Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

यंग कपल्स में तेजी से क्‍यों बढ़ रही है इंफर्टिलिटी? गाइनोकॉलोज‍िस्‍ट से जानें कौन से कारण हैं ज‍िम्‍मेदार

गर्भधारण न कर पाने की स्‍थ‍ित‍ि को इंफर्टि‍ल‍िटी कहा जाता है। यह समस्‍या 35 की उम्र के बाद देखने को म‍िलती है, लेक‍िन आजकल यंग कपल्‍स में यह समस्‍या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्‍टर से जानते हैं आख‍िर इसके पीछे क्‍या कारण हो सकते हैं?

पहले के समय में अध‍िक इंफर्टि‍ल‍िटी ट्रीटमेंट वाले सेंटर नहीं द‍िखते थे, लेक‍िन अब शहर के कई ह‍िस्‍सों में इंफर्टि‍ल‍िटी ट्रीटमेंट के सेंटर्स खुल रहे हैं। क्‍या कभी आपने गौर क‍िया है ऐसा क्‍यों हो रहा है? दरअसल इंफर्ट‍िल‍िटी की समस्‍या अध‍िक उम्र वाले जोड़ों में देखने को म‍िलती थी, लेक‍िन अब 5 में से 1 कपल को यह समस्‍या होने लगी है। माता-प‍िता बनना एक खूबसूरत एहसास होता है जो कई लोग अनुभव करना चाहते हैं, लेक‍िन इंफर्टि‍लि‍टी के बढ़ते रेट से लोगों को मायूसी ही हाथ लगती है। इंफर्ट‍िल‍िटी ट्रीटमेंट के बारे में जानने से पहले यह जानना जरूरी है क‍ि आख‍िर इसकी जरूरत ही क्‍यों पड़ रही है? यानी यंग कपल्‍स में इंफर्ट‍िल‍िटी की समस्‍या तेजी से क्‍यों बढ़ रही है? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Tanima Singhal, Prenatal Care Expert, Gynaecologist & Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।

पुरुषों में इंफर्टि‍ल‍िटी होने के कॉमन कारण

infertility-in-young-couples

  • पुरुषों में धूम्रपान, कुछ दवाएं वगैरह के कारण स्‍पर्म काउंट कम हो जाता है और इंफर्टि‍ल‍िटी जैसी समस्‍या हो सकती है।
  • अगर स्‍पर्म काउंट ठीक है, लेक‍िन स्‍पर्म का शेप सही नहीं है, तो भी अंडाणु सही ढंग से फर्टि‍लाइज नहीं हो पाता है।
  • साथ ही स्‍पर्म की अंडाणु तक पहुंचने की ग‍त‍ि धीमी होना भी इंफर्टि‍ल‍िटी का कारण बन सकती है।

यह भी पढ़ें- पुरुषों को फर्टिलिटी टेस्ट कब और कौन से कराने चाहिए? डॉक्टर ने दी पूरी जानकारी

म‍ह‍िलाओं में इंफर्टि‍ल‍िटी होने के कॉमन कारण

  • पीएमओएस (ज‍िसे पहले पीसीओएस कहा जाता था) एक तरह की मेटाबॉल‍िक समस्‍या है ज‍िसके कारण पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हो सकते हैं और प्रेग्‍नेंसी प्‍लान करने में मुश्‍क‍िल हो सकती है।
  • मह‍िलाओं में एंडोमेट्रियोसिस एक समस्‍या है जो इंफर्ट‍िल‍िटी का कारण बन सकती है। इसमें गर्भाशय की परत एंडोमेट्र‍ियम के समान ट‍िशूज गर्भाशय के बाहर व‍िकस‍ित होने लगते हैं।

यह भी पढ़ें- क्या 30 की उम्र के बाद पुरुषों की फर्टिलिटी कम होने लगती है? जानें स्टडी और डॉक्टर की राय

क्‍या कहती हैं स्‍टडीज?

साल 2021 में International Journal Of Community Medicine And Public Health नामक जर्नल में प्रकाश‍िक एक स्‍टडी के मुताब‍िक, काम का अध‍िक तनाव, अन‍ियम‍ित जीवनशैली, फ‍िज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी की कमी, नींद की कमी, अनहेल्‍दी डाइट के चलते इंफर्टि‍ल‍िटी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्‍टडी में वर्क स्‍ट्रेस और श‍िफ्ट टाइम‍िंग को भी इसका ज‍िम्‍मेदार माना है।

साल 2023 में PLOS ONE नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, 2015 और 2016 में इंफर्टि‍लि‍टी रेट 22.4 से बढ़कर 30.7 प्रत‍िशत हो गया। स्‍टडी में उच्‍च श‍िक्षा, देर से शादी, मोटापा, नशीले पदार्थों का सेवन वगैरह को इसके ल‍िए ज‍िम्‍मेदार माना है। भारत के दक्षिणी राज्यों में इसकी दर ज्‍यादा देखी गई है।

यह भी पढ़ें- बार-बार मिसकैरेज होना इनफर्टिलिटी से कैसे अलग है? डॉक्टर से जानें क्या है इनका इलाज

मॉर्डन लाइफस्‍टाइल यंग कपल्‍स में बढ़ा सकती है इंफर्ट‍िल‍िटी

  • Dr. Tanima Singhal ने बताया क‍ि उनके पास कई ऐसे कपल्‍स आते हैं, जो वर्कि‍ंग है और ज‍िनके पास समय की कमी है, साथ ही वे हेल्‍दी प्रेग्‍नेंसी प्‍लान करना चाहते हैं, लेक‍िन स्‍ट्रेसफुल वातावरण शरीर और मन पर बुरा असर डालता है और यह इंफर्ट‍िल‍िटी का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है।
  • एक्‍सरसाइज की कमी से मह‍िलाओं में ओव्‍यूलेशन की प्रक्र‍िया प्रभाव‍ित होती है और पुरुषों में स्‍पर्म काउंट ज‍िससे बांझपन की दर बढ़ जाती है।
  • आजकल हम हेल्‍दी डाइट पर चर्चा, तो बहुत करते हैं लेक‍िन टाइम की कमी से लोग कभी खाना बाहर से ऑर्डर कर ल‍ेते हैं, तो कभी झटपट बनने वाले रेडी-टू-ईट स्‍नैक्‍स खा लेते हैं। यह समस्‍या अक्‍सर यंग और वर्कि‍ंग कपल्‍स के साथ होती है। इसका असर मह‍िलाओं के एग और पुरुषों के स्‍पर्म पर होता है ज‍िससे प्रेग्‍नेंसी प्‍लान करना मुश्‍क‍िल हो सकता है।
  • स्‍ट्रेस, टार्गेट, वर्कलोड, घर और पर‍िवार की ज‍िम्‍मेदारी, ये सभी शब्‍द सुनने में इतने बड़े न लगें, लेक‍िन मॉर्डन लाइफस्‍टाइल में ये इंफर्टि‍ल‍िटी का मुख्‍य कारण बनते जा रहे हैं। स्‍ट्रेस, र‍िप्रोडक्‍ट‍िव और हार्मोनल हेल्‍थ को प्रभाव‍ित करता है ज‍िसके कारण इंफर्टि‍ल‍िटी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

यह भी पढ़ें- पुरुषों में इनफर्टिलिटी के हैं ये 5 शुरुआती संकेत, डॉक्टर से जानें ज्यादातर लोग क्यों कर देते हैं नजरअंदाज

इंफर्ट‍िल‍िटी ट्रीटमेंट की मदद कब ली जाती है?

  • अगर मह‍िला की उम्र 35 साल या उससे ज्‍यादा है और कंसीव करने में परेशानी हो रही है, एक साल कोश‍िश करके भी प्रेग्‍नेंसी संभव नहीं हो पा रही है, तो इंफर्टि‍ल‍िटी ट्रीटमेंट क‍िया जाता है।
  • अगर मह‍िला अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स, पीएमओएस, थायराइड जैसी बीमार‍ियों का श‍िकार है और गर्भधारण में समस्‍या हो रही है, तो भी इंफर्टि‍ल‍िटी ट्रीटमेंट करवा सकती है।
  • पुरुषों में स्‍पर्म काउंट कम होने पर या टेस्‍टि‍स की बीमारी में भी इंफर्टि‍लि‍टी ट्रीटमेंट की मदद ली जाती है।

न‍िष्‍कर्ष:

एक्‍सरसाइज की कमी, अनहेल्‍दी डाइट, स्‍ट्रेस, अन‍ियम‍ित जीवनशैली जैसे शब्‍द हार्मोनल और र‍िप्रोडक्‍ट‍िव हेल्‍थ को बुरी तरह प्रभाव‍ित करते हैं ज‍िसके कारण यंग कपल्‍स में इंफर्टि‍ल‍िटी तेजी से बढ़ रही है। पीएमओएस, एंडोमेट्रियोसिस, खराब स्‍पर्म काउंट जैसे कारण यंग कपल्‍स में इंफर्ट‍िल‍िटी का कॉमन कारण बन रहे हैं।

image credit: freepik

FAQ

  • मह‍िलाओं में फर्ट‍िल‍िटी रेट कब घटने लगता है?

    35 के बाद मह‍िलाओं में फर्टि‍ल‍िटी रेट घटने लगता है। इस दौरान एग की क्‍वॉल‍िटी धीरे-धीरे कम होने लगती है।
  • कपल को फर्टि‍ल‍िटी एक्‍सपर्ट से कब म‍िलना चाह‍िए?

    अगर एक साल से ज्‍यादा समय से कंसीव करने की कोश‍िश कर रहे हैं और मह‍िला की उम्र 35 से ज्‍यादा है, तो फर्टि‍लि‍टी एक्‍सपर्ट से संपर्क करना चाह‍िए।

Read Next

गर्भनाल या प्लेसेंटा को कमजोर बना सकती हैं लाइफस्टाइल से जुड़ी ये 7 बुरी आदतें, प्रेग्नेंसी में बरतें सावधानी

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 15, 2026 23:05 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Tanima Singhal

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content