Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

गर्भनाल या प्लेसेंटा को कमजोर बना सकती हैं लाइफस्टाइल से जुड़ी ये 7 बुरी आदतें, प्रेग्नेंसी में बरतें सावधानी

गर्भनाल का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है, ताकि शिशु तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की सप्लाई सही तरह से होती रहे। मगर गर्भवती महिलाओं की जीवनशैली से जुड़ी कई बुरी आदतें गर्भनाल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। जानें, कैसे?

गर्भनाल एक अस्थायी अंग जरूर है, लेकिन प्रेग्नेंसी में भ्रूण के विकास के लिए यह सबसे जरूरी अंग हो जाता है। यही वह एकमात्र जरिया है जो मां के जरिए शिशु तक सभी आवश्यक पोषक तत्व, ऑक्सीजन पहुंचाता है और टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है। इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि प्रेग्नेंसी के सफर में प्लेसेंटा की एहमियत कितनी है। इस जर्नी में महिला को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जो उनके गर्भनाल या प्लेसेंटा को कमजोर बनाए या नुकसान पहुंचा सकता है। क्या आप जानती हैं कि कई बार जाने-अनजाने गर्भावस्था में महिलाएं कुछ ऐसी आदतों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लेती हैं, जो गर्भनाल को क्षति पहुंचा सकती हैं। वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से जानते हैं उनके बारे में।

प्लेसेंटा को कमजोर बनाने वाली लाइफस्टाइल से जुड़ी बुरी आदतें

lifestyle habits that can affect placental health during pregnancy you should not ignore 01 (21)

प्लेसेंटा को हेल्दी रखने के लिए जरूरी है कि आप अच्छी आदतें अपनाएं, लेकिन कुछ आदतें इसको नुकसान पहुंचा सकती हैं, जैसे-

1. अतिरिक्त कैफीन का सेवन

कुछ महिलाओं को चाय या कॉफी पीना बहुत पसंद होता है। प्रेग्नेंसी में भी वे अपनी इस आदत में बदलाव नहीं करती हैं। क्या आप जानती हैं कि प्रेग्नेंसी में कैफीन का सेवन सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए।

साल 2021 में JAMA Network Open में प्रकाशित मेडिकल जर्नल के अनुसार, एक महिला को प्रतिदिन 200 मिलीग्राम तक ही कैफीन का सेवन करना चाहिए। अगर वे इससे अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करती हैं, तो इससे ब्लड फ्लो बाधित हो सकता है, जिससे शिशु तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं होती है और डिलीवरी के समय भी शिशु का वजन कम हो सकता है।

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2. पर्याप्त पानी न पीना

हर व्यक्ति के लिए रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना अनिवार्य होता है। कम पानी पीने से ब्लड फ्लो बाधित हो सकता है। इस लिहाज से देखा जाए, तो प्रेग्नेंसी में महिला को सामान्य लोगों की तुलना में अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करती हैं, तो इसकी वजह से उनकी बॉडी डिहाइड्रेट हो सकती है। ध्यान रखें कि डिहाइड्रेशन बॉडी के लिए सही नहीं है। साल 2021 में Journal of Nutritional Science में प्रकाशित क्लिनिकल रिसर्च स्टडी से पता चलता है कि गर्भावस्था में पानी की कमी का बच्चे के जन्म के समय वजन और लंबाई पर सीधा असर पड़ता है। यहां तक कि इसकी वजह से प्लेसेंटा पर भी बुरा असर पड़ता है। पानी की कमी प्लेसेंटा की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है, जो कि शिशु के स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल सही नहीं है।

3. खराब डाइट लेना

Why pregnant women face nutrient deficiencies despite eating well 1 (13)

प्रेग्नेंसी में अपनी डाइट के साथ किसी भी महिला को समझौता नहीं करना चाहिए। इससे सीधे-सीधे शिशु का विकास बाधित होता है। यहां तक कि खराब डाइट की वजह से शिशु को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता है, जिससे उसको जन्मजात दोष होने का खतरा बढ़ जाता है। बहरहाल, हम बात करते हैं कि खराब डाइट गर्भनाल पर कैसे असर डाल सकती है? साल 2015 में Reproduction में प्रकाशित एक्सपेरिमेंटल स्टडी के अुनसार, प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में अगर मां सही डाइट फॉलो नहीं करती है, तो गर्भनाल का वजन काफी कम हो जाता है और उसका विकास भी बाधित होता है। इसका कनेक्शन सीधे शिशु से होता है।

4. गर्भकालीन मधुमेह को कंट्रोल न करना

कई महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज हो जाता है, जिसे हम गर्भकालीन मधुमेह भी कहते हैं। प्रेग्नेंसी में मधुमेह को कंट्रोल किया जाना बहुत जरूरी होता है। अगर गर्भवती महिला अपने ब्लड शुगर के स्तर को लेकर सावधानी नहीं बरतती है, तो इसका प्रभाव भी गर्भनाल पर पड़ सकता है। साल 2021 में Touch Endocrinology में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, जेस्टेशनल डायबिटीज होने पर गर्भनाल में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस यानी कोशिकाओं को नुकसान होता है और ब्लड वेसल्स में बदलाव आने लगते हैं। वहीं, अगर प्रेग्नेंसी में महिला का शुगर का स्तर बढ़ा रहता है, तो इसकी वजह से गर्भनाल के सेल्स हाइपर-एक्टिव हो जाते हैं। परिणामस्वरूप गर्भवस्थ शिशु को बहुत ज्यादा ग्लूकोज और फैट ट्रांसफर होने लगता है, जो कि उसके स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

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5. शराब का सेवन और स्मोकिंग करना

डाॅ. शोभा गुप्ता के मुताबिक, "वैसे तो प्रेग्नेंसी में किसी भी महिला को जाने-अनजाने भी शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। वहीं स्मोकिंग से शरीर का ब्लड फ्लो कम होता है, गर्भनाल को क्षति हो सकती है और समय पूर्व इसका गर्भाशय से अलग होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसी तरह, शराब की बेहद कम मात्रा भी गर्भावस्था को नुकसान पहुंचा सकती है और उसके कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे किसी भी स्थिति में प्रेग्नेंसी के दौरान इस तरह के नशीले पदार्थों का सेवन न करें।"

6. शारीरिक गतिविधियों की कमी

साल 2024 में Journal Of Science And Medicine In Sport में प्रकाशित रिसर्च स्टडी में कहा गया है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित और सही तरीके से एक्सरसाइज किया जाना मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में बेहद मददगार है। एक्टिव रहने से गर्भनाल में खून और ऑक्सीजन फ्लो बेहतर बना रहता है, जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास बिल्कुल सही तरीके और सही वजन के साथ होता है। वहीं, अगर महिलाएं शारीरिक रूप से एक्टिव नहीं होती हैं, तो इसकी वजह से गर्भनाल का विकास बाधित हो सकता है और कई अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं।

7. अत्यधिक तनाव में रहना

वैसे तो तनाव में कोई भी नहीं रहना चाहता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं को इस ओर अधिक ध्यान देना चाहिए। तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज होता है, जिसकी वजह से महिला अक्सर थकान और कमजोरी से घिरी रहती है। प्रेग्नेंसी में यह अवस्था सही नहीं है, क्योंकि इसका सीधा-सीधा असर भ्रूण पर पड़ता है।

साल 2020 में Obstetrics And Gynecology Clinics Of North America में प्रकाशित समीक्षा के अनुसार, अत्यधिक तनाव से प्लेसेंटा की ग्रोथ और उसकी कार्यक्षमता दोनों कमजोर हो जाती है। इसलिए, महिलाओं के लिए जरूरी है कि प्रेग्नेंसी में वे तनाव के स्तर को मैनेज करने की कोशिश करें।

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गर्भनाल में समस्याओं के लक्षण

अगर गर्भनाल में किसी भी तरह की समस्या होती है, तो कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे-

  • प्रेग्नेंसी की दूसरी या तीसरी तिमाही में अचानक योनि से रक्तस्राव होना।
  • पेट के निचले हिस्से में अकड़न महसूस होना। कई बार पेट में तीव्र दर्द उठना।
  • अचानक गर्भ में पल रहे शिशु की मूवमेंट में कमी आना।
  • प्रसव की तारीख से पहले ही एक घंटे के अंदर 6 से ज्यादा बार संकुचन महसूस करना।

डॉक्टर से कब मिलें?

डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "आमतौर पर गर्भनाल में हो रहे बदलावों को महिलाएं आसानी से समझ नहीं सकती हैं, इसलिए उन्हें शरीर में नजर आ रहे हर छोटे-बड़े लक्षणों पर गौर करना चाहिए। अगर वे नोटिस करें कि एकाएक उन्हें वजाइनल ब्लीडिंग होने लगी है, गर्भ में भ्रूण का हिलना-डुलना कम हो गया है, गर्भाशय पहले की तुलना में अधिक भारी लगने लगा है और अचानक योनि से साफ पानी बहने लगा है। अगर इनमें से एक भी संकेत नजर आए, तो डॉक्टर के पास जाने में देरी न करें। ये सभी संकेत गर्भनाल में होने वाली दिक्कतों की ओर इशारा कर सकता है।"

निष्कर्ष

गर्भनाल में किसी भी तरह के बदलाव को हल्के में लिया जाना सही नहीं है। गर्भनाल शिशु की लाइफलाइन होती है। इसी के जरिए उसे सभी चीजें, जैसे कि पोषण, ऑक्सीजन आदि मिलते हैं। गर्भनाल में हो रही दिक्कतें सिर्फ शिशु के लिए ही नहीं, गर्भवती महिला के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान जरूरी है कि महिलाएं अपनी जीवनशैली से जुड़ी अच्छी आदतों को अपनाएं, जो शिशु और उनके स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डाले।

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FAQ

  • क्या प्रेग्नेंसी में पीठ के बल सोने से गर्भनाल को नुकसान हो सकता है?

    हां, इससे मुख्य नस पर दबाव पड़ सकता है, जो कि गर्भनाल और शिशु तक खून व ऑक्सीजन की सप्लाई को कम कर सकता है। गर्भावस्था में बाईं करवट सोना बेहतर है।
  • प्लेसेंटा प्रीविया क्या है?

    यह एक ऐसी स्थिति है, जब गर्भनाल गर्भाशय के निचले हिस्से में आ जाती है और बच्चेदानी के मुंह (रास्ते) को ढक लेती है।
  • क्या प्रेगनेंसी से पहले हाई ब्लड प्रेशर होने का असर गर्भनाल पर पड़ता है?

    हां, हाई ब्लड प्रेशर के कारण गर्भनाल की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे शिशु तक पर्याप्त पोषण और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है।

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 13, 2026 13:17 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jul 13, 2026 13:17 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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