Sun Oct 11, 2026 | 02:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा की सही पोजीशन क्यों जरूरी है? समझें मां और शिशु की सेहत के लिए इसका महत्व

प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा की पोजीशन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार प्लेसेंटा की पोजीशन के कारण शिशु की मूवमेंट की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती है और कुछ मामलों में प्लेसेंटा की पोजीशन सर्विक्स का मुंह बंद कर देती है, जिससे वजाइनल डिलीवरी की संभावना कम हो जाती है।
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प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा का अहम योगदान होता है। यही एकमात्र ऐसी चीज है, जो सीधे शिशु तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुंचाने का काम करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा की पोजीशन भी मायने रखती है? विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा की स्थिति से यह तय होता है कि गर्भस्थ शिशु की हलचल किस तरह महसूस होगी, आपके अल्ट्रासाउंड स्कैन कैसे किए जाएंगे और डिलीवरी के समय किसी तरह की जटिलता या जोखिम का खतरा है या नहीं। बहरहाल, इस लेख में हम वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से इस बारे में और डिटेल में जानेंगे कि प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा की पोजीशन क्यों मायने रखती है?

प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा की पोजीशन क्यों है जरूरी?

1. शिशु की मूवमेंट की जानकारी

प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा की पोजीशन के जरिए शिशु की मूवमेंट पर नजर रखी जा सकती है। डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "अगर प्लेसेंटा आगे की तरफ है, तो बच्चे की लात या हलचल देर से या हल्की महसूस हो सकती है। वहीं अगर प्लेसेंटा पीछे की ओर है, तो शुरुआत से ही बच्चे की हलचल बहुत स्पष्ट महसूस होती है।"

अमरीका के National Institutes of Health (NIH) की National Library of Medicine (NLM) लाइब्रेरी में उपलब्ध StatPearls में प्रकाशित समीक्षा के अनुसार, गर्भस्थ शिशु की मूवमेंट प्लेसेंटा की पोजीशन पर काफी हद तक निर्भर करती है। हालांकि, कई बार प्लेसेंटा की पोजीशन के कारण शिशु की हलचल कम महसूस हो सकती है, मगर यह सामान्य है।

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2. मेडिकल जांच और प्रक्रियाओं की जानकारी

शायद ही कभी किसी प्रेग्नेंट महिला ने यह सोचा होगा कि प्लेसेंटा की पोजीशन के कारण मेडिकल जांच और प्रक्रिया की सटीक जानकारी मिलती है। डाॅ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "वैसे तो हर स्थिति में गर्भवस्थ की धड़कन जांचना और अल्ट्रासाउंड करना आसान होता है। फिर भी प्लेसेंटा आगे होने पर कभी-कभी एम्नियोसेंटेसिस (गर्भाशय के पानी की जांच) जैसी खास जांचों में थोड़ी मुश्किलें आ सकती हैं।"

3. डिलीवरी के जोखिम की जानकारी

आमतौर प्लेसेंटा की पोजीशन के कारण नाॅर्मल डिलीवरी में किसी भी तरह की रुकावट या बाधा नहीं आती है। हां, अगर प्लेसेंटा बहुत नीचे है या बच्चेदानी के मुंह (सर्विक्स) को ढक रहा है, तो ऐसे में नॉर्मल डिलीवरी मुश्किल हो सकती है। ध्यान रखें कि इस स्थिति को प्लेसेंटा प्रिविया कहा जाता है। ऐसी कंडीशन में डिलीवरी के दौरान हैवी ब्लीडिंग हो सकती है और इमर्जेंसी में सिजेरियन की जरूर पड़ती है।

डाॅ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "20वें हफ्ते के स्कैन में नीचे दिखने वाला प्लेसेंटा अक्सर गर्भाशय के फैलने के साथ अपने आप ऊपर की ओर खिसक जाता है। इसके बावजूद, प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में प्लेसेंटा पर नजर रखना जरूरी होता है।"

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प्लेसेंटा की अलग-अलग पोजीशन

प्लेसेंटा की पोजीशन हमेशा एक ही जगह नहीं होती है। ये अलग-अलग हो सकती है, जैसे-

  • एंटेरियर प्लेसेंटाः अंतर्राष्ट्रीय मेडिकल जर्नल Placenta के अनुसार, प्लेसेंटा के सामने होने पर शिशु का सिर नीचे लेकिन पीठ मां की रीढ़ की हड्डी की तरफ होने की संभावना बढ़ जाती है। दरअसल, इस स्थिति में प्लेसेंटा गर्भाशय की आगे की दीवार यानी आपके पेट की तरफ जुड़ा होता है। इस कंडीशन में प्लेसेंटा शिशु के लिए तकिए की तरह काम करता है। इस अवस्था में शिशु की हलचल आमतौर पर गर्भावस्था के 18वें हफ्ते के आसपास महसूस होती है। वहीं, शिशु की लात मां के लिए हल्की या दबी हुई महसूस हो सकती है। 
  • पोस्टीरियर प्लेसेंटाः Cleveland Clinic की मानें, तोइसमें प्लेसेंटा गर्भाशय की पीछे की दीवार यानी आपकी रीढ़ की हड्डी की तरफ जुड़ा होता है। इस अवस्था में बच्चे और मां के बीच किसी तरह की कोई रुकावट नहीं होती है, इसलिए शिशु की हलचल स्पष्ट रूप से समझ आती है। इससे मां के लिए अपने शिशु की मूमेंट पर नजर रखना आसान होता है।
  • फंडल प्लेसेंटाः इसमें प्लेसेंटा गर्भाशय के सबसे ऊपरी हिस्से से जुड़ा हुआ होता है। डाॅ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "फंडल प्लेसेंटा सबसे बेहतर पोजीशन होती है, क्योंकि इससे बच्चे तक रक्त प्रवाह बेहतर तरीके से होता है और उसे सही तरह से बढ़ने में भी मदद मिलती है।"
  • लेटरल प्लेसेंटाः इसमें प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार के दाईं या बाईं तरफ जुड़ा होता है। यह भी एक सामान्य पोजीशन है, जिसमें शिशु का विकास स्वस्थ तरीके से होता है। चूंकि, यह सर्विक्स को ब्लाॅक नहीं करता है, इसलिए इसमें नाॅर्मल डिलीवरी की संभावना भी बनी रहती है।

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निष्कर्ष

प्रेग्नंसी में प्लेसेंटा की पोजीशन क्या है, इस पर काफी हद तक शिशु की मूवमेंट यानी हलचल निर्भर करती है। वहीं, कुछ टेस्ट और जांच के बारे में प्लेसेंटा की पोजीशन मायने रखती है। हालांकि, कुल मिलाकर आप कह सकते हैं कि प्रेग्नेंसी में प्लेसेंटा की सही पोजीशन सी-सेक्शन डिलीवरी के जोखिम को कम कर सकती है। अगर प्लेसेंटा सही जगह है और सर्विक्स का मुंह बंद नहीं कर रही है, तो वजाइनल डिलीवरी की संभावना भी बढ़ जाती है।

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FAQ

  • क्या प्रेग्नेंसी के दौरान एक्सरसाइज या योग करने से प्लेसेंटा की पोजीशन बदली जा सकती है?

    एक्सरसाइज या योग करने से प्लेसेंटा की पोजीशन नहीं बदलती है। प्लेसेंटा की पोजीशन इस बात पर निर्भर करती है कि फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय की किस दीवार पर इंप्लांट हुआ है।
  • क्या प्लेसेंटा की पोजीशन से गर्भ में पल रहे शिशु के जेंडर का पता चल सकता है?

    प्लेसेंटा की पोजीशन से गर्भ में पल रहे शिशु के जेंडर का पता नहीं लगाया जा सकता है। यह महज एक मिथक है।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 08, 2026 17:02 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta