Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो कम होने पर क्या होता है? डॉक्टर से जानें गर्भस्थ शिशु पर इसका असर

प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो कम होना सही नहीं है। इससे शिशु के मानसिक-शारीरिक विकास पर असर पड़ सकता है और उन्हें न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी हो सकती हैं। जानें, ऐसा होने के क्या कारण हो सकते हैं?

प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवस्थ शिशु को पर्याप्त पोषण, ऑक्सीजन और हार्मोनल जरूरतें प्लेसेंटा के जरिए ही पहुंचती हैं। इससे साफ स्पष्ट होता है कि प्लेसेंटा के बिना गर्भ में पल रहे शिशु का विकास संभव ही नहीं है। वैसे तो यह एक अस्थायी अंग है, जो कि शिशु के जन्म के बाद निकल जाता है और डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि गर्भाशय पूरी तरह क्लीन हो जाए। बहरहाल, क्या कभी आपने सोचा है कि अगर किसी वजह से प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो कम हो जाए, तो क्या होगा? असल में इसका प्रेग्नेंसी पर बुरा असर पड़ सकता है। आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से इस बारे में विस्तार से।

प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो कम होने पर क्या होता है?

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प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो का सुचारू ढंग से होना बहुत जरूरी है। जब ऐसा नहीं होता है, इसकी वजह से गर्भस्थ शिशु का विकास पूरी तरह बाधित हो जाता है। डाॅ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो में रुकावट आने का मतलब है कि शिशु तक सही मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच रहे हैं। इसकी वजह से ऐसी स्थिति पैदा होती है, जिसमें गर्भ में पल रहे शिशु का विकास उसकी गर्भावधि (Gestational Age) के अनुकूल नहीं होता है। नतीजतन, जन्म के समय शिशु का वजन कम हो सकता है, जो कि भविष्य में उसके फिजिकल-मेंटल ग्रोथ को बाधित कर सकता है।" साल 2011 में The Journal of Obstetrics And Gynecology Of India में प्रकाशित रिव्यू आर्टिकल के अनुसार, शुरुआती गर्भावस्था में जब गर्भनाल की नसें ठीक से विकसित नहीं हो पातीं, तो प्लेसेंटा तक खून का बहाव कम हो सकता है। खून की इस कमी के कारण प्लेसेंटा के अंदरूनी हिस्से डैमेज हो जाते हैं, जिससे बच्चे तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंच पाता। निश्चित रूप से यह स्थिति शिशु के लिए सही नहीं है।

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शिशु के अंगों पर प्रभाव

गर्भनाल की खराबी के कारण शिशु के अलग-अलग अंगों पर प्राथमिकता के आधार पर क्या और किस तरह का असर पड़ता है, जानें-

अंग  रक्त प्रवाह विकास पर असर कारण
दिमाग और दिल बढ़ जाता है  शुरुआत में सामान्य रहता है शिशु का शरीर जीवित रहने के लिए सबसे पहले इन्हें सेव करता है।
पेट और लिवर  कम हो जाता है विकास सबसे पहले धीमा पड़ता है इन अंगों के खून का बहाव दिमाग की तरफ होने लगता है।
मांसपेशियां और फैट बहुत कम

वजन में भारी गिरावट आती है

पोषण की कमी के कारण शरीर में फैट नहीं बन पाता।

कुल शरीर (जन्म के बाद)

  भविष्य में बीपी और मोटापा जैसी समस्या होना गर्भ में हुए नुकसान के कारण भविष्य में मेटाबॉलिज्म कमजोर हो जाता है।

प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो कम होने का शिशु स्वास्थ्य पर असर

रक्त प्रवाह में बदलावः गर्भस्थ शिशु को विकास के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की जरूरत होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो बाधित होता है, तो इसकी वजह से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। जब गर्भ में पल रहे शिशु को लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ता है, तो शिशु का शरीर खून की सीमित मात्रा को पहले दिमाग और दिल जैसे जरूरी अंगों की तरफ भेजता है, जबकि बाकी अंगों (जैसे लिवर या त्वचा) को कम खून मिलता है।

असंतुलित शारीरिक विकासः NCBI (StatPearls) के मेडिकल शोध के अनुसार, प्लेसेंटल इंसफिशिएंसी यानी गर्भनाल की कमजोरी के कारण गर्भ में पल रहे शिशु तक ऑक्सीजन और पोषण की कमी हो जाती है, जिस वजह से शिशु का शारीरिक विकास पूरा नहीं हो पाता है। डाॅ. शोभा इसे स्पष्ट करती हैं, "जब जरूरी ब्लड फ्लो दिल और दिमाग तक पहुंचता है, जिससे शरीर के अन्य अंगों तक ऑक्सीजन सप्लाई नहीं हो रही है। ऐसे में लिवर और पेट की तरफ जाने वाला खून कम हो जाता है। ऐसे में बच्चे का वजन प्रभावित हो सकता है, जो कि उसके विकास को असंतुलित कर सकता है।"

मेटाबोलिक समस्याएंः जब गर्भवस्थ शिशु को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता है, तो उसकी मांसपेशियों और फैट का विकास ठीक से नहीं हो पाता। इसके कारण बच्चा मेटाबोलिक एसिडोसिस यानी खून में एसिड का बढ़ना, हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर का बहुत कम होना) और कैल्शियम की कमी जैसी समस्याएं होने का रिस्क बढ़ जाता है। साल 2016 में Impact Of Placental Insufficiency On Fetal Skeletal Muscle Growth में प्रकाशित एक रिव्यू आर्टिकल से भी इस बात की पुष्टि होती है कि प्लेसेंटा में ऑक्सीजन सप्लाई कम होने से शिशु को मेटाबोलिक समस्याएं हो सकती हैं।

भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याएंः प्लेसेंटा में पर्याप्त ब्लड फ्लो नहीं होने के कारण बच्चे का आकार छोटा रहता है। ऐसे में बच्चे को भविष्य में न्यूरोलॉजिकल परेशानियां और बड़े होने पर दिल की बीमारियां या मोटापे का खतरा काफी अधिक होता है।

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how poor placental blood flow impacts fetal growth inside (5)

प्लेसेंटा में ऑक्सीजन सप्लाई कम होने के कारण

  • पुरानी बीमारियांः अगर किसी महिला को लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, प्री-एकलैम्प्सिया और पहले से चली आ रही दिल की बीमारियां हैं, तो इसकी वजह से नसों सिकुड़ जाती हैं, जिससे प्लेसेंटा और गर्भाशय तक सामान्य ब्लड फ्लो नहीं हो पाता है।
  • मेटाबोलिक समस्याः डायबिटीज या जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी बीमारियां भी गर्भनाल तक खून पहुंचाने में अवरोध पैदा करती हैं।
  • थक्के जमने की समस्याः अगर कोई महिला खून पतला करने की दवा ले रही है या थ्रोम्बोफिलिया जैसी बीमारी से जूझ रही है, तब भी ब्लड फ्लो बाधित होता है।
  • खराब जीवनशैलीः अगर कोई महिला खराब खान-पान या बुरी जीवनशैली अपना रही है या नशीले पदार्थों का सेवन कर रही है, तो भी उन्हें यह समस्या हो सकती है।

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गर्भवती महिलाएं क्या करें

अगर किसी वजह से गर्भावस्था में प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो बाधित हो रहा है, तो इसे इग्नोर न करें-

  1. इस तरह की स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
  2. एक्सपर्ट की मदद से अपना ट्रीटमेंट करवाएं। 
  3. अपनी स्थिति को पूरी तरह मॉनिटर करें।
  4. गर्भस्थ शिशु के मूवमेंट पर भी पूरा ध्यान दें।
  5. डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को समय पर लें।
  6. हाई बीपी या डायबिटीज को सही तरह से मैनेज करें।

निष्कर्ष

प्लेसेंटा में ऑक्सीजन सप्लाई कम होना बिल्कुल सही नहीं है। हालांकि, ऐसा किसी गंभीर बीमारी की वजह से हो सकता है, लेकिन ध्यान रखें कि इसका शिशु के विकास पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। भविष्य में उसे गंभीर बीमारियां भी हो सकती है। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए जरूरी है कि समय पर डॉक्टर के पास जाएं और समय-समय पर खुद को मॉनिटर करें।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या गर्भावस्था के दौरान सोने की पोजीशन बदलने से प्लेसेंटा का ब्लड फ्लो सुधारा जा सकता है?

    हां, गर्भावस्था में बाईं करवट सोने से शरीर की मुख्य नस पर दबाव कम होता है, जिससे गर्भाशय और प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो सही बना रहता है।
  • प्लेसेंटा में ब्लड फ्लो कम होने पर क्या अर्ली डिलीवरी हो सकती है?

    अगर शिशु तक ऑक्सीजन प्रवाह कम है, तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। इसलिए डॉक्टर मैच्योरिटी से पहले सी-सेक्शन या इंड्यूस्ड लेबर के जरिए जल्दी डिलीवरी करा सकते हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 16, 2026 10:45 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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