महसूस होना
  • त्वचा का शुष्क पड़ना
  • अचानक वजन घटना
  • भोजन न पच पाना (indigestion), कब्ज और डायरिया 
  • हार्ट रेट (heart rate) धीमा हो जाना
  • चेहरे पर मुहांसे
  • छाती में दर्द और जलन
  • प्यास अधिक लगना
  • मांसपेशियों का कमजोर हो जाना
  • बार-बार पेशाब लगना
  • सेक्स करने की इच्छा में कमी होना (decreased sex drive)
  • डिप्रेशन की शिकायत होना।
  • कमर के आसपास बाल उगना
  • पीरियड्स देर से आना भी हार्मोन असंतुलन का कारण हो सकता है। 
  • पीरियड्स में तेज ब्लीडिंग भी इसके लक्षण होते हैं।
  • महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) की समस्या हार्मोन असंतुलन के लक्षण हैं।
  • रात को सोते समय अधिक पसीना आना हार्मोन असंतुलन का कारण है। 
  • योनि में सूखापन (dryness)
  • ब्रेस्ट काफी सॉफ्ट होना
  • महिलाओं में बांझपन
  • बाल काफी कमजोर होना
  • क्लिटोरिस का बड़ा होना
  • आवाज भारी होना इत्यादि लक्षण हार्मोन संतुलन के हो सकते हैं। 

हार्मोंन असंतुलित होने के कारण (Causes of Hormonal Imbalance In Female)

  • ब्लड में ग्लूकोज से अधिक इंसुलिन बनना।
  • डायबिटीज के कारण 
  • स्ट्रेस और डिप्रेशन की समस्या होने पर।
  • हाइपोथॉयराइडिज्म और हारइपरथॉयराइडिज्म की शिकायत होने पर
  • पैराथॉयराइड हार्मोन का कम या अधिक उत्पादन होने के कारण भी यह समस्या हो सकती है। 
  • खाने में पोषक तत्वों की कमी
  • कीमोथेरेपी (chemotherapy) और रेडिएशन थेरेपी करवाने पर भी हार्मोन अंसतुलित हो सकते हैं। 
  • पिट्यूटरी ट्यूमर की शिकायत होने पर भी आपको यह समस्या हो सकती है।
  • शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन अधिक बनने के कारण भी आपके शरीर का हार्मोन असंतुलित हो सकता है।
  • पीरियड्स रुकने पर
  • गर्भनिरोधक गोलियों के अधिक सेवन से भी आपके शरीर का हार्मोन बिगड़ सकता है। 

महिलाओं में हार्मोन अंसतुलन के लिए आयुर्वेदिक दवा (Ayurvedic Herbs for Hormonal Imbalance In Female )

नारियल तेल (Coconut Oil For Hormonal Imbalance)

गाजियाबाद स्वर्ण जयंती के आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर राहुल चतुर्वेदी बताते हैं कि अगर आप अपने आहार का मुख्य रूप से ध्यान रखती हैं, तो हार्मोन बैंलेस रह सकता है। हार्मोन असंतुलित होने पर अपने भोजन में नारियल तेल को शामिल करें। हार्मोन को संतुलित रखने के लिए नारियल तेल एक बेहतरीन औषधि हो सकती है। नारियल तेल से हार्मोन्स संतुलित होने के साथ-साथ आपका वजन भी नियंत्रित रहेगा। 

ग्रीन टी से हार्मोन हो सकता है संतुलित (Green Tea Beneficial in Hormonal Imbalance)

ग्रीन टी के सेवन से ना सिर्फ हमारे शरीर का वजन कम होता है। बल्कि इसके सेवन से हार्मोन भी संतुलित होता है। ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया बेहतर होती है। ऐसे में रोजाना 1 से 2 कप ग्रीन टी अपने आहार में जरूर शामिल करें।

अलसी के बीज हार्मोन को करे संतुलित (Flax Seed Beneficial in Hormonal Imbalance)

डॉक्टर राहुल चतुर्वेदी बताते हैं कि अलसी के बीज में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में हार्मोन को संतुलित रखने में आपकी मदद करते हैं। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है. जो आपके शरीर में हार्मोन बनाने का कार्य करता है। महिलाओं के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड बहुत ही जरूरी है, इससे मासिक धर्म और मेनोपॉज की में होने वाली समस्याओं से राहत पाया जा सकता है। अपने आहार में नियमित रूप से 1 चम्मच अलसी को जरूर शामिल करें।

फाइबरयुक्त आहार से संतुलित होगा हार्मोन (Fiber Beneficial in Hormonal Imbalance)

फाइबरयुक्त आहार जैसे- साबुत अनाज, ओट्स, रेशेदार सब्जियों के सेवन से आप अपने शरीर के हार्मोन को संतुलित रख सकते हैं। इससे आपके शरीर को भरपूर पोषक तत्व मिलेगा। साथ ही ब्लड शुगर भी नियंत्रित होता है।

शतावरी और खरबूजा

शतावरी और खरबूजे के सेवन से हार्मोन असंतुलन की समस्या को दूर किया जा सकता है।

दालचीनी हार्मोन को संतुलित करने में करे मदद (Cinnamon Beneficial in Hormonal Imbalance)

दालचीनी के सेवन से भी आप अपने शरीर के हार्मोन को संतुलित कर सकते हैं। दालचीनी को आप किसी भी रूप में ले सकते हैं। इससे शरीर मैें इंसुलिन को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। 

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इसके साथ ही ऑलिव ऑयल को अपने आहार में शामिल करने से भी आप अपने शरीर को हार्मोन को संतुलित कर सकते हैं।

किन चीजों का करें सेवन (Which diet can you consume)

पॉल्ट्री और फैटी मछली के सेवन से महिलाओं के शरीर का हार्मोन संतुलित किया जा सकता है। सैल्मन, सार्डिन, मैकेरल जैसी फैटी मछलियों के सेवन से हार्मोन संतुलित रहता है।

पत्तेदार सब्जियां जैसे- गोभी, ब्रोकली, गोभी, पत्तागोभी, फूलगोभी, अंकुरित बीज इत्यादि का सेवन महिलाओं के लिए अच्छा माना जाता है। इसके सेवन से स्तन कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।

विटामिन बी युक्त आहार का सेवन महिलाओं के लिए अच्छा होता है। इस विटामिंस के सेवन से स्ट्रेस और डिप्रेशन की समस्यो को कंट्रोल किया जा सकता है।

इन चीजों से करें परहेज (Avoid these things)

  • शर्करायुक्त आहार जैसे- ब्राउन शुगर, व्हाइट शक्कर, हाई फ्रक्टोज मकई सिरप इत्यादि के सेवन से हार्मोन अंसतुलित हो सकता है। इसलिए अपने भोजन में कम शर्करायुक्त आहार को शामिल करें।
  • कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के सेवन से बचें। कम से कम चाय और कॉफी पिएं।  
  • शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
  • मसालेदार भोजन ना करें। 
  • जंकफूड्स से दूर रहें।
  • सुस्ती और आसल भरे लाइफस्टाइल में बदलाव करें।

 

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